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औद्योगिक क्षेत्र 15 साल से बदहाल, कई फर्म समेट रहीं काम
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बदायूं के बदहाल औद्योगिक आस्थान। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। एक साल के भीतर जिले में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में मिलने वाला राजस्व दो करोड़ रुपये तक घट गया है। सुविधाएं, ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था और प्रोत्साहन न मिलने से सालारपुर स्थित औद्योगिक आस्थान पहले ही बदहाल है। अब अन्य बड़े व्यापारी और उद्योगपति भी जिले से बाहर अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं। इस कारण जिले में रोजगार के अवसर भी घट रहे हैं। इसका सीधा असर आर्थिक विकास पर पड़ रहा है।
अगस्त 2022 में सरकार को जहां 28 फीसदी अधिक जीएसटी मिला वहीं बदायूं में जीएसटी संग्रह घट गया। जुलाई 2022 में बदायूं में जहां सात करोड़ से ज्यादा जीएसटी संग्रह हुआ था वहीं अगस्त में 6.25 करोड़ ही जीएसटी संग्रह हुआ। अगस्त 2021 के मुकाबले तो अगस्त 2022 में जीएसटी संग्रह में दो करोड़ से ज्यादा कमी आई है। वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी कई फर्मों के बदायूं के स्थान पर दूसरे जिलों में शिफ्ट हो जाने के कारण जीएसटी संग्रह घटने की बात कहते हैं। उनका यह तर्क काफी हद तक ठीक भी है।
दरअसल, बदायूं में उद्योग धंधों के लिए उपयुक्त माहौल और संसाधनों की कमी है। प्रोत्साहन भी नहीं मिलता। उद्योग और व्यापार बंधु की बैठकें औपचारिक होकर रह गईं हैं। मेंथा ऑयल का जिले में बड़ा कारोबार है, लेकिन इससे जुड़े व्यापारियों ने भी बदायूं के स्थान पर दूसरे जिलों में फर्म खोल ली हैं।
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दरअसल, कई दशक पहले स्थापित किए गए सालारपुर स्थित औद्योगिक आस्थान की दुर्दशा का दौर करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। उद्यमियों ने यहां 42 उद्योग स्थापित किए। कुछ ही दिन में बड़े उद्योग बंद हो गए। अब यहां करीब 20 छोटी इकाइयां ही चल रही हैं। उद्योग धंधे बंद होने का प्रमुख कारण कच्चा माल, ट्रांसपोर्ट, बड़े शहरों के लिए सीधी रेल सेवा न होना है। व्यापारी और उद्यमी वर्ग इस कारण बदायूं के अलावा चंदौसी, बरेली, मुरादाबाद, हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ जैसे बड़े शहरों का रुख कर रहा है।
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कच्चा माल, ट्रांसपोर्ट सबसे बड़ी समस्या
जिले का औद्योगिक विकास न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट की समस्या है। बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों का कहना है कि बड़े शहरों से बदायूं के लिए सीधी ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं है। लखनऊ और दिल्ली के लिए रेल सेवा भी नहीं है। कच्चे माल के रूप में यहां कृषि उत्पादन संबंधी कारोबार जरूर फल-फूल रहे था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह कारोबार भी प्रभावित है। खासकर मेंथा कारोबार पर इसका असर हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद से जिले में मेंथा उत्पादन कम हो गया है। इसका सीखा असर अर्थ व्यवस्था के साथ जीएसटी कलेक्शन पर पड़ रहा है।
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बड़ी के स्थान पर छोटी फर्मों से काम कर रहे व्यापारी
जीएसटी लागू होने के बाद पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ रही है। दरअसल, अब व्यापारी कम टर्न-ओवर की फर्म बनाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में उनको जीएसटी की पेंचीदगियों का सामना नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि जिले में पंजीकृत व्यापारी बढ़ रहे हैं। उद्योगपति विपिन अग्रवाल का कहना है कि हमारे यहां टैक्स बहुत ज्यादा है। जब टैक्स ज्यादा होते हैं तो टैक्स चोरी के तरीके भी निकाल लिए जाते हैं। भले ही देश में जीएसटी संग्रह में 28 प्रतिशत का इजाफा हुआ हो लेकर अगर राज्यवार आंकड़ों पर गौर किया जाए तो कुछ चुनिंदा राज्य ही हैं जहां जीएसटी संग्रह बढ़ा है।
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उद्योगपतियों की बात
जिले में मेंथा का बड़ा कारोबार है, लेकिन अब मेंथा उत्पादन तेजी से घट रहा है। दरअसल, बाजार में अब सिंथेटिक मेंथा की ज्यादा मांग है। चाइना इसका उत्पादन कर रहा है। यह नेचुरल मेंथा के मुकाबले सस्ता होता है। महंगाई बढ़ने और मेंथा ऑयल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटने के कारण भी बदायूं का औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है। सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि देशी घी के मुकाबले अब डालडा की खपत ज्यादा हो रही है। बदायूं का बाजार कृषि आधारित है। किसान के खर्च करने की क्षमता कम होगी तो उसका असर बाजार, टैक्स, उद्योग, व्यापार सभी जगह दिखेगा।
- यादवेंद्र सिंह, उद्योगपति
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बाजार में प्रतिस्पर्धा ज्यादा होने के साथ सरकार के टैक्स भी बढ़ते जा रहे हैं। कहा जा सकता है कि नंबर एक और नंबर दो का काम करने वालों के बीच मुकाबला है। नंबर एक में काम करने वाले को ज्यादा टैक्स देना होता है और नंबर दो में काम करने वाला कम टैक्स भरता है। ऐसे में कुछ उद्योगपति और व्यापारी नंबर दो से भी काम कर रहे हैं। बदायूं में औद्योगिक विकास के लिए संसाधन नहीं हैं। बड़े उद्योगों के नाम पर दो घी फैक्ट्रियां पहले ही बंद हो चुकी हैं। ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था अच्छी न होने के कारण उद्योगपति और व्यापारी अब ऐसे स्थानों का रुख कर रहे हैं जहां उनको संसाधन मिल सकें।
-विपिन अग्रवाल, उद्योगपति
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जिले में जुलाई 2022 और अगस्त 2021 के मुकाबले इस बार अगस्त 2022 में जीएसटी का कम संग्रह हुआ है। पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन यह बात भी सही है कि बड़े व्यापारी अब बदायूं के स्थान पर दूसरे जिलों से कारोबार को ज्यादा संचालित कर रहे हैं। सरकार और विभाग की ओर से व्यापारियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। जीएसटी संग्रह कम-ज्यादा होता रहता है। इसमें कोई विशेष बात नहीं है।
-एएल सिंह, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर
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अगस्त 2022 में सरकार को जहां 28 फीसदी अधिक जीएसटी मिला वहीं बदायूं में जीएसटी संग्रह घट गया। जुलाई 2022 में बदायूं में जहां सात करोड़ से ज्यादा जीएसटी संग्रह हुआ था वहीं अगस्त में 6.25 करोड़ ही जीएसटी संग्रह हुआ। अगस्त 2021 के मुकाबले तो अगस्त 2022 में जीएसटी संग्रह में दो करोड़ से ज्यादा कमी आई है। वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी कई फर्मों के बदायूं के स्थान पर दूसरे जिलों में शिफ्ट हो जाने के कारण जीएसटी संग्रह घटने की बात कहते हैं। उनका यह तर्क काफी हद तक ठीक भी है।
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दरअसल, बदायूं में उद्योग धंधों के लिए उपयुक्त माहौल और संसाधनों की कमी है। प्रोत्साहन भी नहीं मिलता। उद्योग और व्यापार बंधु की बैठकें औपचारिक होकर रह गईं हैं। मेंथा ऑयल का जिले में बड़ा कारोबार है, लेकिन इससे जुड़े व्यापारियों ने भी बदायूं के स्थान पर दूसरे जिलों में फर्म खोल ली हैं।
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दरअसल, कई दशक पहले स्थापित किए गए सालारपुर स्थित औद्योगिक आस्थान की दुर्दशा का दौर करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। उद्यमियों ने यहां 42 उद्योग स्थापित किए। कुछ ही दिन में बड़े उद्योग बंद हो गए। अब यहां करीब 20 छोटी इकाइयां ही चल रही हैं। उद्योग धंधे बंद होने का प्रमुख कारण कच्चा माल, ट्रांसपोर्ट, बड़े शहरों के लिए सीधी रेल सेवा न होना है। व्यापारी और उद्यमी वर्ग इस कारण बदायूं के अलावा चंदौसी, बरेली, मुरादाबाद, हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ जैसे बड़े शहरों का रुख कर रहा है।
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कच्चा माल, ट्रांसपोर्ट सबसे बड़ी समस्या
जिले का औद्योगिक विकास न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट की समस्या है। बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों का कहना है कि बड़े शहरों से बदायूं के लिए सीधी ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं है। लखनऊ और दिल्ली के लिए रेल सेवा भी नहीं है। कच्चे माल के रूप में यहां कृषि उत्पादन संबंधी कारोबार जरूर फल-फूल रहे था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह कारोबार भी प्रभावित है। खासकर मेंथा कारोबार पर इसका असर हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद से जिले में मेंथा उत्पादन कम हो गया है। इसका सीखा असर अर्थ व्यवस्था के साथ जीएसटी कलेक्शन पर पड़ रहा है।
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बड़ी के स्थान पर छोटी फर्मों से काम कर रहे व्यापारी
जीएसटी लागू होने के बाद पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ रही है। दरअसल, अब व्यापारी कम टर्न-ओवर की फर्म बनाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में उनको जीएसटी की पेंचीदगियों का सामना नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि जिले में पंजीकृत व्यापारी बढ़ रहे हैं। उद्योगपति विपिन अग्रवाल का कहना है कि हमारे यहां टैक्स बहुत ज्यादा है। जब टैक्स ज्यादा होते हैं तो टैक्स चोरी के तरीके भी निकाल लिए जाते हैं। भले ही देश में जीएसटी संग्रह में 28 प्रतिशत का इजाफा हुआ हो लेकर अगर राज्यवार आंकड़ों पर गौर किया जाए तो कुछ चुनिंदा राज्य ही हैं जहां जीएसटी संग्रह बढ़ा है।
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उद्योगपतियों की बात
जिले में मेंथा का बड़ा कारोबार है, लेकिन अब मेंथा उत्पादन तेजी से घट रहा है। दरअसल, बाजार में अब सिंथेटिक मेंथा की ज्यादा मांग है। चाइना इसका उत्पादन कर रहा है। यह नेचुरल मेंथा के मुकाबले सस्ता होता है। महंगाई बढ़ने और मेंथा ऑयल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटने के कारण भी बदायूं का औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है। सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि देशी घी के मुकाबले अब डालडा की खपत ज्यादा हो रही है। बदायूं का बाजार कृषि आधारित है। किसान के खर्च करने की क्षमता कम होगी तो उसका असर बाजार, टैक्स, उद्योग, व्यापार सभी जगह दिखेगा।
- यादवेंद्र सिंह, उद्योगपति
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बाजार में प्रतिस्पर्धा ज्यादा होने के साथ सरकार के टैक्स भी बढ़ते जा रहे हैं। कहा जा सकता है कि नंबर एक और नंबर दो का काम करने वालों के बीच मुकाबला है। नंबर एक में काम करने वाले को ज्यादा टैक्स देना होता है और नंबर दो में काम करने वाला कम टैक्स भरता है। ऐसे में कुछ उद्योगपति और व्यापारी नंबर दो से भी काम कर रहे हैं। बदायूं में औद्योगिक विकास के लिए संसाधन नहीं हैं। बड़े उद्योगों के नाम पर दो घी फैक्ट्रियां पहले ही बंद हो चुकी हैं। ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था अच्छी न होने के कारण उद्योगपति और व्यापारी अब ऐसे स्थानों का रुख कर रहे हैं जहां उनको संसाधन मिल सकें।
-विपिन अग्रवाल, उद्योगपति
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जिले में जुलाई 2022 और अगस्त 2021 के मुकाबले इस बार अगस्त 2022 में जीएसटी का कम संग्रह हुआ है। पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन यह बात भी सही है कि बड़े व्यापारी अब बदायूं के स्थान पर दूसरे जिलों से कारोबार को ज्यादा संचालित कर रहे हैं। सरकार और विभाग की ओर से व्यापारियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। जीएसटी संग्रह कम-ज्यादा होता रहता है। इसमें कोई विशेष बात नहीं है।
-एएल सिंह, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर