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सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड में बीट सिपाहियों को मिल सकती है क्लीनचिट

Mon, 18 Jan 2021 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jan 2021 12:28 AM IST
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Beat soldiers can get clean chit in mass rape and murder
बदायूं। सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के मामले में बीट के सिपाहियों को क्लीनचिट मिल सकती है। विभागीय सूत्रों की माने तो सिपाहियों ने भी इंस्पेक्टर और हलका इंचार्ज को सूचना दी थी लेकिन वे मामले को दबाने की कोशिश में लगे थे। उन्हें पता था कि गांव के कुछ लोग फैसला कराना चाह रहे हैं, इससे उन्होंने पुलिस को मौके पर नहीं भेजा। जब बात नहीं बनी तो तब महिला का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। सूत्रों का कहना है कि विभागीय जांच में भी प्रथम दृष्टया बीट सिपाहियों की मामले में कोई गलती नहीं पाई गई है।
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मामले में निलंबित इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह और हलका इंचार्ज अमरजीत सिंह की लापरवाही उजागर हो चुकी है। ये भी साफ हो चुका है कि महिला की मौत की सूचना उन तक पहुंची थी। परिवार वाले स्वयं थाने पहुंचे थे। उन्होंने खुद पुलिस को इसके बारे में बताया था। इसके बावजूद दोपहर तक मामले में ढील डाली गई। पुलिस को मौके पर नहीं भेजा गया। जब मामले की छानबीन शुरू हुई तब सबसे पहले इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह पर गाज गिरी। उनके बाद हलका इंचार्ज अमरजीत सिंह निलंबित किए गए। इस मामले में कयास लगाया जा रहे थे कि कहीं न कहीं बीट के सिपाही भी दोषी हैं। अक्सर बड़े मामलों में छोटी कड़ी ही निशाना बनती है और कार्रवाई होती है, लेकिन इस मामले में बीट के सिपाहियों का प्रथम दृष्टतया दोष नजर नहीं आ रहा है। पुलिस के सूत्रों की माने तो बीट के सिपाहियों को इसकी जानकारी भी थी और उन्होंने इंस्पेक्टर व हलका इंचार्ज को बताया भी था लेकिन उन्हें शांत करा दिया गया था।
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बताते हैं कि जिस समय गांव में लाश रखी थी, उसी दौरान कुछ लोग महिला के परिवार वालों और पुजारी के बीच फैसला करा रहे थे। उन्होंने पूरा प्रयास किया था कि इस मामले में आगे कोई कार्रवाई न हो लेकिन परिवार वाले नहीं माने, तब गांव में पुलिस को भेजा गया था।
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एफआईआर दर्ज नहीं करना चाहते थे इंस्पेक्टर
इस मामले में लापरवाही का नतीजा क्या रहा, वह सबके सामने आ चुका है। इंस्पेक्टर इसमें निलंबित हो चुके हैं। शुरुआती दौर की बात करें तो इंस्पेक्टर इस मामले की एफआईआर दर्ज करने के ही मूड में नहीं थे। वह मामले को टालना चाहते थे।
पांच जनवरी को जागी पुलिस, अब तक छानबीन
बदायूं। उघैती इलाके में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की वारदात तीन जनवरी की रात हुई थी। दूसरे दिन दोपहर तक पुलिस हीलाहवाली करती रही। शाम को महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। पुलिस की आंखें तब खुलीं, जब पांच जनवरी को महिला का पोस्टमार्टम कराया गया और उसकी रिपोर्ट सामने आई। उसके बाद पुलिस अधिकारियों ने तुरंत मुख्य आरोपी सत्यनारायण दास, वेदराम और जसपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
मामले में छह जनवरी को वेदराम और जसपाल गिरफ्तार हुए थे। सभी आरोपियों पर रासुका लगाने की बात कही गई थी, साथ ही एसएसपी संकल्प शर्मा ने इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया था। इसके अगले दिन सात जनवरी को दोनों आरोपियों को जेल भेजा गया। नए इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार धामा को चार्ज दिया गया। मुख्य आरोपी सत्यनारायण दास पर पचास हजार का इनाम रखा गया। देर रात उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया। आठ जनवरी को मुख्य आरोपी जेल भेजा गया था। उसी दिन हलका इंचार्ज अमरपाल सिंह निलंबित किए गए थे। फोरेंसिक टीम भी पहुंची थी और इसकी छानबीन शुरू कर दी गई थी।
दूसरे दिन नौ जनवरी को फोरेंसिक टीम कुएं में उतरी, अंदर घुसकर जांच की। कुछ संदिग्ध लोग हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। 10 जनवरी को चंदौसी के डॉक्टरों के बयान दर्ज हुए थे। इसी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कुछ संदिग्ध लोग पकड़े भी गए थे। इसके अगले दिन 11 जनवरी को महिला के पति की हालत बिगड़ गई। उसे बरेली रेफर किया गया। अगले दिन फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला टीम पहुंची। 13 जनवरी को आरोपियों की रिमांड मंजूर हुई। 14 जनवरी को उन्हें जेल से निकालकर घटनास्थल पर ले जाया गया। 15, 16 और 17 जनवरी को दो-दो गवाहों को थाने बुलाकर पूछताछ की गई।

सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के मामले में लगातार छानबीन चल रही है। पुलिस लोगों के बयान दर्ज करके आगे की कार्रवाई भी कर रही है। इसमें इंस्पेक्टर और दरोगा निलंबित हो चुके हैं। उनके खिलाफ भी मामला दर्ज है। उसकी जांच चल रही है। इसमें किसकी कितनी लापरवाही रही, ये कहना मुश्किल है। ये तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इतना है कि जो लापरवाह थे उनके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। प्रथम दृष्टतया बीट के सिपाहियों का दोष नहीं पाया गया है।
- अनिरुद्घ सिंह, सीओ बिल्सी
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