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राशन कोटे पर फिर बवाल, मारपीट
Updated Sat, 23 Dec 2017 12:22 AM IST
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प्रदर्शन करते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। राशन कोटों को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं कोटा प्रस्ताव पर बवाल हो रहा है तो कहीं प्रस्ताव के बाद दूसरा पक्ष हंगामा कर रहा है। कुंवरगांव थाना क्षेत्र में इससे एक कदम आगे बढ़कर ठेके पर कोटा चला रहे लोगों ने एक उपभोक्ता को बंधक बनाकर पीट लिया। यूपी 100 पुलिस उसे छुड़ाकर लाई तो कुंवरगांव थाना पुलिस ने इसे दो पक्षों की रंजिश बताकर चार लोगों को हवालात में डाल दिया।
कुंवरगांव के बनेई गांव में रफीक अहमद के नाम से राशन कोटा है। बताते हैं कि गांव निवासी शहरुल ने इसे बांटने का ठेका ले रखा है। वह अपने घर पर राशन वितरण करता है। गुरुवार को गांव निवासी शहंशाह राशन लेने गया था। राशन कल देने का आश्वासन मिला तो वह चला आया। शुक्रवार को वह फिर से राशन लेने पहुंचा। शहंशाह का आरोप है कि सुबह से शाम तक वह लाइन में लगा रहा पर राशन नहीं मिला। उसने विरोध जताया तो झगड़ा शुरू हो गया। इसके बाद शहरुल और उसके भतीजे नजरुल ने उन्हें पकड़कर कमरे में बंद कर लिया और जमकर पीटा। शहंशाह का परिचित अहसन कमरे के बाहर खड़ा था। उसने सौ नंबर पर सूचना दी तो यूपी 100 पहुंच गई। पुलिस ने कमरा खुलवाकर तीनों को बाहर निकाला और बाहर खड़े अहसन को भी शहंशाह की मदद के लिए साथ थाने ले आई। यहां इन्हें थाना पुलिस के हवाले कर यूपी 100 चली गई। इसके बाद पुलिस ने चारों को लॉकअप में डाल दिया। देर रात तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। एसआई शेरसिंह ने बताया कि जांच में पता लगा है कि दोनों पक्षों की आपसी रंजिश के चलते यह झगड़ा हुआ है। सुबह एसओ के आने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर कोटा निरस्त करने की मांग
बदायूं। उसावां ब्लाक के असमया रफतपुर गांव के लोगों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करके एडीएम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इन लोगों ने गांव में हुए कोटा प्रस्ताव को अवैध बताकर दोबारा प्रस्ताव कराने की मांग की। प्रधान ने बताया कि उनके गांव में 19 दिसंबर को कोटा प्रस्ताव होना था। इसमें नोडल अधिकारी नहीं पहुंचे और कोटा बैठक की तिथि आगे बढ़ाने की कोई सूचना भी नहीं दी। प्रधान का कहना था कि 21 दिसंबर को वह दवा लेने शहर आए थे। अचानक गांव पहुंचे सचिव आदि ने बिना ग्रामीणों को सूचना दिए कुछ लोगों के साथ बैठकर कोटा प्रस्ताव कर दिया। नियमानुसार प्रधान के लगातार तीन बैठकों में न पहुंचने पर किसी अन्य से अध्यक्षता कराकर प्रस्ताव बैठक की जा सकती है। इसलिए इसे पंचायती राज एक्ट का उल्लंघन मानकर कार्रवाई निरस्त की जाए।
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कुंवरगांव के बनेई गांव में रफीक अहमद के नाम से राशन कोटा है। बताते हैं कि गांव निवासी शहरुल ने इसे बांटने का ठेका ले रखा है। वह अपने घर पर राशन वितरण करता है। गुरुवार को गांव निवासी शहंशाह राशन लेने गया था। राशन कल देने का आश्वासन मिला तो वह चला आया। शुक्रवार को वह फिर से राशन लेने पहुंचा। शहंशाह का आरोप है कि सुबह से शाम तक वह लाइन में लगा रहा पर राशन नहीं मिला। उसने विरोध जताया तो झगड़ा शुरू हो गया। इसके बाद शहरुल और उसके भतीजे नजरुल ने उन्हें पकड़कर कमरे में बंद कर लिया और जमकर पीटा। शहंशाह का परिचित अहसन कमरे के बाहर खड़ा था। उसने सौ नंबर पर सूचना दी तो यूपी 100 पहुंच गई। पुलिस ने कमरा खुलवाकर तीनों को बाहर निकाला और बाहर खड़े अहसन को भी शहंशाह की मदद के लिए साथ थाने ले आई। यहां इन्हें थाना पुलिस के हवाले कर यूपी 100 चली गई। इसके बाद पुलिस ने चारों को लॉकअप में डाल दिया। देर रात तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। एसआई शेरसिंह ने बताया कि जांच में पता लगा है कि दोनों पक्षों की आपसी रंजिश के चलते यह झगड़ा हुआ है। सुबह एसओ के आने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर कोटा निरस्त करने की मांग
बदायूं। उसावां ब्लाक के असमया रफतपुर गांव के लोगों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करके एडीएम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इन लोगों ने गांव में हुए कोटा प्रस्ताव को अवैध बताकर दोबारा प्रस्ताव कराने की मांग की। प्रधान ने बताया कि उनके गांव में 19 दिसंबर को कोटा प्रस्ताव होना था। इसमें नोडल अधिकारी नहीं पहुंचे और कोटा बैठक की तिथि आगे बढ़ाने की कोई सूचना भी नहीं दी। प्रधान का कहना था कि 21 दिसंबर को वह दवा लेने शहर आए थे। अचानक गांव पहुंचे सचिव आदि ने बिना ग्रामीणों को सूचना दिए कुछ लोगों के साथ बैठकर कोटा प्रस्ताव कर दिया। नियमानुसार प्रधान के लगातार तीन बैठकों में न पहुंचने पर किसी अन्य से अध्यक्षता कराकर प्रस्ताव बैठक की जा सकती है। इसलिए इसे पंचायती राज एक्ट का उल्लंघन मानकर कार्रवाई निरस्त की जाए।
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