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पिस्टल कांड की जांच कर रहे इंस्पेक्टर का तबादला, दूसरे को सौंपी गई जांच
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बदायूं। शहर के बहुचर्चित पिस्टल कांड की जांच करने वाले इंस्पेक्टर का तबादला मुरादाबाद हो गया है, जिसके बाद नये इंस्पेक्टर को इसकी जांच सौंप दी गई है। पिछले साल नवंबर में हुआ यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था, जिसमें कई हाई प्रोफाइल लोगों के नाम आए थे। हालांकि पुलिस ने इसमें खेल करते हुए कई ऐसे लोगों के नाम हटा दिए थे, जो सीधे-सीधे मुंगेर की पिस्टलों के खरीद फरोख्त के धंधे में लिप्त थे।
नवंबर-18 में पुलिस ने एक नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के गन हाउस पर काम करने वाले नौकर समेत नौ लोगों को पकड़ा था। उनके पास मुंगेर की आठ पिस्टल बरामद हुई थीं। बताया जाता है कि जब पुलिस को पता चला कि इस मामले में कई मालदार लोग भी फंस रहे हैं तो पुलिस ने कार्रवाई की बजाय लोगों को धमकाकर पकड़ने और फिर पैसा लेकर छोड़ दिया। अगले दिन केवल नौ लोगों के साथ आठ पिस्टलों की बरामदगी दिखाई गई। इससे पहले पुलिस ने मुखबिरी के आधार पर ककराला निवासी भूरा को पकड़ा था, जिसकी निशानदेही पर पूर्व नगर पंचायत चेयरमैन व उसके बेटे व नौकर को उठाया गया था। बताते हैं कि पुलिस ने पूर्व नगर पंचायत के अध्यक्ष के बेटे को रात भर हवालात में रखा और सुबह मोटा सौदा होने के बाद उसे छोड़ दिया था। जिन अन्य लोगों को उठाया गया, उनसे भी मोटी सौदेबाजी की गई थी। मामले की जानकारी डीआईजी राजेश कुमार पांडेय तक पहुंचने के बाद इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। क्राइम ब्रांच के सीनियर इंस्पेक्टर कृष्णमुरारी अब तक इस मामले की जांच कर रहे थे, लेकिन उनका स्थानांतरण मुरादाबाद हो गया। अब इस मामले की जांच इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार को सौंप दी गई है।
एक माह पूर्व म्याऊं में भी पकड़े गए थे हिस्ट्रीशीटर
- एक माह पूर्व म्याऊं बाजार से भी हिस्ट्रीशीटर चांद मोहम्मद और बंटी उर्फ अमित इस तरह की पिस्टलों के साथ पकड़े गए थे। उनके पास भी कई पिस्टल बरामद हुई थीं। उन्होंने भी पूछताछ में भूरा का नाम बताया था। भूरा ही वह आदमी है जिसके पकड़े जाने के बाद ही इस कांड का खुलासा हुआ था और उसने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष के नौकर समेत कई अन्य लोगों के नाम पुलिस को बताए थे।
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तत्कालीन एसएसपी पर भी गिर चुकी है गाज
- तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार पर भी इस मामले की गाज गिर चुकी है। उनका तबादला बरेली में एलआइयू एसपी के पद पर कर दिया गया था। यह उनके समय का ही मामला था। उन समेत कुछ अन्य अधीनस्थों पर इस मामले में इधर-उधर करने की चर्चा व्यापक रूप से थी, जिसमें एक व्यापारी नेता द्वारा मध्यस्थता करने की बात भी सामने आई थी। डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने खुद इस बात के संकेत दिए थे। तत्कालीन एसएसपी की भूमिका कहीं न कहीं इस मामले में संदिग्ध मानी गई थी।
राजनीतिक संरक्षण के चलते बेखौफ हैं धंधेबाज
-पिस्टलों की खरीद फरोख्त के मुख्य धंधेबाज राजनीतिक संरक्षण के चलते बेखौफ बैठे हैं। वह ये मानकर चल रहे हैं कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है। जिस रात इनको पकड़ा गया था उस दिन ही लाखों रुपये का सौदा पुलिस अधिकारियों से हुआ था। बताया तो यहां तक जाता है कि मुख्य धंधेबाज को छोड़ने के एवज में अधिकारियों ने एक बहुत बड़ी रकम उससे वसूली थी।
पिस्टल कांड की जांच कर रहे सीनियर इंस्पेक्टर कृष्णमुरारी का स्थानांतरण मुरादाबाद हो गया है, जिसके बाद इसकी जांच इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार को सौंप दी गई है। उन्हें कुछ दिन मामले को समझने में लगेंगे, इसके बाद जांच में तेजी आएगी। पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से होगी।
रमेश भारतीय, एसपी क्राइम ब्रांच, बरेली
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नवंबर-18 में पुलिस ने एक नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के गन हाउस पर काम करने वाले नौकर समेत नौ लोगों को पकड़ा था। उनके पास मुंगेर की आठ पिस्टल बरामद हुई थीं। बताया जाता है कि जब पुलिस को पता चला कि इस मामले में कई मालदार लोग भी फंस रहे हैं तो पुलिस ने कार्रवाई की बजाय लोगों को धमकाकर पकड़ने और फिर पैसा लेकर छोड़ दिया। अगले दिन केवल नौ लोगों के साथ आठ पिस्टलों की बरामदगी दिखाई गई। इससे पहले पुलिस ने मुखबिरी के आधार पर ककराला निवासी भूरा को पकड़ा था, जिसकी निशानदेही पर पूर्व नगर पंचायत चेयरमैन व उसके बेटे व नौकर को उठाया गया था। बताते हैं कि पुलिस ने पूर्व नगर पंचायत के अध्यक्ष के बेटे को रात भर हवालात में रखा और सुबह मोटा सौदा होने के बाद उसे छोड़ दिया था। जिन अन्य लोगों को उठाया गया, उनसे भी मोटी सौदेबाजी की गई थी। मामले की जानकारी डीआईजी राजेश कुमार पांडेय तक पहुंचने के बाद इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। क्राइम ब्रांच के सीनियर इंस्पेक्टर कृष्णमुरारी अब तक इस मामले की जांच कर रहे थे, लेकिन उनका स्थानांतरण मुरादाबाद हो गया। अब इस मामले की जांच इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार को सौंप दी गई है।
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एक माह पूर्व म्याऊं में भी पकड़े गए थे हिस्ट्रीशीटर
- एक माह पूर्व म्याऊं बाजार से भी हिस्ट्रीशीटर चांद मोहम्मद और बंटी उर्फ अमित इस तरह की पिस्टलों के साथ पकड़े गए थे। उनके पास भी कई पिस्टल बरामद हुई थीं। उन्होंने भी पूछताछ में भूरा का नाम बताया था। भूरा ही वह आदमी है जिसके पकड़े जाने के बाद ही इस कांड का खुलासा हुआ था और उसने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष के नौकर समेत कई अन्य लोगों के नाम पुलिस को बताए थे।
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तत्कालीन एसएसपी पर भी गिर चुकी है गाज
- तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार पर भी इस मामले की गाज गिर चुकी है। उनका तबादला बरेली में एलआइयू एसपी के पद पर कर दिया गया था। यह उनके समय का ही मामला था। उन समेत कुछ अन्य अधीनस्थों पर इस मामले में इधर-उधर करने की चर्चा व्यापक रूप से थी, जिसमें एक व्यापारी नेता द्वारा मध्यस्थता करने की बात भी सामने आई थी। डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने खुद इस बात के संकेत दिए थे। तत्कालीन एसएसपी की भूमिका कहीं न कहीं इस मामले में संदिग्ध मानी गई थी।
राजनीतिक संरक्षण के चलते बेखौफ हैं धंधेबाज
-पिस्टलों की खरीद फरोख्त के मुख्य धंधेबाज राजनीतिक संरक्षण के चलते बेखौफ बैठे हैं। वह ये मानकर चल रहे हैं कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है। जिस रात इनको पकड़ा गया था उस दिन ही लाखों रुपये का सौदा पुलिस अधिकारियों से हुआ था। बताया तो यहां तक जाता है कि मुख्य धंधेबाज को छोड़ने के एवज में अधिकारियों ने एक बहुत बड़ी रकम उससे वसूली थी।
पिस्टल कांड की जांच कर रहे सीनियर इंस्पेक्टर कृष्णमुरारी का स्थानांतरण मुरादाबाद हो गया है, जिसके बाद इसकी जांच इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार को सौंप दी गई है। उन्हें कुछ दिन मामले को समझने में लगेंगे, इसके बाद जांच में तेजी आएगी। पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से होगी।
रमेश भारतीय, एसपी क्राइम ब्रांच, बरेली