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‘बाल विवाह रोकने के लिए हों सामूहिक प्रयास’
बदायूं
Updated Mon, 19 Jan 2015 10:04 PM IST
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बाल विवाह सामाजिक कुरीति है। इसको रोकने के लिए सभी को सम्मलित प्रयास करते हुए जन जागरूकता संबंधी कार्यक्रम चलाने होंगे और दोषियों पर कार्रवाई कर बाल विवाह पर अंकुश लागाया जा सकता है। यह विचार व्यक्त करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी इस संबंध में अपनी अपनी जिम्मेदारी का भलीभांति निर्वहन करें।
बाल विवाह रोकने को राज्य स्तरीय कार्य योजना तैयार करने के लिए सोमवार को विकास भवन स्थित सभाकक्ष में यूनीसेफ द्वारा एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि अशिक्षा, जागरूकता की कमी सहित अन्य तमाम कारण हैं, जिससे बाल विवाह पर पूर्ण नियंत्रण नहीं लग पा रहा है।
यदि कोई व्यक्ति/समूह बाल विवाह को प्रोत्साहन देता है अथवा बाल विवाह करवाता है, तो उसे भी सजा दिए जाने के लिए कानून बनाया गया है। सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए शिक्षा और जागरूकता जरूरी है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला, ब्लाक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों का गठन भी किया जा चुका है।
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उन्होंने कहा कि बाल विवाह के संबंध में ग्राम प्रधान, शिक्षक, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं पड़ोसी आदि कोई भी शिकायत कर सकता है। गोष्ठी में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों के सुझावों को भी सुना गया।
कार्यशाला में यूनीसेफ के विक्रम सिंह, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रमाकांत शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी हरेंद्र कुमार, जिला कार्यक्त्रस्म अधिकारी निर्मल शर्मा, अशरफ खां, सुभाष सिंह मौजूद रहे।
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बाल विवाह रोकने को राज्य स्तरीय कार्य योजना तैयार करने के लिए सोमवार को विकास भवन स्थित सभाकक्ष में यूनीसेफ द्वारा एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि अशिक्षा, जागरूकता की कमी सहित अन्य तमाम कारण हैं, जिससे बाल विवाह पर पूर्ण नियंत्रण नहीं लग पा रहा है।
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यदि कोई व्यक्ति/समूह बाल विवाह को प्रोत्साहन देता है अथवा बाल विवाह करवाता है, तो उसे भी सजा दिए जाने के लिए कानून बनाया गया है। सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए शिक्षा और जागरूकता जरूरी है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला, ब्लाक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों का गठन भी किया जा चुका है।
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उन्होंने कहा कि बाल विवाह के संबंध में ग्राम प्रधान, शिक्षक, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं पड़ोसी आदि कोई भी शिकायत कर सकता है। गोष्ठी में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों के सुझावों को भी सुना गया।
कार्यशाला में यूनीसेफ के विक्रम सिंह, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रमाकांत शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी हरेंद्र कुमार, जिला कार्यक्त्रस्म अधिकारी निर्मल शर्मा, अशरफ खां, सुभाष सिंह मौजूद रहे।