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Budaun News: अब्दुल्लागंज के कैंटर चालक की गुरुग्राम में मौत, कोहराम
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भोजराम की फाइल फोटो
उझानी। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर से कैंटर में प्लाई लादकर हरियाणा के गुरुग्राम पहुंचे चालक भोजराम कश्यप की अपने वाहन के केबिन में सोते समय रहस्यमय ढंग से मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद उनका शव रविवार को घर लाया गया तो परिवार में कोहराम मच गया।
चालक भोजराम कश्यप (33) कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दुल्लागंज निवासी लालाराम के बेटे थे। वह अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई लीलाधर ने बताया कि भोजराम उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में एक ट्रांसपोर्टर का कैंटर चलाते थे। चार दिन पहले वह ऊधमसिंह नगर से कैंटर में प्लाई लादकर हरियाणा के गुरुग्राम के सोहना इलाके में गए थे।
आधे से अधिक प्लाई अनलोड कराके वह रात में कैंटर की केबिन में सो गए थे। तड़के जब वह केबिन से बाहर नहीं निकले तो खिड़की खोलकर उन्हें जगाने की कोशिश की गई, हालांकि तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। बड़े भाई के मुताबिक, भोजराम की मौत की सूचना उन्हें शनिवार तड़के मिली।
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उनकी मौत पसोपेश के बीच भाई लीलाधर को ट्रांसपोर्टर से पता चला है कि भोजराम को सोते समय हार्टअटैक पड़ा था। कैंटर ले जाते समय हालांकि वह पूरी तरह स्वस्थ थे। सोहना पुलिस ने ही उनके शव का पोस्टमॉर्टम कराया। परिजनों को अभी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। कैंटर में उनके अलावा कोई और नहीं था। वह अकेले ही कैंटर में माल लादकर गंतव्य तक पहुंचा दिया करते थे।
सोहना पुलिस ने सबसे पहले ट्रांसपोर्टर को उनकी मौत के बारे में अवगत कराया था। कैंटर चालक का अपराह्न में उनके पैतृक घर आया तो परिवार में कोहराम मच गया। रविवार पूर्वाह्न उनके शव का दाह संस्कार किया गया।
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पांच साल पहले हुई थी शादी, पत्नी ले चुकी है तलाक
अब्दुल्लागंज निवासी मृत चालक भोजराम की मां का बाल्यावस्था में ही निधन हो गया था। करीब पांच साल पहले उनकी शादी हुई थी। पत्नी ससुराल में कम, मायके में ज्यादा समय रहती थी। भाई लज्जाराम ने बताया कि इसी को लेकर दंपती के बीच विवाद कोर्ट में करीब तीन साल तक चला। इसके बाद पत्नी ने भोजराम से तलाक ले लिया। उनके कोई संतान भी नहीं है। पिता लालाराम और भाई उनकी मौत से बदहवास हैं।
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चालक भोजराम कश्यप (33) कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दुल्लागंज निवासी लालाराम के बेटे थे। वह अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई लीलाधर ने बताया कि भोजराम उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में एक ट्रांसपोर्टर का कैंटर चलाते थे। चार दिन पहले वह ऊधमसिंह नगर से कैंटर में प्लाई लादकर हरियाणा के गुरुग्राम के सोहना इलाके में गए थे।
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आधे से अधिक प्लाई अनलोड कराके वह रात में कैंटर की केबिन में सो गए थे। तड़के जब वह केबिन से बाहर नहीं निकले तो खिड़की खोलकर उन्हें जगाने की कोशिश की गई, हालांकि तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। बड़े भाई के मुताबिक, भोजराम की मौत की सूचना उन्हें शनिवार तड़के मिली।
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उनकी मौत पसोपेश के बीच भाई लीलाधर को ट्रांसपोर्टर से पता चला है कि भोजराम को सोते समय हार्टअटैक पड़ा था। कैंटर ले जाते समय हालांकि वह पूरी तरह स्वस्थ थे। सोहना पुलिस ने ही उनके शव का पोस्टमॉर्टम कराया। परिजनों को अभी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। कैंटर में उनके अलावा कोई और नहीं था। वह अकेले ही कैंटर में माल लादकर गंतव्य तक पहुंचा दिया करते थे।
सोहना पुलिस ने सबसे पहले ट्रांसपोर्टर को उनकी मौत के बारे में अवगत कराया था। कैंटर चालक का अपराह्न में उनके पैतृक घर आया तो परिवार में कोहराम मच गया। रविवार पूर्वाह्न उनके शव का दाह संस्कार किया गया।
पांच साल पहले हुई थी शादी, पत्नी ले चुकी है तलाक
अब्दुल्लागंज निवासी मृत चालक भोजराम की मां का बाल्यावस्था में ही निधन हो गया था। करीब पांच साल पहले उनकी शादी हुई थी। पत्नी ससुराल में कम, मायके में ज्यादा समय रहती थी। भाई लज्जाराम ने बताया कि इसी को लेकर दंपती के बीच विवाद कोर्ट में करीब तीन साल तक चला। इसके बाद पत्नी ने भोजराम से तलाक ले लिया। उनके कोई संतान भी नहीं है। पिता लालाराम और भाई उनकी मौत से बदहवास हैं।