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Budaun News: बच्ची के साथ संवेदनाओं ने भी मेडिकल कॉलेज में तोड़ दिया दम
Thu, 24 Oct 2024 03:31 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Thu, 24 Oct 2024 03:31 AM IST
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बदायूं। मेडिकल कॉलेज में बुधवार को मानवता शर्मसार हो गई। तीन घंटे तक मां दस साल की बेटी को सीने से लगाए डाॅक्टरों के कक्ष में भटकती रही। बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए किसी डाॅक्टर को नहीं बुलाया गया। हर किसी को डाॅक्टरों के खेल में भाग लेना ज्यादा जरूरी लग रहा था। हद तो यह हो गई कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तक को घटना के बारे में नहीं पता।
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव थलिया नगला निवासी नाजिम की दस वर्षीय बेटी सूफिया (10) के गले में पिछले कई दिनों से दिक्कत थी। जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन प्राइवेट अस्पताल से उसे बुधवार को मेडिकल कालेज ले गए। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि यहां लापरवाही होने पर बेटी की जान चली जाएगी।
डॉक्टर कर्मचारियों ने नहीं किया भर्ती
डॉक्टर व कर्मचारियों ने सूफिया को भर्ती नहीं किया और 114 नंबर कमरे में गले के डॉक्टर को दिखाने को कहा। जबकि बच्ची की हालत गंभीर थी। परिजन उसको 114 नंबर में लेकर पहुंचे तो वहां डॉक्टर नदारद थे। वहां से उसकाे 130 नंबर कमरे में भेज दिया गया। यहां भी डॉक्टर नहीं मिले। तीन घंटे यानी 12 बजे तक मां बीमार बेटी को सीने से लगाए इधर-उधर घूमती रही। पिता नाजिम का कहना है कि अगर बच्ची की हालत देखकर उसको वेंटिलेटर मिल जाता और भर्ती कर लिया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।
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मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव थलिया नगला निवासी नाजिम की दस वर्षीय बेटी सूफिया (10) के गले में पिछले कई दिनों से दिक्कत थी। जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन प्राइवेट अस्पताल से उसे बुधवार को मेडिकल कालेज ले गए। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि यहां लापरवाही होने पर बेटी की जान चली जाएगी।
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डॉक्टर कर्मचारियों ने नहीं किया भर्ती
डॉक्टर व कर्मचारियों ने सूफिया को भर्ती नहीं किया और 114 नंबर कमरे में गले के डॉक्टर को दिखाने को कहा। जबकि बच्ची की हालत गंभीर थी। परिजन उसको 114 नंबर में लेकर पहुंचे तो वहां डॉक्टर नदारद थे। वहां से उसकाे 130 नंबर कमरे में भेज दिया गया। यहां भी डॉक्टर नहीं मिले। तीन घंटे यानी 12 बजे तक मां बीमार बेटी को सीने से लगाए इधर-उधर घूमती रही। पिता नाजिम का कहना है कि अगर बच्ची की हालत देखकर उसको वेंटिलेटर मिल जाता और भर्ती कर लिया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।
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