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तहसील हवालात में बंद युवक की हालत बिगड़ी, अस्पताल ले जाते समय मौत
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सहसवान (बदायूं)। तहसील की हवालात में करीब 11 दिन से बंद युवक की गुरुवार को अचानक हालत बिगड़ गई। इससे राजस्व विभाग के अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में हवालात का ताला खोलकर उसे निकालने की कोशिश की गई, तो ऐन मौके पर चाभी नहीं मिली। उसके बाद हवालात का ताला तोड़कर उसे निकालकर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। डीएम का कहना है कि मामला गंभीर है। मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। एसडीएम सदर जांच करेंगे, जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। देर रात एसपी आरए डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह सहसवान कोतवाली पहुंचे। मृतक के भाई के महेश मौर्य ने तहरीर दी है जिसमें एसडीएम सहसवान, तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की गई है।
बकायेदार ब्रजपाल शाक्य (40) जरीफनगर निवासी था। वह जरीफनगर में देशी दवाओं की दुकान चलाता था। नवंबर 2018 में पावर कॉरपोरशन ने उसके खिलाफ दुकान में बिजली चोरी करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साथ ही उस पर 81947 रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद वसूली के लिए मामला राजस्व विभाग को दे दिया गया तो विभाग ने तीन नवंबर को उसकी आरसी काट दी, लेकिन ब्रजपाल जुर्माना राशि जमा नहीं कर सका। परिवार वालों के मुताबिक 23 सितंबर को तहसीलदार धीरेंद्र कुमार और अमीन आशाराम उनके घर पहुंचे और ब्रजपाल को पकड़कर तहसील ले आए। उन्होंने ब्रजपाल को तहसील की हवालात में बंद कर दिया। उसी समय से ब्रजपाल हवालात में बंद था। उसमें अन्य बकायेदार भी बंद थे। बताते हैं कि गुरुवार को अचानक ब्रजपाल की हालत बिगड़ गई। उसे उल्टियां होने लगीं। इस पर अन्य बकायेदारों ने आवाज लगाई। जो चौकीदार लगाया गया था, उस पर हवालात की चाभी नहीं थी। इसकी सूचना पर राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ईंट मारकर जैसे तैसे हवालात का ताला तोड़ा और ब्रजपाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
इधर, ब्रजपाल की मौत की खबर सुनते ही परिवार वालों में कोहराम मच गया। वह रोते-बिलखते हुए जिला अस्पताल पहुंच गए। देर शाम पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा दिया। फिलहाल ब्रजपाल के शव को परिवार वालों के हवाले कर दिया गया है। अभी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। चिकित्सकों ने इसकी पुष्टि के लिए बिसरा प्रिजर्व कर दिया है। पुलिस के मुताबिक ब्रजपाल के शरीर पर चोट के निशान भी नहीं मिले हैं।
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ब्रजपाल को व्यक्तिगत रूप से आरसी तामील कराई गई थी। 15 दिन बाद यानी 19 सितंबर को उसका गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। 23 सितंबर को हलका अमीन आशाराम ने बृजपाल को हवालात में बंद कराया था। उसकी पहले से कोई तबीयत खराब नहीं थी। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ी तो अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।
- संजय कुमार सिंह, एसडीएम सहसवान
यह मामला काफी गंभीर है, जिसे देखते हुए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। एसडीएम सदर इसकी जांच करेंगे। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश कुमार सिंह, डीएम
तहसीलदार बोलते रहे- ‘ड्रामा-ड्रामा’ ब्रजपाल की चली गई जान
बदायूं। सहसवान तहसील की हवालात में बंद किए गए बकायेदार ब्रजपाल की सिर्फ गुरुवार को हालत नहीं बिगड़ी थी, बल्कि गिरफ्तारी के दूसरे दिन शाम को भी ब्रजपाल की तबीयत बिगड़ गई थी। उसे खाना देने गए परिवार वालों ने ब्रजपाल को अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की थी, लेकिन तहसीलदार ने कह दिया कि ब्रजपाल ड्रामा कर रहा है।
जरीफनगर निवासी ब्रजपाल (40) दो भाइयों में बड़ा था। उसके एक बेटा देवराज और दो बेटियां रीता, सोमवती हैं। रीता की सहसवान निवासी रमेश से शादी हो चुकी है। ब्रजपाल खेतीबाड़ी के साथ-साथ लोगों को देशी दवाएं भी देता था। उसने जरीफनगर के लेखराम यादव के मकान में अपनी दुकान खोली थी। छोटे भाई महेश ने बताया कि जिस दिन तहसीलदार और अमीन उसके भाई को पकड़कर ले गए थे, उसके दूसरे दिन शाम ब्रजपाल की हालत बिगड़ गई थी। ब्रजपाल को रोजाना उसके दामाद रमेश खाना ले जाते थे। जब रमेश ने उनकी हालत देखी तो उन्होंने परिवार वालों को बताया। इस पर परिवार वाले तहसील पहुंचे थे। उन्होंने तहसीलदार से कहा था कि ब्रजपाल की हालत सही नहीं है। उन्हें अस्पताल में इलाज की जरूरत है। इस पर तहसीलदार ने कहा था कि ब्रजपाल बाहर निकलने के लिए ड्रामा कर रहा है। उन्होंने उसे अस्पताल नहीं भेजा। इसी का परिणाम रहा कि गुरुवार को ब्रजपाल की और ज्यादा हालत बिगड़ गई। बाद में उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया है।
बंदी बोले, मंजन करते वक्त बिगड़ी हालत
ब्रजपाल के साथ हवालात में बंद हीरालाल, सोरन सिंह, शायक अली, हुक्मी आदि ने बताया कि ब्रजपाल सुबह करीब सात बजे मंजन कर रहा था। तभी अचानक उसे खांसी आई और वह उल्टियां करने लगा। बाद में उसकी हालत बिगड़ती चली गई। उन लोगों ने शोर मचाया लेकिन उसे करीब साढ़े नौ बजे ताला तोड़कर बाहर निकाला गया। अगर ब्रजपाल को तुरंत इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
जिस समय ब्रजपाल को तहसील लाया गया था, तब उसकी हालत बिल्कुल सही थी। वह तो खुद लोगों को देशी दवाएं देता था। अगर उसकी हालत खराब थी तो वह हमें बता सकता था या फिर इलाज का कोई पर्चा दिखाता। उसकी तबीयत गुरुवार सुबह बिगड़ी थी। तभी उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
-धीरेंद्र कुमार, तहसीलदार
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बकायेदार ब्रजपाल शाक्य (40) जरीफनगर निवासी था। वह जरीफनगर में देशी दवाओं की दुकान चलाता था। नवंबर 2018 में पावर कॉरपोरशन ने उसके खिलाफ दुकान में बिजली चोरी करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साथ ही उस पर 81947 रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद वसूली के लिए मामला राजस्व विभाग को दे दिया गया तो विभाग ने तीन नवंबर को उसकी आरसी काट दी, लेकिन ब्रजपाल जुर्माना राशि जमा नहीं कर सका। परिवार वालों के मुताबिक 23 सितंबर को तहसीलदार धीरेंद्र कुमार और अमीन आशाराम उनके घर पहुंचे और ब्रजपाल को पकड़कर तहसील ले आए। उन्होंने ब्रजपाल को तहसील की हवालात में बंद कर दिया। उसी समय से ब्रजपाल हवालात में बंद था। उसमें अन्य बकायेदार भी बंद थे। बताते हैं कि गुरुवार को अचानक ब्रजपाल की हालत बिगड़ गई। उसे उल्टियां होने लगीं। इस पर अन्य बकायेदारों ने आवाज लगाई। जो चौकीदार लगाया गया था, उस पर हवालात की चाभी नहीं थी। इसकी सूचना पर राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ईंट मारकर जैसे तैसे हवालात का ताला तोड़ा और ब्रजपाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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इधर, ब्रजपाल की मौत की खबर सुनते ही परिवार वालों में कोहराम मच गया। वह रोते-बिलखते हुए जिला अस्पताल पहुंच गए। देर शाम पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा दिया। फिलहाल ब्रजपाल के शव को परिवार वालों के हवाले कर दिया गया है। अभी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। चिकित्सकों ने इसकी पुष्टि के लिए बिसरा प्रिजर्व कर दिया है। पुलिस के मुताबिक ब्रजपाल के शरीर पर चोट के निशान भी नहीं मिले हैं।
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ब्रजपाल को व्यक्तिगत रूप से आरसी तामील कराई गई थी। 15 दिन बाद यानी 19 सितंबर को उसका गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। 23 सितंबर को हलका अमीन आशाराम ने बृजपाल को हवालात में बंद कराया था। उसकी पहले से कोई तबीयत खराब नहीं थी। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ी तो अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।
- संजय कुमार सिंह, एसडीएम सहसवान
यह मामला काफी गंभीर है, जिसे देखते हुए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। एसडीएम सदर इसकी जांच करेंगे। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश कुमार सिंह, डीएम
तहसीलदार बोलते रहे- ‘ड्रामा-ड्रामा’ ब्रजपाल की चली गई जान
बदायूं। सहसवान तहसील की हवालात में बंद किए गए बकायेदार ब्रजपाल की सिर्फ गुरुवार को हालत नहीं बिगड़ी थी, बल्कि गिरफ्तारी के दूसरे दिन शाम को भी ब्रजपाल की तबीयत बिगड़ गई थी। उसे खाना देने गए परिवार वालों ने ब्रजपाल को अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की थी, लेकिन तहसीलदार ने कह दिया कि ब्रजपाल ड्रामा कर रहा है।
जरीफनगर निवासी ब्रजपाल (40) दो भाइयों में बड़ा था। उसके एक बेटा देवराज और दो बेटियां रीता, सोमवती हैं। रीता की सहसवान निवासी रमेश से शादी हो चुकी है। ब्रजपाल खेतीबाड़ी के साथ-साथ लोगों को देशी दवाएं भी देता था। उसने जरीफनगर के लेखराम यादव के मकान में अपनी दुकान खोली थी। छोटे भाई महेश ने बताया कि जिस दिन तहसीलदार और अमीन उसके भाई को पकड़कर ले गए थे, उसके दूसरे दिन शाम ब्रजपाल की हालत बिगड़ गई थी। ब्रजपाल को रोजाना उसके दामाद रमेश खाना ले जाते थे। जब रमेश ने उनकी हालत देखी तो उन्होंने परिवार वालों को बताया। इस पर परिवार वाले तहसील पहुंचे थे। उन्होंने तहसीलदार से कहा था कि ब्रजपाल की हालत सही नहीं है। उन्हें अस्पताल में इलाज की जरूरत है। इस पर तहसीलदार ने कहा था कि ब्रजपाल बाहर निकलने के लिए ड्रामा कर रहा है। उन्होंने उसे अस्पताल नहीं भेजा। इसी का परिणाम रहा कि गुरुवार को ब्रजपाल की और ज्यादा हालत बिगड़ गई। बाद में उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया है।
बंदी बोले, मंजन करते वक्त बिगड़ी हालत
ब्रजपाल के साथ हवालात में बंद हीरालाल, सोरन सिंह, शायक अली, हुक्मी आदि ने बताया कि ब्रजपाल सुबह करीब सात बजे मंजन कर रहा था। तभी अचानक उसे खांसी आई और वह उल्टियां करने लगा। बाद में उसकी हालत बिगड़ती चली गई। उन लोगों ने शोर मचाया लेकिन उसे करीब साढ़े नौ बजे ताला तोड़कर बाहर निकाला गया। अगर ब्रजपाल को तुरंत इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
जिस समय ब्रजपाल को तहसील लाया गया था, तब उसकी हालत बिल्कुल सही थी। वह तो खुद लोगों को देशी दवाएं देता था। अगर उसकी हालत खराब थी तो वह हमें बता सकता था या फिर इलाज का कोई पर्चा दिखाता। उसकी तबीयत गुरुवार सुबह बिगड़ी थी। तभी उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
-धीरेंद्र कुमार, तहसीलदार