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एक करोड़ का बजट देकर लगा दी भुगतान पर रोक

Fri, 27 Mar 2015 06:45 PM IST
badaun
badaun Updated Fri, 27 Mar 2015 06:45 PM IST
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बाल विकास एवं पोषाहार विभाग में हॉटकुक्ड योजना खटाई में पड़ गई है। जहां पूर्व में निदेशालय से आए आदेशों से पहले हॉटकुक्ड में लगे एनजीओ ने हॉटकुक्ड देना बंद कर दिया, तो वहीं अब हॉटकुक्ड में एक करोड़ का बजट देने के बाद निदेशालय ने इस बजट में पेमेंट करने पर रोक लगा दी है। कहा है कि अग्रिम आदेश तक हॉटकुक्ड का भुगतान नहीं किया जाए। इस आदेश को लेकर विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई है।  

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बाल विकास विभाग में हॉटकुक्ड वितरण प्रणाली में बदलाव लाते हुए एनजीओ को नियुक्त किया था। एनजीओ ने सिटी और जिले के सभी 15 ब्लाक क्षेत्र में एनजीओ को इसमें लगा दिया था। एनजीओ ने यहां हॉटकुक्ड का वितरण भी किया, हालांकि उनके हॉटकुक्ड पर उंगलियां उठती रहीं। उच्चस्तर से जांच में भी हाटकुक्ड वितरण की जांच कराई गई। इसके बाद जब इस व्यवस्था में भुगतान पर रोक लगाने की चर्चा चली, तो एनजीओ ने हॉटकुक्ड वितरण व्यवस्था खुद ही बंद कर दी। इस प्रकार एनजीओ द्वारा वितरण व्यवस्था अक्तूबर से फरवरी तक ही चल पाई थी।
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हॉटकुक्ड के बजट में अभी मार्च में एक करोड़ का बजट आया है। बजट आने के साथ ही निदेशक आनंद कुमार का पत्र भी आ गया है। इसमें प्रदेशभर में भुगतान पर अभी रोक लगा दी गई है। कहा गया है कि अग्रिम आदेश तक इस मद में भुगतान नहीं किया जाए।
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मातृ समितियों के खाते में भेजा हॉटकुक्ड का धन
पिछले दिनों से हॉटकुक्ड बंद पड़ा है। एनजीओ ने पहले ही वितरण से हाथ खड़े कर दिए हैं। इन हालातों में विभाग ने मातृ समितियों को हॉटकुक्ड का धन भेजा। उनके खातों में धन तो चला गया है, लेकिन हॉटकुक्ड वितरण नहीं हो सका है। जिन बैंक शाखाओं में धन गया। मार्च क्लोजिंग का बहाना कर उन्होंने धन की निकासी भी नहीं की।

प्रति बच्चा छह रुपये खर्च आता हैं इस योजना में
बाल विकास में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पुष्ट रखने के लिए प्रति बच्चा छह रुपये खर्च आता है। इसमें मार्निंग स्नैक्स में ढाई रुपये और हॉटकुक्ड साढ़े चार रुपये है। मॉर्निंग स्नैक्स सप्ताह में दो बार दिया जाता है और बाकी दिनों में विभाग द्वारा पुष्टाहार दिया जाता है। विभाग के हॉटकुक्ड वितरण फेल हो जाने के बाद कुपोषित बच्चों को कैसे पोषण मिलेगा? इस पर सवालिया निशान लग गए हैं।


डायरेक्टर के जो निर्देश आए हैं, उनका पालन होना है। बजट तो मिल गया है। इसे सुरक्षित कर लिया गया है। अग्रिम आदेश तक भुगतान वितरण पर रोक रहेगी। - निर्मल शर्मा, डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग

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