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शहर की हवा ही नहीं पानी भी हुआ खतरनाक

Tue, 19 Nov 2019 12:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 Nov 2019 12:31 AM IST
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Civic Amenities
फोटो 22
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अपने शहर की हवा ही नहीं पानी भी खतरनाक
पानी में टीडीएस बढ़ने से पेट संबंधी बढ़ रहीं बीमारियां, कई मोहल्लों के पानी में बढ़ रहा है टीडीएस, पानी हो रहा खतरनाक
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। वायु प्रदूषण से जूझ रहे शहरवासियों के लिए अब पानी ने भी मुसीबत खड़ी कर दी है। पानी के बढ़ते प्रदूषण की रिपोर्ट तमाम सर्वे में सामने आ रही है। शहर के भी तमाम इलाके ऐसे हैं जहां पर हैंडपंपों में 1000 एमजी प्रति लीटर टीडीएस (टोटल डिजॉल्ब सॉलिड्स) का पानी निकल रहा है। ऐसे में इन इलाकों का पानी पीने योग्य तो कतई नहीं कहा जा सकता। यही वजह है कि ऐसा पानी के पीने से लोगों को पेट संबंधित बीमारियां ज्यादा हो रही हैं।
दिल्ली, एनसीआर समेत प्रदेश में वायु प्रदूषण की वजह से लोग काफी परेशान हैं। वायु प्रदूषण की वजह से लोगों को सांस लेने तक में दिक्कत आ रही है। लोग अभी तक उससे नहीं उबर पाए हैं, ऐसे में पानी में लगातार बढ़ रहे टीडीएस की खबर ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। खास तौर पर घरेलू हैंडपंपों में पानी में टीडीएस बढ़ने की आशंका ज्यादा रहती है। इसका कारण पाइप का गहराई में नहीं होना है। इस पानी के लगातार प्रयोग से लोगों को पेट संबंधित बीमारियों तेजी से जकड़ रही हैं।
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क्या है टीडीएस
पानी में मिट्टी में उपस्थित खनिज घुले रहते हैं। पानी में घुले खनिजों को आमतौर पर टीडीएस कहा जाता है। पानी में टीडीएस की मात्रा को मिलीग्राम/लीटर (एमजी/लीटर) या पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) से मापा जा सकता है। खनिज मूलत: कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम के विभिन्न अव्यव होते हैं। पानी में खारापन कैल्शियम और मैग्नीशियम के विभिन्न अव्यव मसलन कैल्शियम या मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्शियम और मैग्नीशियम सल्फेट के कारण होता है। कम मात्रा के बावजूद कुछ घुले हुए ठोस पदार्थ खतरनाक होते हैं। मसलन आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट। पानी में इन पदार्थों की स्वीकृत स्तर के कुछ तय मानक हैं।
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कितना हो पानी का टीडीएस
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 1000एमजी/लीटर से कम टीडीएस सघनता के स्तर का पानी आमतौर पर पीने के लिये उचित है। हालांकि विभिन्न परिस्थितियों में यह अलग हो सकता है। पानी टीडीएस के उच्च स्तरीय स्वाद के कारण पीने योग्य नहीं होता, हालांकि बेहद कम टीडीएस सघनता वाला पानी भी अपने फीके स्वाद की वजह से पीने लायक नहीं होता है।
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इनके बढ़ने से होते हैं ये रोग
सोडियम की मात्रा पानी में बढ़ने से ब्लड प्रेशर अधिक होने लगता है। इसके अलावा कैल्शियम से किडनी, स्टोन, मरकरी से शरीर दर्द, नाइट्रेट से पेट खराब आदि रोग हो सकते हैं।
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क्या हों उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि पानी को शुद्ध करने का सबसे अच्छा तरीका उसे उबालकर पीना है। पानी को पहले उच्च तापमान पर उबालें और उसके बाद उसे सामान्य तापमान पर लाकर उपयोग करें। आजकल लोग आरओ का प्रयोग बहुतायत में करते हैं, लेकिन कई आरओ पानी में महत्वपूर्ण खनिज तत्वों को खत्म ही कर देते हैं। इससे भी शरीर को नुकसान पहुंचता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव रोहतगी कहते हैं कि पानी हमेशा उबालकर पीना चाहिए। खासकर बच्चों को तो सादा पानी देना ही नहीं चाहिए। बच्चों को उबालकर पानी देने से उन्हें काफी बीमारियों से बचाया जा सकता है। बड़ों को भी पानी उबालकर प्रयोग करना चाहिए।
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जानकारों की राय
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मेरे अनुमान से जिले में लगभग 60 प्रतिशत तक लोगों के पथरी की दिक्कत हैं। उसकी वजह पानी में टीडीएस का बढ़ा होना है। क्योंकि लगातार उवर्रक और कीटनाशक दवाओं का लगातार प्रयोग किया जा रहा हैं, जो शरीर में जमा हो रहा हैं। इससे शरीर में रोग उत्पन्न होते हैं। यही वजह है कि डीटीटी दवा के छिड़काव तक पर रोक लगा दी गई थी।
-विजय कुमार गौतम, प्रवक्ता वनस्पति विज्ञान, एसके इंटर कॉलेज
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कारखानों से निकलने वाला गंदा पानी, नदियों में जाकर मिलता है, जिसके माध्यम से वह भूमि में जाता है, जो मिट्टी की बनावट को प्रभावित कर रहा है। इस वजह से लोगों में पथरी की शिकायत हो रही है।
-वीरेंद्र कुमार विश्वकर्मा, प्रवक्ता, वनस्पति विज्ञान, कुंवर रुकुम सिंह नगला वैदिक इंटर कॉलेज
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बोले लोग
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शहर के हैंडपंपों के हालात खराब हैं। कभी-कभी हैंडपंपों से सुबह के समय पीला सा पानी आता है। इसके बारे में पालिका प्रशासन को बताया भी था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
-कमलराज सिंह, गन्ना दफ्तर
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पिछले दिनों से पानी अचानक गंदा आने लगा। इसके बारे में लोगों को बताया तो उन्होंने बताया कि उनके यहां पर भी कुछ दिन तक ये समस्या थी। बाद में अपने आप ही पानी का रंग साफ हो गया। फिलहाल गनीमत हैं कि अभी पानी सही आ रहा है।
-मुनीश कुमार, सिविल लाइन
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नगर पालिका का पानी कभी साफ आता है, तो कभी गंदा आता है। इसके बारे में अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन समस्याओं के समाधान की छोड़िए, वहां पर अधिकारियों के पास समस्या सुनने तक की फुर्सत नहीं है।
-शिवम मौर्य, शिवपुरम
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नगर पालिका की पानी की पाइप लाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जो बार-बार टूट जाती है। आए दिन गंदा पानी आता है। पालिका की ओर से ओवरहेड टैंक में दवा समय से मिलायी जाए तो शायद ये समस्या न बनें।
-पवन गौतम, पाल नगर
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एक्सपर्ट की राय
शहर के कई मोहल्लों में जांच की गई है। पानी का टीडीएस बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण पानी में अपशिष्ट पदार्थों या तत्वों का मिलना है। अधिक गहराई वाले पानी में टीडीएम कम होता है।

-रामदास सिंह, वाटर एक्सपर्ट
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पालिका के पास नौ ओवरहेड टैंक और 25 ट्यूबवेल हैं। इनके माध्यम से पलिका द्वारा सुबह और शाम शहरवासियों के लिए लगभग 30 हजार किलोलीटर पानी की सप्लाई दी जाती है। पानी में क्लोरीन दवा भी समय-समय पर मिलाई जाती है।
-वंशीधर राजपूत, एई जलकल नगर पालिका
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