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स्कूल बस का ब्रेक फेल, बाल-बाल बचे बच्चे

Fri, 21 Jul 2017 07:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Updated Fri, 21 Jul 2017 07:50 PM IST
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School bus ramped into tree
स्कूल बस - फोटो : अमर उजाला
सप्ताह भर पहले एक स्कूली वैन में आग लगने के बाद भी नहीं चेता कोई
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ब्रेक फेल होने से अनियंत्रित हुई निजी स्कूल की बस बिजली के पोल से टकरा गई। बस में करीब 40 से ज्यादा बच्चे सवार थे। हादसे से बस में सवार बच्चों के बीच चीखपुकार मच गई। बस की टक्कर से बिजली का पोल क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही इस हादसे के बाद बच्चे कुशल रहे। लगभग सात दिन पहले भी एलपीजी लगी एक स्कूल वैन में आग लग गई थी। इस दौरान राहगीरों की सतर्कता से बच्चों को सकुशल बचा लिया गया था।       
बस के ब्रेक फेल होने की घटना शुक्रवार दिन में एक बजे की है। एक निजी स्कूल की बस छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने कुरऊ जा रही थी। रास्ते में कबूलपुरा के सोथा गांव के नजदीक पहुंचते ही अचानक बस के ब्रेक फेल हो गए। अनियंत्रित होकर बस सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से जा टकराई। तेज धमाके की आवाज सुनकर बच्चे सहम गए। बच्चों की चीखपुकार सुनकर उन्हें सकुशल निकाला गया। हादसे के वक्त बस में करीब 40 बच्चे सवार थे। दुर्घटना में चालक भी बाल-बाल बच गया, बिजली का पोल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। बाद में दूसरी बस से बच्चों को घर भिजवाया गया। स्कूल में खटारा बसों को ठीक कराकर उनका संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। हादसे के बाद से बच्चों के परिवार वालों को सात दिन पहले गुलड़िया नगर पंचायत के पास हुई घटना याद आ गई। निजी स्कूल की वैन बच्चों को छोड़ने नवादा स्थित स्कूल जा रही थी, वैन में करीब 20 बच्चे सवार थे। एलपीजी लगी इस वैन में अचानक आग लग गई थी। हादसे के बाद चालक बच्चों को छोड़कर फरार हो गया था, लेकिन राहगीरों की सतर्कता से इस दुर्घटना में बच्चों को सकुशल वैन से निकाल लिया गया था।       
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कंडम वाहन में बच्चे सुरक्षित नहीं      
जिला प्रशासन स्तर से लगातार स्कूल प्रशासन को चेताया जा रहा है कि कंडम वाहनों में बच्चों का सफर ठीक नहीं हैं, उनकी जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। बावजूद इसके जिले में बड़े पैमाने पर निजी वैन, कंडम बसों और एलपीजी लगी वैन से बच्चों को स्कूल पहुंचाया जा रहा हैं। गनीमत रही कि दोनों घटनाओं में कोई अनहोनी नहीं हुई लेकिन स्कूल वाले फिर भी नहीं चेत रहे हैं। परिवहन विभाग के अफसर लगातार अभियान चलाने की बात करते हैं लेकिन करते कुछ नहीं।
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