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लखनऊ से आई टीम को मिला सब कुछ ओके

Thu, 05 Oct 2017 11:21 PM IST
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:21 PM IST
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लखनऊ से आई टीम को मिला सब कुछ ओके
लखनऊ से आई टीम को मिला सब कुछ ओके - फोटो : बदायूं, अमर उजाला ब्यूरो
बदायूूं। लखनऊ से आई जांच टीम ने राजकीय मेडिकल कॉलेज मे दो दिन तक बारीकी से छानबीन की। टीम को जांच के दौरान मेडिकल कॉलेज में सब कुछ ओके मिला। कई जगह गंदगी और एक-दो शिकायतें मिलीं जिन्हें जल्द दूर कराने के निर्देश दिए गए। डॉक्टरों की कमी पूरा करने के लिए शासन को लिखा जाएगा। शासन के जरिए टीम की जांच रिपोर्ट एमसीआई को भेजी जाएगी।
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दो दिन की छानबीन के बाद बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान टीम में शामिल डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट के कार्डियोलाजी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. मुकुल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने दोनों दिन ओपीडी चेक की। एमबीबीएस क्लास के लिए लैब और कक्ष देखे, जो सही मिले। मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग की स्थिति देखी। साथ ही टीबी ब्लॉक, म्यूजियम रूम, डिसक्शन हॉल, लैब, ऑक्सीजन प्लांट, पॉवर हॉउस, किचन, लॉडिग समेत सभी विभागों का निरीक्षण किया। सभी जगह स्थिति ठीक मिली। कुछ ब्लॉकों में गंदगी मिली। इस पर उन्होंने तुरंत सफाई कराने के निर्देश दिए। कुछ जगहों पर फर्श की टाइल्स टूटी मिलीं, जिस पर नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान डॉ. मनीष, डॉ. ब्रिजेश कुमार, डॉ. संतोष पांडे मौजूद रहे।
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डॉ. मुकुल मिश्रा ने बताया कि शासन की मंशा है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज जल्द शुरू हो। इसको लेकर जांच टीम को यहां पर भेजा गया है कि कॉलेज में जो कमी है उसमें सुधार किया जाए। ताकि कमियों को जल्द पूरा किया जा सके। जिससे एमसीआई टीम यहां पर दौरे पर आए तो उन्हें सब कुछ सहीं मिले और वह कॉलेज को मान्यता दे सके। उन्होंने कहा कि दिसंबर से मेडिकल कॉलेज का निर्माण रुके होने की बात सामने आई है। वहीं मेडिकल कॉलेज में उपकरणों की कमी भी है। इससे डॉक्टरों को परेशानी हो रही है। कुछ डॉक्टरों की भी कमी है और दवाओं की दिक्कत सामने आई है। इसके बारे में शासन को अवगत करा दिया जाएगा।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनसी प्रजापति का कहना है कि कॉलेज में दवाओं की कुछ दिक्कत है। डॉक्टरों से बात हुई। उसके बाद में 572 प्रकार की दवाओं के लिए ट्रेंडर दिया है।

 
अब तक 363 करोड़ रुपये मिला, पर पूरा खर्च नहीं
बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज को शासन की ओर से 650 करोड़ रुपये स्वीकृत है। कॉलेज को लगभग 363 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिया गया है। इसके बाद से निर्माण कार्य तो हुआ, लेकिन बिल्डिंग के लिए आए रुपये अभी पूर्ण रूप से खर्च नहीं हो पाए हैं। जिसके चलते उसे अन्य मद में ट्रांसफर कर दिया गया था। इसी प्रकार 20 लाख रुपये उपकरण खरीदने के लिए आया था, लेकिन वह समय से खर्च नहीं हो पाया।
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