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पुलिस ने दबा दिए पशु तस्करी के दो और मामले
बदायूं।
Updated Thu, 26 Feb 2015 12:22 AM IST
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अवैध नखासे से बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी के बाद पुलिस ने जरीफनगर थाने में प्रतिबंधित पशुओं की खेप और मूसाझाग में प्रतिबंधित पशुओं की बरामदगी के मामलों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। पुलिस का ढुलमुल रवैया पशु तस्करों के हौसले बुलंद किए हुए है। बड़े पशु तस्करों तक पहुंचने के लिए बनाई गईं चार टीमें भी अब तक कुछ खास नहीं कर पा रही हैं।
पिछले दिनों बिनावर थाना क्षेत्र के सेमरमई के अवैध नखासे से बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ था। पुलिस ने प्रतिबंधित पशुओं से भरे 78 वाहन पकड़े थे। तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर इन वाहनों के 100 क्लीनर और चालकों को जेल भेज दिया था। सभी वाहन पशुओं को लेकर मुरादाबाद और रामपुर जा रहे थे। कार्रवाई के नाम पर बड़े तस्करों तक पहुंचने के लिए चार टीमें बनाई गई थीं। इसके बाद जरीफनगर पुलिस ने वध को ले जाई जा रही तीन दर्जन प्रतिबंधित पशुओं की खेप पकड़ी थी। यहां भी पुलिस ने बड़े तस्करों तक पहुंचने की जरूरत नहीं समझी। दो दिन पहले मूसाझाग थाना क्षेत्र में नए तरीके से प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी का मामला सामने आया। प्रतिबंधित पशुओं को नशा देकर डीसीएम में भरने के बाद इनके ऊपर से मटर की बोरियां भरी गई थीं। यह डीसीएम दातागंज रोड पर अंधे की प्याऊ के पास पलट गई। इसमें 17 पशुओं की मौत हो गई। डीसीएम के नंबर ट्रेस किया गया तो पता लगा कि नंबर ऑटो रिक्शा का है। इस मामले को भी पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में पुलिस की बड़े पशु तस्करों तक पहुंचने की कवायद पर सवाल उठ रहे हैं।
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पिछले दिनों बिनावर थाना क्षेत्र के सेमरमई के अवैध नखासे से बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ था। पुलिस ने प्रतिबंधित पशुओं से भरे 78 वाहन पकड़े थे। तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर इन वाहनों के 100 क्लीनर और चालकों को जेल भेज दिया था। सभी वाहन पशुओं को लेकर मुरादाबाद और रामपुर जा रहे थे। कार्रवाई के नाम पर बड़े तस्करों तक पहुंचने के लिए चार टीमें बनाई गई थीं। इसके बाद जरीफनगर पुलिस ने वध को ले जाई जा रही तीन दर्जन प्रतिबंधित पशुओं की खेप पकड़ी थी। यहां भी पुलिस ने बड़े तस्करों तक पहुंचने की जरूरत नहीं समझी। दो दिन पहले मूसाझाग थाना क्षेत्र में नए तरीके से प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी का मामला सामने आया। प्रतिबंधित पशुओं को नशा देकर डीसीएम में भरने के बाद इनके ऊपर से मटर की बोरियां भरी गई थीं। यह डीसीएम दातागंज रोड पर अंधे की प्याऊ के पास पलट गई। इसमें 17 पशुओं की मौत हो गई। डीसीएम के नंबर ट्रेस किया गया तो पता लगा कि नंबर ऑटो रिक्शा का है। इस मामले को भी पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में पुलिस की बड़े पशु तस्करों तक पहुंचने की कवायद पर सवाल उठ रहे हैं।
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