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पितृ विसर्जन अमावस्या आज, कल से एक माह तक अधिमास
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बदायूं। दो सितंबर से शुरू पितृपक्ष का बृहस्पतिवार को पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ समापन हो जाएगा। शुक्रवार से एक माह के लिए अधिमास प्रारंभ हो जाएंगे। इस दौरान सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इस बार पितृ विसर्जन अमावस्या के एक माह बाद शारदीय नवरात्र होंगे। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि पितरों की विदाई के लिए बृहस्पतिवार का दिन काफी शुभ होता है। इस बार पितृ विसर्जन अमावस्या बृहस्पतिवार को है।
इस वर्ष दो सितंबर को पूर्णमासी से पितृपक्ष का प्रारंभ हुआ था। 17 सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 सितंबर से एक माह का समय अशुद्ध आश्विन मास, अधिमास या मलमास का रहेगा। इस दौरान 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक सभी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। शुद्ध आश्विन माह 17 अक्टूबर से शुरू होगा। इस माह में नवरात्र समेत राम नवमी, विजय दशमी, देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी। पितृ विसर्जन अमावस्या श्राद्ध का अंतिम दिन होता है। शास्त्रों में आश्विन माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मोक्षदायिनी अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या कहा गया है।
मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मृत्यु लोक आए हुए पितृजन वापस लौट जाते हैं। मान्यता के अनुसार बृहस्पतिवार का दिन पितरों के विसर्जन के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन पितरों को विदा करने से पितृ देव बहुत प्रसन्न होते हैं। क्योंकि यह मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु की पूजा का दिन माना जाता है। इस कारण सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का विसर्जन विधि-विधान से किया जाना चाहिए।
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पितृपक्ष के बाद अधिमास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। अधिमास समाप्त होने के बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। ज्योतिषविदों का कहना है कि लगभग 165 साल बाद यह अजब संयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार सूर्य और चंद्र वर्ष में हर साल 11 दिन का अंतर हो जाता है। ऐसे में हर तीन साल में एक बार अधिमास होते हैं।
अमावस्या तिथि प्रारंभ- शाम 07:58:17 बजे से (16 सितंबर, 2020)
अमावस्या तिथि समाप्त- शाम 04:31:32 बजे (17 सितंबर, 2020)
हिंदू पंचांग में बारह मास सूर्य की संक्रांति और चंद्रमा पर आधारित होते हैं। हर वर्ष सूर्य और चंद्रमास में लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। तीन वर्ष में यह अंतर लगभग एक माह का हो जाता है इसलिए हर तीसरे वर्ष अधिमास आ जाता है। इसको लोकाचार में मलमास भी कहा जाता है। इस बार 17 सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या के बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक का समय आश्विन अधिमास में गिना जाएगा। अधिमास के बाद 17 से 26 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्र होंगे।
- पंडित गिरीश शर्मा, ज्योतिषाचार्य
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इस वर्ष दो सितंबर को पूर्णमासी से पितृपक्ष का प्रारंभ हुआ था। 17 सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 सितंबर से एक माह का समय अशुद्ध आश्विन मास, अधिमास या मलमास का रहेगा। इस दौरान 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक सभी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। शुद्ध आश्विन माह 17 अक्टूबर से शुरू होगा। इस माह में नवरात्र समेत राम नवमी, विजय दशमी, देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी। पितृ विसर्जन अमावस्या श्राद्ध का अंतिम दिन होता है। शास्त्रों में आश्विन माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मोक्षदायिनी अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या कहा गया है।
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मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मृत्यु लोक आए हुए पितृजन वापस लौट जाते हैं। मान्यता के अनुसार बृहस्पतिवार का दिन पितरों के विसर्जन के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन पितरों को विदा करने से पितृ देव बहुत प्रसन्न होते हैं। क्योंकि यह मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु की पूजा का दिन माना जाता है। इस कारण सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का विसर्जन विधि-विधान से किया जाना चाहिए।
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पितृपक्ष के बाद अधिमास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। अधिमास समाप्त होने के बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। ज्योतिषविदों का कहना है कि लगभग 165 साल बाद यह अजब संयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार सूर्य और चंद्र वर्ष में हर साल 11 दिन का अंतर हो जाता है। ऐसे में हर तीन साल में एक बार अधिमास होते हैं।
अमावस्या तिथि प्रारंभ- शाम 07:58:17 बजे से (16 सितंबर, 2020)
अमावस्या तिथि समाप्त- शाम 04:31:32 बजे (17 सितंबर, 2020)
हिंदू पंचांग में बारह मास सूर्य की संक्रांति और चंद्रमा पर आधारित होते हैं। हर वर्ष सूर्य और चंद्रमास में लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। तीन वर्ष में यह अंतर लगभग एक माह का हो जाता है इसलिए हर तीसरे वर्ष अधिमास आ जाता है। इसको लोकाचार में मलमास भी कहा जाता है। इस बार 17 सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या के बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक का समय आश्विन अधिमास में गिना जाएगा। अधिमास के बाद 17 से 26 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्र होंगे।
- पंडित गिरीश शर्मा, ज्योतिषाचार्य