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इस बार तो बदइंतजामी का मेला ककोड़ा
Updated Sun, 05 Nov 2017 11:32 PM IST
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गंगा में स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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मेला ककोड़ा(बदायूं)।
गंगा किनारे लगे विशाल मेले में बदइंतजामी का माहौल इस कदर दिखाई दिया कि श्रद्धालु जिम्मेदारों को कोसते नजर आए। जिला पंचायत प्रशासन के साफ सफाई के सारे दावे ध्वस्त हो गए। शौचालय से लेकर नलों तक की व्यवस्था बद से बदतर रही।
ककोड़ा मेले के नाम पर जिला पंचायत प्रशासन लाखों का बजट बनाता है। इसमें जनता को पानी, पथ प्रकाश, शौचालय, चेंज रूम जैसी सहूलियत देने का दावा करते हुए अधिकारी बड़ा गोलमाल कर लेते हैं। भीड़ बढ़ने के साथ अव्यवस्थाएं होना भी लाजिमी है पर जब मनमानी से अधूरे संसाधनों के दम पर दावे किए जाएं तो कलई खुल ही जाती है। इस बार के मेले में हालात कुछ ऐसे ही बने। सफाई के सारे दावे पहले दिन ही ध्वस्त हो गए। दूसरे दिन भी मेले में जगह-जगह गंदगी फैली नजर आई। चूंकि स्वच्छता भाजपा सरकारों की प्राथमिकता है। ऐसे में जिला पंचायत प्रशासन ने मेले में कुछ जगह मोबाइल शौचालय लगाकर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक करने की कोशिश की। शौचालय इतने कम थे कि शनिवार को ही सभी शौचालय चोक हो गए। रविवार को भी इन्हें साफ करने जहमत नहीं उठाई गई। मजबूरी में लोगों को खुले में शौच को जाना पड़ा।
मेले में तीन सौ नल लगाने का दावा किया गया था। नल दिखे भी पर कई लोगों की शिकायत थी कि नल पानी नहीं दे रहे हैं। जानकारी करने पर पता लगा कि मानक के मुताबिक गहराई करके नल नहीं लगाए गए थे। कम गहराई के बोरिंग की वजह से नलों ने पानी नहीं दिया। घाट के किनारे महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए इस बार गिनती के ही चेंज रूम थे। भीड़ में लोगों को चेंज रूम खोजे नहीं मिले। इस वजह से महिलाओं को कपड़े बदलने में खासी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।
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नाव डूबी, गोताखोरों ने लोगों को बचाया
शनिवार रात गंगा में नौका से एक परिवार भ्रमण कर रहा था। इनकी नाव गहरे पानी में पलट गई तो कोहराम मच गया। हालांकि शोर मचने पर किनारे से गंगा में कूदे गोताखोरों ने सभी लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया।
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गंगा किनारे लगे विशाल मेले में बदइंतजामी का माहौल इस कदर दिखाई दिया कि श्रद्धालु जिम्मेदारों को कोसते नजर आए। जिला पंचायत प्रशासन के साफ सफाई के सारे दावे ध्वस्त हो गए। शौचालय से लेकर नलों तक की व्यवस्था बद से बदतर रही।
ककोड़ा मेले के नाम पर जिला पंचायत प्रशासन लाखों का बजट बनाता है। इसमें जनता को पानी, पथ प्रकाश, शौचालय, चेंज रूम जैसी सहूलियत देने का दावा करते हुए अधिकारी बड़ा गोलमाल कर लेते हैं। भीड़ बढ़ने के साथ अव्यवस्थाएं होना भी लाजिमी है पर जब मनमानी से अधूरे संसाधनों के दम पर दावे किए जाएं तो कलई खुल ही जाती है। इस बार के मेले में हालात कुछ ऐसे ही बने। सफाई के सारे दावे पहले दिन ही ध्वस्त हो गए। दूसरे दिन भी मेले में जगह-जगह गंदगी फैली नजर आई। चूंकि स्वच्छता भाजपा सरकारों की प्राथमिकता है। ऐसे में जिला पंचायत प्रशासन ने मेले में कुछ जगह मोबाइल शौचालय लगाकर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक करने की कोशिश की। शौचालय इतने कम थे कि शनिवार को ही सभी शौचालय चोक हो गए। रविवार को भी इन्हें साफ करने जहमत नहीं उठाई गई। मजबूरी में लोगों को खुले में शौच को जाना पड़ा।
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मेले में तीन सौ नल लगाने का दावा किया गया था। नल दिखे भी पर कई लोगों की शिकायत थी कि नल पानी नहीं दे रहे हैं। जानकारी करने पर पता लगा कि मानक के मुताबिक गहराई करके नल नहीं लगाए गए थे। कम गहराई के बोरिंग की वजह से नलों ने पानी नहीं दिया। घाट के किनारे महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए इस बार गिनती के ही चेंज रूम थे। भीड़ में लोगों को चेंज रूम खोजे नहीं मिले। इस वजह से महिलाओं को कपड़े बदलने में खासी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।
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नाव डूबी, गोताखोरों ने लोगों को बचाया
शनिवार रात गंगा में नौका से एक परिवार भ्रमण कर रहा था। इनकी नाव गहरे पानी में पलट गई तो कोहराम मच गया। हालांकि शोर मचने पर किनारे से गंगा में कूदे गोताखोरों ने सभी लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया।