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तीसरी आंख पर बेबसी का पहरा
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Wed, 27 Sep 2017 06:08 PM IST
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अपराधियों की निगहबानी के लिए लगी ‘तीसरी आंख’ पिछले कई महीनों से खराब है। इससे बेखौफ हुए अपराधी शहर में चेन स्नेचिंग, पर्स लूट, बाइक चोरी और छेड़खानी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। महिलाएं घरों से बाहर निकलने से डरने लगी हैं। व्यापारियों के मन में भी असुरक्षा है।
शहर में बढ़ते अपराधों पर काबू पाने के लिए पुलिस प्रशासन ने 2013-14 में प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। ताकि इसकी मदद से घटना को अंजाम देकर फरार हो रहे अपराधियों को पकड़ा जा सके और उन पर कार्रवाई की जा सके। चौराहों पर लगे सीसीटीवी कुछ ही दिन तक पुलिस की तीसरी आंख बनकर सक्रिय रहे, लेकिन समय के साथ-साथ इनमें खराबी आने लगी। जो समय रहते ठीक नहीं हो पाई। इसकी वजह से ये खराब हो गए। लिहाजा अब पुलिस की तीसरी आंख कई जगहों पर बंद है, क्योंकि साल में एक बार मेंटिनेंस के लिए रुपये आते हैं बंद सीसीटीवी पुलिस विभाग के लिए सिरदर्द बन गए हैं, क्योंकि खराब कैमरों की वजह से पुलिस अपराधियों को पकड़ नहीं पा रही है। इसका फायदा उठाकर अपराधी खुलेआम घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस सिर्फ लकीर पीटती नजर आ रही है।
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शहर में बढ़ते अपराधों पर काबू पाने के लिए पुलिस प्रशासन ने 2013-14 में प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। ताकि इसकी मदद से घटना को अंजाम देकर फरार हो रहे अपराधियों को पकड़ा जा सके और उन पर कार्रवाई की जा सके। चौराहों पर लगे सीसीटीवी कुछ ही दिन तक पुलिस की तीसरी आंख बनकर सक्रिय रहे, लेकिन समय के साथ-साथ इनमें खराबी आने लगी। जो समय रहते ठीक नहीं हो पाई। इसकी वजह से ये खराब हो गए। लिहाजा अब पुलिस की तीसरी आंख कई जगहों पर बंद है, क्योंकि साल में एक बार मेंटिनेंस के लिए रुपये आते हैं बंद सीसीटीवी पुलिस विभाग के लिए सिरदर्द बन गए हैं, क्योंकि खराब कैमरों की वजह से पुलिस अपराधियों को पकड़ नहीं पा रही है। इसका फायदा उठाकर अपराधी खुलेआम घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस सिर्फ लकीर पीटती नजर आ रही है।
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