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70 फीसदी आंगनबाड़ी तो बीएलओ बना दी गईं, आखिर कैसे चलें केंद्र

Tue, 26 Oct 2021 01:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 26 Oct 2021 01:39 AM IST
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Aanganbari
कादरचौक इलाके में बना आंगनबाड़ी केंद्र। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। गर्भवती माताओं व नौनिहालों को कुपोषण मुक्त करने का सपना देख रही सरकार की नीतियां ही लक्ष्य पूरा करने में आड़े आ रहीं हैं। विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत गांवों की करीब 70 फीसदी आंगनबाड़ी को बीएलओ बना दिया गया है। उनसे चुनाव का काम कराया जा रहा है। ऐसे में ड्राई राशन बांटने में भी दिक्कत आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
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शासन की निर्देश पर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। जिले में 2940 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जहां पर आंगनबाड़ी तैनात हैं। इन आंगनबाड़ी के माध्यम से पंजीकृत बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं को ड्राई राशन दिया जाता है। अब ड्राई राशन वितरण में विभाग के सामने समस्या उत्पन्न होने लगी है। क्योंकि 60 से 70 प्रतिशत आंगनबाड़ी को बीएलओ बना दिया गया है। निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारी की वजह बीएलओ अपने मूल विभाग के काम नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में जिले को कुपोषण मुक्त करने की मुहिम को झटका लगता दिख रहा है। इस संबंध में डीपीओ आदीश मिश्रा ने बताया कि आगामी चुनाव को देखते हुए तैयारी की जा रही है। उसमें आंगनबाड़ी बीएलओ के रूप में काम कर रहीं हैं ताकि चुनाव से पहले नए मतदाताओं को जोड़ा जा सके। उनसे मूल काम के लिए भी पर्याप्त समय देने के लिए कहा गया है। आंगनबाड़ी की वजह से ड्राई राशन वितरण में दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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450 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में, 15 का निर्माण शुरू
बदायूं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय के अंतर्गत जिले में 2940 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से बरसों बाद भी करीब साढ़े चार सौ केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। नए आंगनबाड़ी केंद्र बनाने की रफ्तार बेहद सुस्त है। लंबी लिखापढ़ी के बाद भी केवल 15 आंगनबाड़ी केंद्र बनाने को संस्तु ति हो सकी है । जिसमें 15 स्थानों पर केंद्रों का निर्माण शुरू हो सका है।
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शासन के निर्देश पर आंगनबाड़ी केंद्रों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है ताकि छोटे बच्चों को यहां पर बेहतर शिक्षा दी जा सके। बावजूद इसके जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है। जिले में कई केंद्रों की खुद की बिल्डिंग न होने की वजह से वे घरों और छतों पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में यहां पर गुणवत्ता से विभाग को समझौता करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में दो हजार 940 आंगनबाड़ी केंद्र है। इन केंद्रों पर तीन लाख 21 हजार 278 बच्चे पंजीकृत है।
इस समय 24 सौ आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग में चल रहे हैं जबकि इन्हीं में से चार सौ आंगनबाड़ी केंद्रों की खुद की बिल्डिंग है। वहीं करीब साढ़े चार सौ आंगनबाड़ी केंद्र आंगनबाड़ी और सहायिकाओं के घरों, छतों पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों ने जिले में आंगनबाड़ी केंद्र के भवनों को बनवाने की मांग करते हुए प्रस्ताव भेजा। इसमें शासन ने 15 भवनों के निर्माण के लिए अनुमति दी। इसके बाद जिले में भवनों का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया था लेकिन बीच में काम की गति बेहद सुस्त हो गई। इस पर अधिकारियों ने नाराजगी व्यक्त की है।

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शासन की ओर से 15 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों को बनाने की स्वीकृति मिली है। उसके बाद में निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, ऐसे में चेकिंग कर रहे हैं। कुछ जगह काम की रफ्तार सुस्त मिली, उन्हें निर्देशित किया है कि वह समय से गुणवत्तापूर्वक काम करें।
- आदीश कुमार, डीपीओ
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