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जगत, म्याऊं और सालारपुर के कई गांवों में फैले संक्रामक रोग
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म्याऊं ब्लॉक के गांव बिलहरी में जलभराव, गंदगी और कीचड़। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जगत, म्याऊं और सालापुर ब्लॉक के कई गांवों में इन दिनों संक्रामक रोगों का प्रकोप है। जल निगम, स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग की उदासीनता से लोगों की जान पर बन आई है।
पिछले वर्ष सालारपुर के शेरगंज गांव में कई लोगों की संक्रामक रोगों से जान गई थी। जगत ब्लॉक के उपरैला में तो पिछले वर्ष शासन स्तर की टीम ने संक्रामक रोगों से मौतों का कारण जानने के लिए दौरा तक किया था। इस बार जगत के रायपुर, ललबुझिया गांव में भी बीमारियों का प्रकोप है।
म्याऊं के बिलहरी में बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं। बच्चों की संख्या अधिक है। इन गांवों में बेशुमार गंदगी, जलभराव और दूषित पानी के कारण काफी दिक्कत आ रही है।
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हैंडपंपों के रिबोर में खेल, 2017 से पीने के पानी की जांच भी नहीं कराई जा रही
संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में शामिल बदायूं में अब जलजनित बीमारियां भी जान लेने लगी हैं। उझानी, समरेर, सालारपुर, जगत, वजीरगंज, दहगवां, म्याऊं, उसावां समेत कई ऐसे ब्लॉक हैं जहां इंडिया मार्का हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। दूषित पानी हेपेटाइटिस, टायफाइड, डायरिया, काला पीलिया फैला रहा है। कई लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार नहीं चेत रहे। पीने के पानी की जांच भी नहीं कराई जा रही।
संक्रामक रोगों के इस मौसम भी जिले में जलजनित बीमारियों के कारण मौतों का सिलसिला शुरू हो गया है। हाल ही में जगत ब्लॉक के गांव रायपुर में टायफाइड से महिला की मौत हो गई। इससे पहले उझानी ब्लॉक के नरऊ और वजीरगंज ब्लॉक के रेहड़िया में कई लोगों की पीलिया के कारण जान जा चुकी है। गौर करने की बात यह है कि 2017 के बाद जिले में पीने के पानी की जांच ही नहीं हुई है। इस दौरान पंचायती राज विभाग नए हैंडपंप लगवाने और पुराने को रिबोर कराने पर करोड़ों रुपये का बजट खपा चुका है।
पंचायती राज विभाग ने न तो रिबोरिंग और न नए हैंडपंपों के पानी की जांच कराई। इनमें ज्यादातर हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। दूसरी लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की है। 2017 के बाद अब तक स्वास्थ्य विभाग ने एक बार भी जल निगम को पानी की जांच कराने से संबंध में नहीं लिखा।
दरअसल, 2017 से नए हैंडपंप लगवाने और पुरानों को रिबोर कराने की पूरी जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को दे दी गई। यहां से जल निगम की जिम्मेदारी खत्म हो गई। जिले के बाद ब्लॉक और ब्लॉक के बाद ग्राम पंचायतों तक नए हैंडपंप लगाने, पुरानों को रिबोर कराने में खेल होने लगा। सूत्र बताते हैं कि इंडिया मार्क हैंडपंप मानक के अनुरूप नहीं लगाए जा रहे। 60-70 फीट का बोरिंग किया जा रहा है। ऐसे में हैंडपंप दूषित जल दे रहे हैं।
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मलेरिया काबू में मगर जलजनित बीमारियां ले रहीं जान
मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं 2019 में प्रदेश में दूसरे नंबर पर था। 2019 में यहां मलेरिया के 20339 और डेंगू के 42 रोगी मिले थे। बड़ी संख्या में लोगों की मच्छर और जलजनित बीमारियों से मौत भी हुई। इससे पहले जगत ब्लॉक के गांव उपरैला में 50 से ज्यादा लोगों की संक्रामक बीमारियों से मौत हुई थी। 2020 में जिले में मलेरिया के 11987 रोगी मिले। शासन स्तर से मॉनीटरिंग के चलते 2021 से मलेरिया पर काबू होने लगा। 2021 में मलेरिया के 1665 रोगी मिले, लेकिन इस वर्ष डेंगू के मामले में रिकॉर्ड टूट गया। डेंगू के 471 रोगी मिले। इस वर्ष मच्छरजनित बीमारियों से अब तक कोई जान नहीं गई है। मलेरिया के इस वर्ष अब तक 197 रोगी ही मिले हैं, लेकिन हेपेटाइटिस, टायफाइड, डायरिया, काला पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों का प्रकोप लगातर बढ़ता जा रहा है।
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जहां से भी बीमारियों के प्रकोप की सूचना मिल रही है, वहां टीम को भेजकर हेल्थ कैंप लगाए जा रहे हैं। लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई जा रही है। गांवों में साफ सफाई पंचायती राज विभाग का काम है। गंदगी और दूषित जल के कारण ही इस मौसम में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है।
-डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी सीएमओ
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जिले के कई हिस्से ऐसे हैं जहां इंडिया मार्क हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। दरअसल, 2017 से हैंडपंप लगाने और उनको रिबोर कराने का काम पूरी तरह से पंचायती राज विभाग को दे दिया गया है। पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी है कि वह हैंडपंपों के पानी की जांच कराए। जल निगम की प्रयोगशाला को 2017 से ही बंद है।
- मनीष गंगवार, एक्सईएन जल निगम
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पिछले वर्ष सालारपुर के शेरगंज गांव में कई लोगों की संक्रामक रोगों से जान गई थी। जगत ब्लॉक के उपरैला में तो पिछले वर्ष शासन स्तर की टीम ने संक्रामक रोगों से मौतों का कारण जानने के लिए दौरा तक किया था। इस बार जगत के रायपुर, ललबुझिया गांव में भी बीमारियों का प्रकोप है।
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म्याऊं के बिलहरी में बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं। बच्चों की संख्या अधिक है। इन गांवों में बेशुमार गंदगी, जलभराव और दूषित पानी के कारण काफी दिक्कत आ रही है।
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हैंडपंपों के रिबोर में खेल, 2017 से पीने के पानी की जांच भी नहीं कराई जा रही
संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में शामिल बदायूं में अब जलजनित बीमारियां भी जान लेने लगी हैं। उझानी, समरेर, सालारपुर, जगत, वजीरगंज, दहगवां, म्याऊं, उसावां समेत कई ऐसे ब्लॉक हैं जहां इंडिया मार्का हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। दूषित पानी हेपेटाइटिस, टायफाइड, डायरिया, काला पीलिया फैला रहा है। कई लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार नहीं चेत रहे। पीने के पानी की जांच भी नहीं कराई जा रही।
संक्रामक रोगों के इस मौसम भी जिले में जलजनित बीमारियों के कारण मौतों का सिलसिला शुरू हो गया है। हाल ही में जगत ब्लॉक के गांव रायपुर में टायफाइड से महिला की मौत हो गई। इससे पहले उझानी ब्लॉक के नरऊ और वजीरगंज ब्लॉक के रेहड़िया में कई लोगों की पीलिया के कारण जान जा चुकी है। गौर करने की बात यह है कि 2017 के बाद जिले में पीने के पानी की जांच ही नहीं हुई है। इस दौरान पंचायती राज विभाग नए हैंडपंप लगवाने और पुराने को रिबोर कराने पर करोड़ों रुपये का बजट खपा चुका है।
पंचायती राज विभाग ने न तो रिबोरिंग और न नए हैंडपंपों के पानी की जांच कराई। इनमें ज्यादातर हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। दूसरी लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की है। 2017 के बाद अब तक स्वास्थ्य विभाग ने एक बार भी जल निगम को पानी की जांच कराने से संबंध में नहीं लिखा।
दरअसल, 2017 से नए हैंडपंप लगवाने और पुरानों को रिबोर कराने की पूरी जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को दे दी गई। यहां से जल निगम की जिम्मेदारी खत्म हो गई। जिले के बाद ब्लॉक और ब्लॉक के बाद ग्राम पंचायतों तक नए हैंडपंप लगाने, पुरानों को रिबोर कराने में खेल होने लगा। सूत्र बताते हैं कि इंडिया मार्क हैंडपंप मानक के अनुरूप नहीं लगाए जा रहे। 60-70 फीट का बोरिंग किया जा रहा है। ऐसे में हैंडपंप दूषित जल दे रहे हैं।
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मलेरिया काबू में मगर जलजनित बीमारियां ले रहीं जान
मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं 2019 में प्रदेश में दूसरे नंबर पर था। 2019 में यहां मलेरिया के 20339 और डेंगू के 42 रोगी मिले थे। बड़ी संख्या में लोगों की मच्छर और जलजनित बीमारियों से मौत भी हुई। इससे पहले जगत ब्लॉक के गांव उपरैला में 50 से ज्यादा लोगों की संक्रामक बीमारियों से मौत हुई थी। 2020 में जिले में मलेरिया के 11987 रोगी मिले। शासन स्तर से मॉनीटरिंग के चलते 2021 से मलेरिया पर काबू होने लगा। 2021 में मलेरिया के 1665 रोगी मिले, लेकिन इस वर्ष डेंगू के मामले में रिकॉर्ड टूट गया। डेंगू के 471 रोगी मिले। इस वर्ष मच्छरजनित बीमारियों से अब तक कोई जान नहीं गई है। मलेरिया के इस वर्ष अब तक 197 रोगी ही मिले हैं, लेकिन हेपेटाइटिस, टायफाइड, डायरिया, काला पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों का प्रकोप लगातर बढ़ता जा रहा है।
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जहां से भी बीमारियों के प्रकोप की सूचना मिल रही है, वहां टीम को भेजकर हेल्थ कैंप लगाए जा रहे हैं। लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई जा रही है। गांवों में साफ सफाई पंचायती राज विभाग का काम है। गंदगी और दूषित जल के कारण ही इस मौसम में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है।
-डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी सीएमओ
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जिले के कई हिस्से ऐसे हैं जहां इंडिया मार्क हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। दरअसल, 2017 से हैंडपंप लगाने और उनको रिबोर कराने का काम पूरी तरह से पंचायती राज विभाग को दे दिया गया है। पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी है कि वह हैंडपंपों के पानी की जांच कराए। जल निगम की प्रयोगशाला को 2017 से ही बंद है।
- मनीष गंगवार, एक्सईएन जल निगम