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Budaun News: जलस्तर कम होने के साथ ही बर्बादी के निशान छोड़ती जा रही है रामगंगा
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दातागंज में बाढ़ क्षेत्र में पानी भर जाने से बर्बाद फसलें। संवाद
दातागंज। रामगंगा का जलस्तर तेजी से घटना शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीण राहत महसूस कर रहे हैं। बाढ़ घटने के साथ ही वह बर्बादी के निशान भी छोड़ती जा रही है। काफी क्षेत्र ऐसे हैं जहां पानी निकलने में काफी वक्त लग सकता है।
बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित ग्राम पंचायत सिमरिया सकतपुर, शेरपुर हर्रामपुर, कुंडरा मजरा, लालपुर खादर, नगरिया खनू, बिहारीपुर, मकरंदापुर, बिहारीपुर अजब, नौनी-टिकन्ना आदि डेढ़ दर्जन ग्राम पंचायतों में 10 हजार बीघा से अधिक फसल के नुकसान का अनुमान है।
ग्राम पंचायत कुंडरा मजरा के ग्राम प्रशासक तपन सिंह ने बताया कि हमारी ग्राम पंचायत में छह मजरे लगते हैं। बाढ़ में करीब 2000 बीघा फसल डूब गई। इसमें 700 बीघा ऐसी जमीन है, जहां से पानी निकलने में चार माह से अधिक समय लगेगा। वर्तमान में आठ से 10 फुट ऊंचा पानी यहां भरा हुआ है। खरीफ की फसल तो मारी ही गई, 700 बीघा में रबी की फसल भी इस बार नहीं हो सकेगी।
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ग्राम पंचायत सिमरिया सकतपुर में भी चार मजरे लगते हैं। यहां की ग्राम प्रशासक नन्ही देवी ने बताया कि दो सालों में हमारी ग्राम पंचायत की करीब 4000 बीघा जमीन रामगंगा में समा चुकी है। मूल जरतौली गांव अपना अस्तित्व खो चुका है। जिस जगह 100 से अधिक परिवार रहते थे, वहां अब मात्र छह ही रह गए हैं। सरकारी स्कूल भी कट गया है।
नौनी टिकन्ना के ग्राम प्रशासक चंद्रपाल माथुर और बिहारीपुर अजब के ग्राम प्रशासक आलोक सिंह के मुताबिक, दोनों जगह डेढ़ हजार बीघा फसल नष्ट हो गई है। बिहारीपुर में भी विगत दो वर्षों में 400 बीघा से अधिक कृषि भूमि कट चुकी है। यही स्थिति अन्य ग्राम पंचायतों की है।
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तहसील की टीमें मौके पर जाकर सर्वे कर रही हैं। बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का सही आकलन बाढ़ खत्म होने के बाद ही हो पाएगा। सर्वे के बाद सभी बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। -विनोद कुमार सिंह, एसडीएम
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पशुओं के चारे का संकट
- खेती के साथ किसानों के प्रमुख दुग्ध व्यवसाय को लगा झटका
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। बाढ़ निपटने के बाद भी प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सबसे अधिक परेशानी पशुओं के चारे को लेकर है। परिवार का भरण-पोषण अन्यत्र मेहनत-मजदूरी करके कर लिया जाएगा, लेकिन उनके सामने बेजुबानों के चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
कटरी क्षेत्र के लोग पशुपालन अधिक करते हैं। खेती के बाद दूध ही लोगों का यहां आय का मुख्य स्रोत है। कटरी क्षेत्र में पशु पूरे दिन जंगल में चरते हैं। रात में उन्हें थोड़ा भूसा खिला दिया जाता है, लेकिन बाढ़ का पानी भरा रहने की वजह से पूरे क्षेत्र की घास आदि सड़ गई है। बाढ़ के कारण अधिकांश भूसा भी खराब हो चुका है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि भूसा यहां से अन्य प्रदेशों में जा रहा है, जिसके कारण भूसे के दाम आसमान छू रहे हैं। 600-700 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा इस समय 1400 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। इस क्षेत्र की गोशालाओं के लिए भी चारे की जो फसल बोई गई थी, वह भी नष्ट हो गई है।
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बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित ग्राम पंचायत सिमरिया सकतपुर, शेरपुर हर्रामपुर, कुंडरा मजरा, लालपुर खादर, नगरिया खनू, बिहारीपुर, मकरंदापुर, बिहारीपुर अजब, नौनी-टिकन्ना आदि डेढ़ दर्जन ग्राम पंचायतों में 10 हजार बीघा से अधिक फसल के नुकसान का अनुमान है।
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ग्राम पंचायत कुंडरा मजरा के ग्राम प्रशासक तपन सिंह ने बताया कि हमारी ग्राम पंचायत में छह मजरे लगते हैं। बाढ़ में करीब 2000 बीघा फसल डूब गई। इसमें 700 बीघा ऐसी जमीन है, जहां से पानी निकलने में चार माह से अधिक समय लगेगा। वर्तमान में आठ से 10 फुट ऊंचा पानी यहां भरा हुआ है। खरीफ की फसल तो मारी ही गई, 700 बीघा में रबी की फसल भी इस बार नहीं हो सकेगी।
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ग्राम पंचायत सिमरिया सकतपुर में भी चार मजरे लगते हैं। यहां की ग्राम प्रशासक नन्ही देवी ने बताया कि दो सालों में हमारी ग्राम पंचायत की करीब 4000 बीघा जमीन रामगंगा में समा चुकी है। मूल जरतौली गांव अपना अस्तित्व खो चुका है। जिस जगह 100 से अधिक परिवार रहते थे, वहां अब मात्र छह ही रह गए हैं। सरकारी स्कूल भी कट गया है।
नौनी टिकन्ना के ग्राम प्रशासक चंद्रपाल माथुर और बिहारीपुर अजब के ग्राम प्रशासक आलोक सिंह के मुताबिक, दोनों जगह डेढ़ हजार बीघा फसल नष्ट हो गई है। बिहारीपुर में भी विगत दो वर्षों में 400 बीघा से अधिक कृषि भूमि कट चुकी है। यही स्थिति अन्य ग्राम पंचायतों की है।
तहसील की टीमें मौके पर जाकर सर्वे कर रही हैं। बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का सही आकलन बाढ़ खत्म होने के बाद ही हो पाएगा। सर्वे के बाद सभी बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। -विनोद कुमार सिंह, एसडीएम
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पशुओं के चारे का संकट
- खेती के साथ किसानों के प्रमुख दुग्ध व्यवसाय को लगा झटका
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। बाढ़ निपटने के बाद भी प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सबसे अधिक परेशानी पशुओं के चारे को लेकर है। परिवार का भरण-पोषण अन्यत्र मेहनत-मजदूरी करके कर लिया जाएगा, लेकिन उनके सामने बेजुबानों के चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
कटरी क्षेत्र के लोग पशुपालन अधिक करते हैं। खेती के बाद दूध ही लोगों का यहां आय का मुख्य स्रोत है। कटरी क्षेत्र में पशु पूरे दिन जंगल में चरते हैं। रात में उन्हें थोड़ा भूसा खिला दिया जाता है, लेकिन बाढ़ का पानी भरा रहने की वजह से पूरे क्षेत्र की घास आदि सड़ गई है। बाढ़ के कारण अधिकांश भूसा भी खराब हो चुका है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि भूसा यहां से अन्य प्रदेशों में जा रहा है, जिसके कारण भूसे के दाम आसमान छू रहे हैं। 600-700 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा इस समय 1400 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। इस क्षेत्र की गोशालाओं के लिए भी चारे की जो फसल बोई गई थी, वह भी नष्ट हो गई है।