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अपराध छोड़ दिया पर दुश्मन नहीं भूले कांताप्रसाद को
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:27 PM IST
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इस्लामनगर। अपराध की राह छोड़कर खुशनुमा जिंदगी जी रहे हिस्ट्रीशीटर कांता प्रसाद के दुश्मनों ने आखिरकार उसे ठिकाने लगा ही दिया। घटना के दूसरे दिन भी पुलिस एक भी नामजद हत्यारोपी को नहीं खोज पाई। हालांकि एसओ दावा कर रहे हैं कि वह जल्दी ही हत्यारों की गिरफ्तारी करके घटना का खुलासा कर देंगे।
हिस्ट्रीशीटर कांताप्रसाद की गला रेतकर हत्या करके शव कुएं में डाल दिया गया था। रविवार को पुलिस ने शव कुएं से निकाला। सोमवार को पोस्टमार्टम में गला रेतकर हत्या करने की पुष्टि हुई। उम्रदराज होने के बाद जुर्म की दुनिया से दूर होकर कांता प्रसाद की जिंदगी मजे में कट रही थी। पांच में से दो बेटों की शादी करके वह खुश था। वह खुद खेतीबाड़ी से ज्यादा मुनाफा कमाने में लग गया। करीब दस साल से कांता प्रसाद ने सारे बुरे काम छोड़ रखे थे। वह खुश था कि बेटे मेहनत करके घर का खर्चा कर रहे हैं और उसका बुढ़ापा अच्छा कट रहा है। बावजूद उसके काले अतीत ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। दुश्मन अंदर ही अंदर घात लगाए रहे और उन्होंने मौका पाकर उसकी हत्या कर दी। पोस्टमार्टम के बाद शव का दाह संस्कार कर दिया गया। थानाध्यक्ष रामनरेश माथुर ने बताया कि जल्दी हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे।
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हिस्ट्रीशीटर कांताप्रसाद की गला रेतकर हत्या करके शव कुएं में डाल दिया गया था। रविवार को पुलिस ने शव कुएं से निकाला। सोमवार को पोस्टमार्टम में गला रेतकर हत्या करने की पुष्टि हुई। उम्रदराज होने के बाद जुर्म की दुनिया से दूर होकर कांता प्रसाद की जिंदगी मजे में कट रही थी। पांच में से दो बेटों की शादी करके वह खुश था। वह खुद खेतीबाड़ी से ज्यादा मुनाफा कमाने में लग गया। करीब दस साल से कांता प्रसाद ने सारे बुरे काम छोड़ रखे थे। वह खुश था कि बेटे मेहनत करके घर का खर्चा कर रहे हैं और उसका बुढ़ापा अच्छा कट रहा है। बावजूद उसके काले अतीत ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। दुश्मन अंदर ही अंदर घात लगाए रहे और उन्होंने मौका पाकर उसकी हत्या कर दी। पोस्टमार्टम के बाद शव का दाह संस्कार कर दिया गया। थानाध्यक्ष रामनरेश माथुर ने बताया कि जल्दी हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे।
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