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Budaun News: फसल की रखवाली करने गए किसान को सांड ने तालाब में फेंका, पानी में डूबने से मौत
Thu, 07 Dec 2023 08:13 PM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 07 Dec 2023 08:13 PM IST
सार
बदायूं जिले में छुट्टा पशु किसानों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं। दातागंज तहसील के गांव सलेमपुर में सांड के हमले से किसान की मौत हो गई।
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किसान का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बदायूं के दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव सलेमपुर में बुधवार रात 60 वर्षीय किसान शिवदयाल पर सांड ने हमला कर दिया। सांड ने उठाकर उन्हें तालाब में फेंक दिया, जिससे पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई। वह अपनी गेहूं की फसल की रखवाली करने गए थे। आसपास फसल की रखवाली कर रहे लोगों की सूचना पर परिवार वाले मौके पर पहुंचे और शिवदयाल के शव को तालाब से निकाला।
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किसान शिवदायल रोजाना रात को गेहूं की फसल की रखवाली के लिए खेत पर जाते थे। उनका खेत गांव से कुछ दूर तालाब किनारे है। बुधवार रात करीब नौ बजे वह खेत पर जा रहे थे। तालाब किनारे पहुंचने पर सांड़ ने उन पर हमला कर दिया। बताया जाता है कि सांड ने सींग पर उठाकर उन्हें तालाब में फेंक दिया।
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लोगों ने तालाब से बाहर निकाला
शिवदयाल की चीख सुनकर आसपास फसलों की रखवाली कर रहे किसान दौड़कर पहुंचे। उन्होंने सांड को भगाया और शिवदायल के परिवार वालों को सूचना दी। गांव के तमाम लोगों के साथ शिवदयाल के परिजन कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तालाब में घुसकर किसान को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। बृहस्पतिवार सुबह कोतवाली पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
शिवदयाल के चार बेटे और चार बेटियां हैं। सात बच्चों की शादी हो चुकी है। सबसे बड़े बेटे रतिराम ने शादी नहीं की हैं। उनके तीन बेटे दिनेश, प्रकाश और राधेश्याम दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं। खेतीबाड़ी का सारा कामकाज शिवदयाल ही देख रहे थे।
शिवदयाल की चीख सुनकर आसपास फसलों की रखवाली कर रहे किसान दौड़कर पहुंचे। उन्होंने सांड को भगाया और शिवदायल के परिवार वालों को सूचना दी। गांव के तमाम लोगों के साथ शिवदयाल के परिजन कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तालाब में घुसकर किसान को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। बृहस्पतिवार सुबह कोतवाली पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
शिवदयाल के चार बेटे और चार बेटियां हैं। सात बच्चों की शादी हो चुकी है। सबसे बड़े बेटे रतिराम ने शादी नहीं की हैं। उनके तीन बेटे दिनेश, प्रकाश और राधेश्याम दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं। खेतीबाड़ी का सारा कामकाज शिवदयाल ही देख रहे थे।