{"_id":"57af393f4f1c1be82cee446a","slug":"azim-conditions-and-then-returned-to-the-valley-family","type":"story","status":"publish","title_hn":"हालात देखकर घाटी से लौट आया अजीम का परिवार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हालात देखकर घाटी से लौट आया अजीम का परिवार
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2016 11:52 PM IST
विज्ञापन
हालात देखकर घाटी से लौट आया अजीम का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बोले, ‘गो इंडिया’ का नारा लगाकर भगाए जा रहे गैरकश्मीरी
जान बचाकर ट्रक में छिपकर आया दबतोरी का परिवार
आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद बिगड़े हालात
चंदौसी के मितरौली गांव के पांच हिंदू भी संग आए
कश्मीर घाटी में इन दिनों हालात बेहद खराब हैं। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से गैर कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है। %गो इंडिया% के नारे लगाकर गैर कश्मीरियों को कश्मीर से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए मुहिम सी चल रही है। उनको हर तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। गैर कश्मीरी लोग, वो चाहे मुसलमान ही क्यों न हों.. सुरक्षित नहीं है, वे जान बचाने को मौका देख वहां से लगातार पलायन कर रहे हैं।
ये हकीकत उस परिवार ने बयां की है, जो कश्मीर के हालात को बेहद करीब से देखने के बाद उपद्रवियों से बचते-बचाते गत दस अगस्त को अपने गांव लौट आया है। इस परिवार के चार लोग वहां रोजी-रोटी कमाने के लिए गए थे। पिछले साल कश्मीर में आई बाढ़ में अपना सब कुछ गंवाने के बाद भी इन्होंने हौसला नहीं खोया था, लेकिन इन दिनों घाटी में जो हालात उभरे हैं, उससे इनकी हिम्मत जवाब दे गई है। बिसौली थाना क्षेत्र के गांव दबतोरी निवासी अजीम का बड़ा बेटा राजू अपने दो भाई हारुन, फारूक और बहन शानू को लेकर गांव आ गया है। अपना जमा-जमाया कारोबार छिन जाने से वह टूट सा गया है।
बकौल राजू, वह रोजगार की तलाश में अपने एक दोस्त के साथ 2003 में कश्मीर गया था। कश्मीर से करीब आठ किमी दूर सालटिक चौक पर वह फलों का ठेला लगाने लगा। उसका काम चला तो वह भाई-बहनों को भी वहां ले गया। धंधा ठीक चल रहा था, लेकिन आतंकी बुरहान के मारे जाने के बाद से तो वहां रहना मुहाल हो गया। वह जिस बिल्डिंग में रहते थे, उसमें हिंदुस्तान के कई प्रांतों से आए करीब डेढ़ सौ लोग किराए पर रहते थे। उनमें हिंदू-मुसलमान दोनों थे। उनको कट्टरपंथी कश्मीर छोड़ने के लिए धमकाने लगे। मस्जिदों से गो इंडिया का नारा लगाया जाने लगा। पाकिस्तान जिंदाबाद के साथ भारतीय झंडे का अपमान आम बात हो गई। जब जान पर बन आई, तो सभी वहां से पलायन करने लगे। वह खुद आठ अगस्त को रात में बहन-भाइयों को साथ लेकर एक ट्रक में बैठकर जम्मू तक आया। उनके साथ चंदौसी के मितरौली गांव के पांच हिंदू रामवीर, सोनू, पुनीत, विनीत, राहुल भी थे, जिन्होंने कश्मीर छोड़ा।
विज्ञापन
-----
...हमें नहीं मिला मुआवजा
दबतोरी। कश्मीर से लौटे राजू का कहना है कि पिछले साल जब कश्मीर में बाढ़ आई, तो उसका काफी नुकसान हुआ। तब जम्मू-कश्मीर सरकार ने बाढ़ पीड़ित कश्मीरियों को तीन-तीन लाख और गैर कश्मीरियों को 70-70 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। कश्मीरियों को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन उनको आज तक नहीं मिला। इसके बाद भी उसने परिवार के साथ धंधे को फिर जमा लिया था।
-----
रात में निकलते वक्त ट्रक पर फेंके गए पत्थर
दबतोरी। बिसौली के गांव सतारपुर निवासी रामपाल सिंह का पुत्र भूरे भी कश्मीर गया था। वह भी उसी ट्रक से राजू के साथ आया है। उसका कहना है कि रात को निकलते वक्त ट्रक पर पत्थर फेंके गए। उनके सामने पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले किया गया। मस्जिदों से हिंदुस्तान के खिलाफ भड़काने का काम जारी है। वहां मुसलमान होने की पहचान भी देनी होती है। इसके बाद भी उनको ठहरने नहीं दिया जाता। अब तो ढूंढ़कर सबको कश्मीर से बाहर करने का काम कट्टरपंथी कर रहे हैं। पुलिस की चल नहीं रही और सेना कुछ कर नहीं रही। ऐसे में कश्मीर छोड़ने में ही उसने भलाई समझी।
-----
बैग भी बरेली स्टेशन पर छूटा
दबतोरी। लौटते वक्त बरेली के रेलवे स्टेशन पर राजू का बैग छूट गया था। आरपीएफ ने उसको संभाल कर रखा। उसमें साढ़े चौदह हजार रुपये और कागजात थे। राजू के पहुंचने पर आरपीएफ ने पड़ताल के बाद ये बैग उसके हवाले कर दिया।
विज्ञापन
जान बचाकर ट्रक में छिपकर आया दबतोरी का परिवार
आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद बिगड़े हालात
चंदौसी के मितरौली गांव के पांच हिंदू भी संग आए
कश्मीर घाटी में इन दिनों हालात बेहद खराब हैं। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से गैर कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है। %गो इंडिया% के नारे लगाकर गैर कश्मीरियों को कश्मीर से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए मुहिम सी चल रही है। उनको हर तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। गैर कश्मीरी लोग, वो चाहे मुसलमान ही क्यों न हों.. सुरक्षित नहीं है, वे जान बचाने को मौका देख वहां से लगातार पलायन कर रहे हैं।
ये हकीकत उस परिवार ने बयां की है, जो कश्मीर के हालात को बेहद करीब से देखने के बाद उपद्रवियों से बचते-बचाते गत दस अगस्त को अपने गांव लौट आया है। इस परिवार के चार लोग वहां रोजी-रोटी कमाने के लिए गए थे। पिछले साल कश्मीर में आई बाढ़ में अपना सब कुछ गंवाने के बाद भी इन्होंने हौसला नहीं खोया था, लेकिन इन दिनों घाटी में जो हालात उभरे हैं, उससे इनकी हिम्मत जवाब दे गई है। बिसौली थाना क्षेत्र के गांव दबतोरी निवासी अजीम का बड़ा बेटा राजू अपने दो भाई हारुन, फारूक और बहन शानू को लेकर गांव आ गया है। अपना जमा-जमाया कारोबार छिन जाने से वह टूट सा गया है।
विज्ञापन
बकौल राजू, वह रोजगार की तलाश में अपने एक दोस्त के साथ 2003 में कश्मीर गया था। कश्मीर से करीब आठ किमी दूर सालटिक चौक पर वह फलों का ठेला लगाने लगा। उसका काम चला तो वह भाई-बहनों को भी वहां ले गया। धंधा ठीक चल रहा था, लेकिन आतंकी बुरहान के मारे जाने के बाद से तो वहां रहना मुहाल हो गया। वह जिस बिल्डिंग में रहते थे, उसमें हिंदुस्तान के कई प्रांतों से आए करीब डेढ़ सौ लोग किराए पर रहते थे। उनमें हिंदू-मुसलमान दोनों थे। उनको कट्टरपंथी कश्मीर छोड़ने के लिए धमकाने लगे। मस्जिदों से गो इंडिया का नारा लगाया जाने लगा। पाकिस्तान जिंदाबाद के साथ भारतीय झंडे का अपमान आम बात हो गई। जब जान पर बन आई, तो सभी वहां से पलायन करने लगे। वह खुद आठ अगस्त को रात में बहन-भाइयों को साथ लेकर एक ट्रक में बैठकर जम्मू तक आया। उनके साथ चंदौसी के मितरौली गांव के पांच हिंदू रामवीर, सोनू, पुनीत, विनीत, राहुल भी थे, जिन्होंने कश्मीर छोड़ा।
विज्ञापन
-----
...हमें नहीं मिला मुआवजा
दबतोरी। कश्मीर से लौटे राजू का कहना है कि पिछले साल जब कश्मीर में बाढ़ आई, तो उसका काफी नुकसान हुआ। तब जम्मू-कश्मीर सरकार ने बाढ़ पीड़ित कश्मीरियों को तीन-तीन लाख और गैर कश्मीरियों को 70-70 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। कश्मीरियों को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन उनको आज तक नहीं मिला। इसके बाद भी उसने परिवार के साथ धंधे को फिर जमा लिया था।
-----
रात में निकलते वक्त ट्रक पर फेंके गए पत्थर
दबतोरी। बिसौली के गांव सतारपुर निवासी रामपाल सिंह का पुत्र भूरे भी कश्मीर गया था। वह भी उसी ट्रक से राजू के साथ आया है। उसका कहना है कि रात को निकलते वक्त ट्रक पर पत्थर फेंके गए। उनके सामने पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले किया गया। मस्जिदों से हिंदुस्तान के खिलाफ भड़काने का काम जारी है। वहां मुसलमान होने की पहचान भी देनी होती है। इसके बाद भी उनको ठहरने नहीं दिया जाता। अब तो ढूंढ़कर सबको कश्मीर से बाहर करने का काम कट्टरपंथी कर रहे हैं। पुलिस की चल नहीं रही और सेना कुछ कर नहीं रही। ऐसे में कश्मीर छोड़ने में ही उसने भलाई समझी।
-----
बैग भी बरेली स्टेशन पर छूटा
दबतोरी। लौटते वक्त बरेली के रेलवे स्टेशन पर राजू का बैग छूट गया था। आरपीएफ ने उसको संभाल कर रखा। उसमें साढ़े चौदह हजार रुपये और कागजात थे। राजू के पहुंचने पर आरपीएफ ने पड़ताल के बाद ये बैग उसके हवाले कर दिया।