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नूरगंज घाट के पास तीन किशोर गंगा में बहे, एक की मौत
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गंगा के नूरगंज घाट के पास जुटे ग्रामीण और महिलाएं।
- फोटो : BADAUN
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उझानी/कछला (बदायूं)। गंगा स्नान करने पड़ोसी गांव नूरगंज घाट पर पहुंचे पांच किशोरों में तीन बह गए। दो किशोर तो डूबने से बाल-बाल बच गए लेकिन निशांत बह गया। उसका पता नहीं लगने पर चारों किशोर घर पहुंचे और परिवार वालों को मौके पर बुला लाए। करीब दो घंटे बाद गोताखोरों और ग्रामीणों ने उसे खोज निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। निशांत कछला के राधेलाल इंटर कॉलेज में 10 वीं का छात्र था।
कोतवाली क्षेत्र के गांव कोटरा निवासी निशांत (15) पुत्र रिंकू, अजय (15) पुत्र राजकुमार, शेखर (14) पुत्र मुगेंद्र सिंह, भूपेंद्र (16) पुत्र पिंकू सिंह और अखिल (15) पुत्र सुभाष शनिवार पूर्वाह्न स्नाने के लिए आए थे। गंगा में जलस्तर अधिक होने के कारण घाट भी बेतरतीब हो गया था। इसके बाद निशांत समेत पांच किशोर गंगा स्नान करने लगे। स्नान करते समय निशांत गहरे में चला गया। निशांत को बचाने के लिए शेखर और भूपेंद्र आगे बढ़े तो वे भी बहने लगे। शेखर और भूपेंद्र के शोर मचाने पर निशांत ने गंगा में भैंस की पूंछ पकड़ ली, लेकिन पूंछ हाथ से छूट गई। ऐसे में निशांत बह गया। यह देख उसके तीनों साथी दौड़कर गांव कोटरा पहुंचे और परिवार वालों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। निशांत के परिजन समेत कई लोग घाट पर आ गए। गोताखोरों की मदद से खोजबीन के दौरान निशांत को ढूंढ लिया गया पर उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना के बाद मौके पर पुलिस कर्मी भी पहुंचे लेकिन परिवार के लोगों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया।
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भैंस की पूंछ भी जिंदगी बचाने में नहीं आई काम
प्रत्यक्षदर्शी किशोर भूपेंद्र ने बताया कि निशांत जहां पर स्नान कर रहा था, उसके पास ही एक भैंस भी थी। भैंस दूसरी पार बढ़ने लगी तो निशांत ने उसकी पूंछ पकड़ ली। उसे लगा कि वह भैंस की पूंछ के सहारे बहने से बचते हुए गंगा पार निकल जाएगा लेकिन अचानक ही पूंछ उसके हाथ से छूट गई। इसके कुछ देर बाद ही वह आंखों से ओझल हो गया।
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पिता के साथ भाई को राखी बांधने मायके गई थी मां
छात्र निशांत की गंगा में डूबने से मौत की जानकारी उसके पिता रिंकू और मां कांती देवी को रिश्तेदारी में लगी। मां अपने भाई को राखी बांधने के लिए एक दिन पहले ही बिनावर के पस्तौर गांव गई थी। पिता भी उसी के साथ थे। परिवार के लोगों से रिंकू को जब पता लगा तो वह पत्नी के साथ लौट पड़े। रिश्तेदार भी उनके साथ आए। गांव पहुंचने तक मां को निशांत की मौत के बारे में नहीं बताया गया। दरवाजे पर लोगों की भीड़ देख वह गश खाकर जमीन पर गिर पड़ी। बेटे की मौत के बाद से वह बदहवास है।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव कोटरा निवासी निशांत (15) पुत्र रिंकू, अजय (15) पुत्र राजकुमार, शेखर (14) पुत्र मुगेंद्र सिंह, भूपेंद्र (16) पुत्र पिंकू सिंह और अखिल (15) पुत्र सुभाष शनिवार पूर्वाह्न स्नाने के लिए आए थे। गंगा में जलस्तर अधिक होने के कारण घाट भी बेतरतीब हो गया था। इसके बाद निशांत समेत पांच किशोर गंगा स्नान करने लगे। स्नान करते समय निशांत गहरे में चला गया। निशांत को बचाने के लिए शेखर और भूपेंद्र आगे बढ़े तो वे भी बहने लगे। शेखर और भूपेंद्र के शोर मचाने पर निशांत ने गंगा में भैंस की पूंछ पकड़ ली, लेकिन पूंछ हाथ से छूट गई। ऐसे में निशांत बह गया। यह देख उसके तीनों साथी दौड़कर गांव कोटरा पहुंचे और परिवार वालों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। निशांत के परिजन समेत कई लोग घाट पर आ गए। गोताखोरों की मदद से खोजबीन के दौरान निशांत को ढूंढ लिया गया पर उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना के बाद मौके पर पुलिस कर्मी भी पहुंचे लेकिन परिवार के लोगों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया।
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भैंस की पूंछ भी जिंदगी बचाने में नहीं आई काम
प्रत्यक्षदर्शी किशोर भूपेंद्र ने बताया कि निशांत जहां पर स्नान कर रहा था, उसके पास ही एक भैंस भी थी। भैंस दूसरी पार बढ़ने लगी तो निशांत ने उसकी पूंछ पकड़ ली। उसे लगा कि वह भैंस की पूंछ के सहारे बहने से बचते हुए गंगा पार निकल जाएगा लेकिन अचानक ही पूंछ उसके हाथ से छूट गई। इसके कुछ देर बाद ही वह आंखों से ओझल हो गया।
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पिता के साथ भाई को राखी बांधने मायके गई थी मां
छात्र निशांत की गंगा में डूबने से मौत की जानकारी उसके पिता रिंकू और मां कांती देवी को रिश्तेदारी में लगी। मां अपने भाई को राखी बांधने के लिए एक दिन पहले ही बिनावर के पस्तौर गांव गई थी। पिता भी उसी के साथ थे। परिवार के लोगों से रिंकू को जब पता लगा तो वह पत्नी के साथ लौट पड़े। रिश्तेदार भी उनके साथ आए। गांव पहुंचने तक मां को निशांत की मौत के बारे में नहीं बताया गया। दरवाजे पर लोगों की भीड़ देख वह गश खाकर जमीन पर गिर पड़ी। बेटे की मौत के बाद से वह बदहवास है।