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Budaun News: - नेपाल में फंसे इस्लामनगर के 23 लोग दिल्ली एयरपोर्ट लाए गए
Sat, 13 Sep 2025 01:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:17 AM IST
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इस्लामनगर। नेपाल में फंसे क्षेत्र के 23 लोगोंं की शुक्रवार को वतन वापसी हो गई। सभी लोग फ्लाइट से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और इसके बाद रिश्तेदारों व अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो गए। सभी ने एक सुर में नेपाल सेना के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की। कहा कि अंतिम समय समक्ष कर पशुपतिनाथ को याद कर रहे थे। नेपाल से आए श्रद्धालु जब अपनों से मिले तो सभी के आंसू छलक आए। सभी ने कहा भगवान ने बचा लिया, अब मानो दूसरा जन्म मिला है।
भाजपा नेता मोनिका सक्सेना अपने पति अरुण, भाई नवनीश और भाभी सोनी के साथ एयरपोर्ट पर उतरकर नोएडा में अपनी बेटी तान्या के घर पहुंचीं और उनकी बेटी, दामाद अमित उनसे लिपटकर रोने लगे। सभी ने उन्हें शांत कराते रहे लेकिन उनको यह एक सपना जैसा लग रह था। उन्होंने बताया कि सब कुछ बहुत डरावना था। पशुपतिनाथ मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे। इस दौरान भीड़ चीख पुकार मचाती हुई होटल की तरफ बढ़ रही थी। यह सब कुछ पूरी जिंदगी के लिए यादगार रहेगा और वह प्रयास करेंगे कि किसी अन्य देश में ऐसी यात्रा करने ना जाएं जिससे अपने जीवन के ही लाले पड़ें। उन्होंने बताया कि उपद्रवी होटल में घुस गए और बिजली की एमसीबी गिरा कर बिजली को बंद कर दिया। पूरे होटल में अंधेरा छा गया और चीख पुकार मची थी। जेल से भागे कैदी लोगों के साथ मारपीट करने लगे। कुछ लोगों के हाथ भी काट दिए, सब कुछ बहुत भयभीत करने वाला था। उन्होंने बताया कि बीती शुक्रवार की रात उनके सामने वाले होटल हेरिटेज में उपद्रवियों ने फिर से आग लगा दी। गाजियाबाद के रहने वाले पति-पत्नी होटल में रुके हुए थे। पहले पति ने ऊपर से ही छलांग लगा दी वह गिरकर घायल हो गए।
होटल मालिक ने बंधाई हिम्मत, भारत के प्रति लोगों की सोच नहीं अच्छी
भाभी सोनी ने बताया कि वहां की सेना व वहां के लोगों की सोच भारत के प्रति अच्छी नहीं है। उनके होटल मालिक डीपी शर्मा ब्राह्मण और भले व्यक्ति थे। उन्होंने आखिर तक हिम्मत बंधाई और कहते रहे आप लोग परेशान न हों यहां कोई समस्या नहीं होगी। जब होटल का स्टाफ भाग गया था तो डीपी शर्मा ने अपनी पत्नी व भाभी को बुलाकर महिलाओं के साथ मिलकर श्रद्धालुओं का खाना और नाश्ता तैयार किया। सभी ने मिलजुल कर खाना बनाकर खाया। शुक्रवार की रात और शनिवार की सुबह के नाश्ते का भी कोई बिल उन लोगों से नहीं लिया गया।
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एक-दूसरे से लिपट कर रोए, महामृत्युंजय मंत्र का किया जाप
पंप स्वामी वीरेंद्र बॉबी की पत्नी कविता गुप्ता ने बताया की होटल में घुसते ही सभी के आंसू नहीं रुक रहे थे। सब एक दूसरे से लिपट-लिपटकर रो रहे थे लग रहा था कि अब आखिरी समय है। पता नहीं क्या होगा। भगवान पशुपतिनाथ को याद कर महामृत्युंजय जाप करने लगे। भगवान पशुपतिनाथ को याद करते रहे और अपने ईस्ट देवों से प्रार्थना कर गुहार लगाई की कैसे भी उनके प्राण बचाएं जाएं। भगवान की प्रार्थना से ही उनके प्राण बचे हैं।
समय याद करते हैं तो कांप रही है रूह
लेखपाल सतीश शर्मा की पत्नी ममता शर्मा ने बताया कि यह जीवन के लिए बहुत ही यादगार है। जब भी वह समय याद करते हैं तो रूह कांप जाती है, ऐसा पहले कभी देखा नहीं था और न ही ऐसा सुना। सब कुछ आंखों के सामने हो रहा था। होटल के कमरे से नीचे जब देख रहे थे तो लग रहा था कि अब आखिरी समय है। पता नहीं क्या होगा। चारों तरफ चीख पुकार थी। आंदोलनकारी किसी को भी अपना नहीं समझ रहे थे लूटपाट और आगजनी पर आमादा थे। जब तक सेना नहीं आई तब तक भारी उपद्रव होता रहा। भगवान की कृपा से ही उनके होटल पर हमला नहीं हुआ। कुछ छोटा-मोटा तो फेंका गया मगर कुछ बड़ी समस्या नहीं हुई।
भारतीय दूतावास ने उपलब्ध कराई बस
कीटनाशक व्यापारी संजय शंखधार की पत्नी शीतल ने बताया कि वहां के लोग और सेना भी भारतीय लोगों से अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे। वहां के लोग भारतीय लोगों से चिढ़ते और गलत व्यवहार भी करते हैं। मंदिर के पास ही कुछ लोग कह रहे थे कि आप लोग भारतीय हो यहां मत आया करो क्यों आते हो व सेना कर्मी भी अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे। भारतीय दूतावास ने ही उन लोगों को एक स्कूल की बस की व्यवस्था कराई थी। इससे उन्हें होटल से लेकर एयरपोर्ट तक छोड़ा। बताया कि सुबह छह बजे से लेकर नौ बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई थी। उसी समय लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचना था। भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्ध कराई गई। बस के द्वारा उन्हें होटल से एयरपोर्ट पर छोड़ा गया जब एयरपोर्ट पहुंच गए तो लगा कि अब अपने वतन वापस पहुंच जाएंगे और फिर कभी यहां नहीं आएंगे।
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भाजपा नेता मोनिका सक्सेना अपने पति अरुण, भाई नवनीश और भाभी सोनी के साथ एयरपोर्ट पर उतरकर नोएडा में अपनी बेटी तान्या के घर पहुंचीं और उनकी बेटी, दामाद अमित उनसे लिपटकर रोने लगे। सभी ने उन्हें शांत कराते रहे लेकिन उनको यह एक सपना जैसा लग रह था। उन्होंने बताया कि सब कुछ बहुत डरावना था। पशुपतिनाथ मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे। इस दौरान भीड़ चीख पुकार मचाती हुई होटल की तरफ बढ़ रही थी। यह सब कुछ पूरी जिंदगी के लिए यादगार रहेगा और वह प्रयास करेंगे कि किसी अन्य देश में ऐसी यात्रा करने ना जाएं जिससे अपने जीवन के ही लाले पड़ें। उन्होंने बताया कि उपद्रवी होटल में घुस गए और बिजली की एमसीबी गिरा कर बिजली को बंद कर दिया। पूरे होटल में अंधेरा छा गया और चीख पुकार मची थी। जेल से भागे कैदी लोगों के साथ मारपीट करने लगे। कुछ लोगों के हाथ भी काट दिए, सब कुछ बहुत भयभीत करने वाला था। उन्होंने बताया कि बीती शुक्रवार की रात उनके सामने वाले होटल हेरिटेज में उपद्रवियों ने फिर से आग लगा दी। गाजियाबाद के रहने वाले पति-पत्नी होटल में रुके हुए थे। पहले पति ने ऊपर से ही छलांग लगा दी वह गिरकर घायल हो गए।
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होटल मालिक ने बंधाई हिम्मत, भारत के प्रति लोगों की सोच नहीं अच्छी
भाभी सोनी ने बताया कि वहां की सेना व वहां के लोगों की सोच भारत के प्रति अच्छी नहीं है। उनके होटल मालिक डीपी शर्मा ब्राह्मण और भले व्यक्ति थे। उन्होंने आखिर तक हिम्मत बंधाई और कहते रहे आप लोग परेशान न हों यहां कोई समस्या नहीं होगी। जब होटल का स्टाफ भाग गया था तो डीपी शर्मा ने अपनी पत्नी व भाभी को बुलाकर महिलाओं के साथ मिलकर श्रद्धालुओं का खाना और नाश्ता तैयार किया। सभी ने मिलजुल कर खाना बनाकर खाया। शुक्रवार की रात और शनिवार की सुबह के नाश्ते का भी कोई बिल उन लोगों से नहीं लिया गया।
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एक-दूसरे से लिपट कर रोए, महामृत्युंजय मंत्र का किया जाप
पंप स्वामी वीरेंद्र बॉबी की पत्नी कविता गुप्ता ने बताया की होटल में घुसते ही सभी के आंसू नहीं रुक रहे थे। सब एक दूसरे से लिपट-लिपटकर रो रहे थे लग रहा था कि अब आखिरी समय है। पता नहीं क्या होगा। भगवान पशुपतिनाथ को याद कर महामृत्युंजय जाप करने लगे। भगवान पशुपतिनाथ को याद करते रहे और अपने ईस्ट देवों से प्रार्थना कर गुहार लगाई की कैसे भी उनके प्राण बचाएं जाएं। भगवान की प्रार्थना से ही उनके प्राण बचे हैं।
समय याद करते हैं तो कांप रही है रूह
लेखपाल सतीश शर्मा की पत्नी ममता शर्मा ने बताया कि यह जीवन के लिए बहुत ही यादगार है। जब भी वह समय याद करते हैं तो रूह कांप जाती है, ऐसा पहले कभी देखा नहीं था और न ही ऐसा सुना। सब कुछ आंखों के सामने हो रहा था। होटल के कमरे से नीचे जब देख रहे थे तो लग रहा था कि अब आखिरी समय है। पता नहीं क्या होगा। चारों तरफ चीख पुकार थी। आंदोलनकारी किसी को भी अपना नहीं समझ रहे थे लूटपाट और आगजनी पर आमादा थे। जब तक सेना नहीं आई तब तक भारी उपद्रव होता रहा। भगवान की कृपा से ही उनके होटल पर हमला नहीं हुआ। कुछ छोटा-मोटा तो फेंका गया मगर कुछ बड़ी समस्या नहीं हुई।
भारतीय दूतावास ने उपलब्ध कराई बस
कीटनाशक व्यापारी संजय शंखधार की पत्नी शीतल ने बताया कि वहां के लोग और सेना भी भारतीय लोगों से अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे। वहां के लोग भारतीय लोगों से चिढ़ते और गलत व्यवहार भी करते हैं। मंदिर के पास ही कुछ लोग कह रहे थे कि आप लोग भारतीय हो यहां मत आया करो क्यों आते हो व सेना कर्मी भी अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे। भारतीय दूतावास ने ही उन लोगों को एक स्कूल की बस की व्यवस्था कराई थी। इससे उन्हें होटल से लेकर एयरपोर्ट तक छोड़ा। बताया कि सुबह छह बजे से लेकर नौ बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई थी। उसी समय लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचना था। भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्ध कराई गई। बस के द्वारा उन्हें होटल से एयरपोर्ट पर छोड़ा गया जब एयरपोर्ट पहुंच गए तो लगा कि अब अपने वतन वापस पहुंच जाएंगे और फिर कभी यहां नहीं आएंगे।