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कहां से आ रही बालू भरी टैक्टर-ट्रॉलियां
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:37 PM IST
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कहां से आ रही बालू भरी टैक्टर-ट्रॉलियां
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में बालू का एक ही खनन प्वाइंट, जिसकी अवधि हो चुकी है समाप्त
शहर समेत कस्बों में बिना लाइसेंस बना रखे हैं बालू स्टॉक
दोगुनी और तीन गुनी कीमत पर मिल रही हैं ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरी बालू
जिले में कछला गंगा घाट पर बालू खनन का एक ही प्वाइंट था, जिसकी समयावधि समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके इन दिनों में बालू की कोई कमी नजर नहीं आ रही है। राजस्व का चूना लगाते हुए बालू माफिया अब भी खुलेआम ट्रैक्टर ट्रॉलियां शहर में जहां-तहां खड़ी कर दो से तीन गुना मुनाफे में बालू की बिक्री कर रहे हैं और विभाग अनजान बना हुआ है।
बरसात के दिनों में भवनों का निर्माण कार्य और दीवारों पर प्लास्टर अच्छा माना जाता है। बालू की मांग भी बढ़ जाती है। जिले में बालू खनन का एक ही प्वाइंट कछला गंगा घाट पर था। उसकी भी समयावधि समाप्त हो चुकी है। इसके पट्टे का समय 16 जुलाई तक का था, जो पूरा हो चुका है। अब लिखित तौर पर तो जिलेभर में कहीं भी बालू का खनन नहीं हो रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय से लेकर सभी नगर-उप नगरों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरी बालू बेची जा रही है। इसकी कीमत दो से तीन हजार रुपये तक वसूली जा रही है। इससे पूर्व 1200 से 1700 रुपये के बीच ही थी।
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कई जगह भारी स्टॉक लाइसेंस केवल दो
बदायूं। शहर ही नहीं आसपास के शहर और कस्बों मेें बालू के अवैध रूप से लोगों ने स्टॉक जमा कर रखे हैं। इनसे ही ट्रैक्टर ट्रॉलियां भरकर बालू बेचा जा रहा है। अन्यथा जहां तहां खेतों में गंगा किनारे निकल रहे बालू को लाकर भी बाजार में बेचा जा रहा है। वैध रूप से स्टोर के लिए केवल दो लाइसेंस जारी हुए हैं। जिले की पूर्ति के लिए यह नाकाफी हैं।
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जिले के राजस्व को हो रहा भारी नुकसान
बदायूं। जिले को इकलौते बालू खनन प्वाइंट के ठेके से तीन साल में लगभग एक करोड़ का राजस्व प्राप्त होता रहा है। अब खनन प्वाइंट बंद हो जाने से पूर्व इसकी कोई नीलामी नहीं हो सकी और न ही बालू की बिक्री पर कोई प्रभाव पड़ा है। बालू खूब मिल रही है, लेकिन ग्राहक को उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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यह सही है कि जिले का इकलौता बालू खनन प्वाइंट समयावधि पूरी होने पर बंद हो चुका है। दो लोगों ने बालू के स्टोरेज के लिए लाइसेंस ले रखे हैं। जो ट्रैक्टर ट्रॉलियां बिक्री को दिखाई दे रही हैं, वह उन्हीं की हो सकती हैं। अगर, इसमें कहीं और बिना लाइसेंस स्टोर कर रखा है तो जांच कराई जाएगी और कार्रर्वाई होगी।
- अशोक कुमार श्रीवास्तव, एडीएम, प्रशासन
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शहर समेत कस्बों में बिना लाइसेंस बना रखे हैं बालू स्टॉक
दोगुनी और तीन गुनी कीमत पर मिल रही हैं ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरी बालू
जिले में कछला गंगा घाट पर बालू खनन का एक ही प्वाइंट था, जिसकी समयावधि समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके इन दिनों में बालू की कोई कमी नजर नहीं आ रही है। राजस्व का चूना लगाते हुए बालू माफिया अब भी खुलेआम ट्रैक्टर ट्रॉलियां शहर में जहां-तहां खड़ी कर दो से तीन गुना मुनाफे में बालू की बिक्री कर रहे हैं और विभाग अनजान बना हुआ है।
बरसात के दिनों में भवनों का निर्माण कार्य और दीवारों पर प्लास्टर अच्छा माना जाता है। बालू की मांग भी बढ़ जाती है। जिले में बालू खनन का एक ही प्वाइंट कछला गंगा घाट पर था। उसकी भी समयावधि समाप्त हो चुकी है। इसके पट्टे का समय 16 जुलाई तक का था, जो पूरा हो चुका है। अब लिखित तौर पर तो जिलेभर में कहीं भी बालू का खनन नहीं हो रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय से लेकर सभी नगर-उप नगरों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरी बालू बेची जा रही है। इसकी कीमत दो से तीन हजार रुपये तक वसूली जा रही है। इससे पूर्व 1200 से 1700 रुपये के बीच ही थी।
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कई जगह भारी स्टॉक लाइसेंस केवल दो
बदायूं। शहर ही नहीं आसपास के शहर और कस्बों मेें बालू के अवैध रूप से लोगों ने स्टॉक जमा कर रखे हैं। इनसे ही ट्रैक्टर ट्रॉलियां भरकर बालू बेचा जा रहा है। अन्यथा जहां तहां खेतों में गंगा किनारे निकल रहे बालू को लाकर भी बाजार में बेचा जा रहा है। वैध रूप से स्टोर के लिए केवल दो लाइसेंस जारी हुए हैं। जिले की पूर्ति के लिए यह नाकाफी हैं।
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जिले के राजस्व को हो रहा भारी नुकसान
बदायूं। जिले को इकलौते बालू खनन प्वाइंट के ठेके से तीन साल में लगभग एक करोड़ का राजस्व प्राप्त होता रहा है। अब खनन प्वाइंट बंद हो जाने से पूर्व इसकी कोई नीलामी नहीं हो सकी और न ही बालू की बिक्री पर कोई प्रभाव पड़ा है। बालू खूब मिल रही है, लेकिन ग्राहक को उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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यह सही है कि जिले का इकलौता बालू खनन प्वाइंट समयावधि पूरी होने पर बंद हो चुका है। दो लोगों ने बालू के स्टोरेज के लिए लाइसेंस ले रखे हैं। जो ट्रैक्टर ट्रॉलियां बिक्री को दिखाई दे रही हैं, वह उन्हीं की हो सकती हैं। अगर, इसमें कहीं और बिना लाइसेंस स्टोर कर रखा है तो जांच कराई जाएगी और कार्रर्वाई होगी।
- अशोक कुमार श्रीवास्तव, एडीएम, प्रशासन