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मुंह पर मॉस्क न दो गज का फासला, फिर तो दिक्कत में डालेगा मजदूरों का ठिकाना!
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उझानी (बदायूं)। न तो मुंह पर मॉस्क और न ही भीड़ में एक-दूसरे से बचाव के लिए कोई सतर्क नजर आता। ऐसा ही नजारा मंगलवार को कोविड अस्पताल के पास देखने को मिला। दिहाड़ी मजदूरों का ठिकाना बने स्टेशन रोड पर रोजाना ही सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठे हो जाते हैं। खुद की सेहत से बेपरवाह दिहाड़ी मजदूरों को घरेलू कामकाज या फिर निर्माण कार्य में लगाने के लिए लोग बुला तो ले जाते हैं लेकिन इनमें से कोई किसी दूसरे की जिंदगी को खतरे में डाल दे, इसे लेकर भी गौर नहीं किया जाता।
दिहाड़ी मजदूरों का ठिकाना यहां कोविड अस्पताल अस्तित्व में आने से पहले तक उससे सटे पालिका के पहले गेट के आसपास रहा। अस्पताल में कोरोना संक्रमित भर्ती हुए तो पालिका ने दूसरे छोर वाले गेट तक इस ओर, वहीं दूसरी तरफ पुरानी अनाज मंडी मोड़ तक बैरिकेडिंग करा दी। इसके बाद दिहाड़ी मजदूरों ने पालिका के दूसरे गेट के आसपास इलाके को अपना ठिकाना बना लिया। इस ठिकाने पर सुबह में सात से प्रात: 10 बजे मजदूरों के अलावा राज-मिस्त्री और रोजमर्रा मेहनताने पर घरेलू कामकाज करने के लिए मजदूर उपलब्ध रहते हैं। सबसे अहम बात तो यह कि अपने ठिकाने पर जुटने वाले अधिकतर मजदूर कोरोना से जुड़े सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं करते। मुंह पर मॉस्क बहुत कम मजदूर लगाते हैं। ऐसा भी नहीं कि सभी दिहाड़ी मजदूर और राज मिस्त्री नगर निवासी हों। इनमें से कई तो आसपास गांवों के रहने वाले भी होते हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर वह कब दिल्ली या फिर अन्य इलाके से घर लौटे, यह भी किसी दूसरे को नहीं पता होता। इसी से परेशान स्टेशन रोड निवासी प्रमुख व्यापारियों की मानें तो कोविड अस्पताल के नजदीक की बजाय दिहाड़ी मजूदरों को ठिकाना गैर आबादी इलाके में बन जाए और उन्हें सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाए तो खतरा कम रहेगा।
दिहाड़ी मजदूरों को मुफीद रहेगा रामलीला मैदान
उझानी नगर पालिका परिषद कार्यालय गेट के पास जुटने वाले दिहाड़ी मजूदरों को लेकर आसपास के निवासियों में सराफ मनीष गोयल ने बताया कि चंद कदम आगे रामलीला मैदान खाली पड़ा है। रामलीला मैदान में कोई खास चहलकदमी भी नहीं रहती। लोगों के घर भी मैदान चारदीवारी से बाहर हैं। ऐसे में दिहाड़ी मजदूरों का ठिकाना रामलीला मैदान बन जाए तो मजदूरों से लेकर किसी और भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
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दिहाड़ी मजदूरों का ठिकाना यहां कोविड अस्पताल अस्तित्व में आने से पहले तक उससे सटे पालिका के पहले गेट के आसपास रहा। अस्पताल में कोरोना संक्रमित भर्ती हुए तो पालिका ने दूसरे छोर वाले गेट तक इस ओर, वहीं दूसरी तरफ पुरानी अनाज मंडी मोड़ तक बैरिकेडिंग करा दी। इसके बाद दिहाड़ी मजदूरों ने पालिका के दूसरे गेट के आसपास इलाके को अपना ठिकाना बना लिया। इस ठिकाने पर सुबह में सात से प्रात: 10 बजे मजदूरों के अलावा राज-मिस्त्री और रोजमर्रा मेहनताने पर घरेलू कामकाज करने के लिए मजदूर उपलब्ध रहते हैं। सबसे अहम बात तो यह कि अपने ठिकाने पर जुटने वाले अधिकतर मजदूर कोरोना से जुड़े सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं करते। मुंह पर मॉस्क बहुत कम मजदूर लगाते हैं। ऐसा भी नहीं कि सभी दिहाड़ी मजदूर और राज मिस्त्री नगर निवासी हों। इनमें से कई तो आसपास गांवों के रहने वाले भी होते हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर वह कब दिल्ली या फिर अन्य इलाके से घर लौटे, यह भी किसी दूसरे को नहीं पता होता। इसी से परेशान स्टेशन रोड निवासी प्रमुख व्यापारियों की मानें तो कोविड अस्पताल के नजदीक की बजाय दिहाड़ी मजूदरों को ठिकाना गैर आबादी इलाके में बन जाए और उन्हें सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाए तो खतरा कम रहेगा।
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दिहाड़ी मजदूरों को मुफीद रहेगा रामलीला मैदान
उझानी नगर पालिका परिषद कार्यालय गेट के पास जुटने वाले दिहाड़ी मजूदरों को लेकर आसपास के निवासियों में सराफ मनीष गोयल ने बताया कि चंद कदम आगे रामलीला मैदान खाली पड़ा है। रामलीला मैदान में कोई खास चहलकदमी भी नहीं रहती। लोगों के घर भी मैदान चारदीवारी से बाहर हैं। ऐसे में दिहाड़ी मजदूरों का ठिकाना रामलीला मैदान बन जाए तो मजदूरों से लेकर किसी और भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
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