कटरी की जमीन पर कब्जा करने पहुंचे पांच युवक गिरफ्तार

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 12:51 AM IST
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उझानी (बदायूं)। गंगा किनारे कटरी की कृषि योग्य भूमि पर कब्जा करके फसलें उगाने के लिए इलाके के लोग सक्रिय हो गए हैं। बुधवार रात ऐसा ही मामला सामने आया। चंदनपुर के पास सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जा करने के लिए दर्जनों की संख्या में लोग ट्रैक्टर लेकर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जुताई भी शुरू कर दी। इसकी भनक लगने पर कुछ लोगों ने पुलिस को फोन करके बुला लिया। पुलिस को देख कई लोग तो मौके से भाग गए, लेकिन पांच युवकों को ट्रैक्टरों समेत दबोच लिया गया। पांचों ट्रैक्टर सीज कर दिए गए हैं, साथ ही आरोपियों का पुलिस ने चालान कर दिया।
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कटरी की कृषि योग्य जमीनों पर कब्जा करने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। पुलिस के मुताबिक बुधवार रात में करीब नौ बजे चंदनपुर निवासी दो-तीन ग्रामीणों ने फोन कर जमीनों पर कब्जे की शिकायत की। कब्जा करने के लिए जो लोग चंदनपुर के पास कटरी में पहुंचे, उनमें अधिकतर लोग सहसवान क्षेत्र के गांव चंदेसी, मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव नरसेना और कछला कस्बे के पंखियानगला इलाके के निवासी बताए गए हैं। देर रात ही पांच ट्रैक्टरों से उन्होंने जुताई शुरू कर दी। करीब पांच बीघा जमीन को जोत भी लिया गया। इसके बाद मौके पर पहुंचे कछला चौकी के पुलिस फोर्स ने इलाके की घेराबंदी कर ली। ज्यादातर लोग पुलिस को देख अंधेरे का फायदा उठाकर कटरी के रास्ते भाग गए।
ट्रैक्टर सवार नरसेना निवासी सुखविंदर, सत्येंद्र सिंह, सहसवान कोतवाली क्षेत्र के जितेंद्र सिंह, मुजरिया के गांव पालपुर के मुनीश और पंखियानगला के अनिल को दबोच लिया गया। पुलिस ने पकड़े गए युवकों के पांचों ट्रैक्टरों को भी कब्जे में ले लिया। ट्रैक्टरों के साथ जुताई के उपकरण भी थे। मौके पर से भागे लोगों की तलाश में पुलिस ने आसपास इलाके में खोजबीन भी की, लेकिन कोई और हत्थे नहीं आया। बाद में चंदनपुर के लोग भी पुलिस चौकी पर पहुंच गए। उन्होंने दरोगा पुष्पेंद्र सिंह को आरोपियों के बारे में अवगत करा दिया।
प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह ने बताया कि कटरी के जिस इलाके में ये लोग कब्जा करने के लिए पहुंचे, वहां अभी तक पूरी तरह यह साफ नहीं हो पाया कि उस पर मालिकाना हक किसका है। रात में जुताई की कोशिश किए जाने से अवैध कब्जे का शक हो रहा था। पुलिस ने मौके से भागे लोगों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। तहसीलदार को हकीकत से अवगत करा दिया गया है। पैमाइश से पहले किसी ने भी कब्जे की कोशिश की तो बख्शा नहीं जाएगा।
गंगा किनारे खाम की जमीनों की होनी है पैमाइश
उझानी। कछला के आसपास गांवों से सटे इलाके में खाम की जमीनें हैं। गंगा में बाढ़ के बाद स्थिति जब सामान्य हो जाती है तो जमीनों का भूगोल बिगड़ जाता है। किसी को यह भी पता नहीं लग पाता कि उसके हिस्से की जमीन किस ओर है। पिछले कुछ सालों में खाम की जमीनों पर कब्जे को लेकर संघर्ष भी होता रहा है। पिछले महीना खजुरारा के आसपास कुछ लोगों ने अपने हिस्से को लेकर तहसीलदार सदर से शिकायत की थी। इसके बाद लोगों से खसरा-खतौनी मांगी गईं। एक-दो दिन में पैमाइश होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बताते हैं कि इलाके के एक सौ से अधिक गंगा किनारे खाम की जमीनों अपने मालिकाना हक के दस्तावेज भी राजस्व कर्मियों को उपलब्ध करा चुके हैं।
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