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लेबर रूम देखकर भड़कीं एडी हेल्थ
Updated Tue, 12 Dec 2017 07:53 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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बदायूं। बरेली मंडल की अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी) डॉ.प्रमिला गौड़ ने मंगलवार को जिला महिला और पुरुष अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। लेबर रूम में कई अनियमितताएं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने चेताया कि 15 दिनों के अंदर सुधार नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई होगी। डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से किसी हाल में बच नहीं सकते। एडी के निरीक्षण से दोनों अस्पताल के कर्मचारियों-डॉक्टर्स में खलबली मची रही।
एडी ने महिला अस्पताल पहुंचकर सीधे लेबर रूम का रूख किया। उसके शौचालय में बेहद गंदगी मिली। बिजली की व्यवस्था भी नहीं थी। सीएफएल भी नहीं लगवाई गईं। बिजली के तार अस्त-व्यस्त थे। इस पर उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने बेहद नाराजगी जताई। सघन नवजात चिकित्सा उपचार इकाई (एसएनसीयू) में दो नवजात ही थे। इस पर उन्होंने निर्देश दिए कि जो भी नवजात हो उन्हें इसी में भर्ती किया जाए ताकि किसी तरह की दिक्कत न हो। ओपीडी शुरू होने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ नवजात शिशु को देखें। एनआरसी में तैनात कर्मचारियों को सीयूजी देने के निर्देश दिए। एडी ने डिजिटल थर्मामीटर लगवाने के भी निर्देश दिए, ताकि एसएनसीयू का तापमान हमेशा दिखाई देता रहे। बोलीं कि कोई भी डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है।
एडी ने पुरुष अस्पताल मेें ओपीडी के अलावा बाल पोषण वार्ड का जायजा लिया। देखा कि मात्र चार कुपोषित बच्चे ही वार्ड में भर्ती हैं। इस पर उन्होंने कहा कि जो भी कुपोषित बच्चे अस्पताल तक आते हैं उन्हें भर्ती कराया जाए। या फिर जो चिह्नित किए गए हैं उन्हें भर्ती कराया जाए। उन्होंने सेफ हाउस भी देखा। दोनों अस्पताल के सीएमएस को निर्देश दिए कि जो भी खामियां हैं, उन्हें हर हाल में 15 दिनों के अंदर दूर करा लिया जाए। इसके बाद जो भी कमी मिलेगी और दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
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इंसेट-
एडी को मरीजों ने बताई समस्याएं
जिला पुरुष और महिला अस्पताल मेें निरीक्षण के समय कुछ मरीजों और उनके तीमारदारों ने समस्याएं भी बताईं। ज्यादातर का कहना था कि डॉक्टर और कर्मचारी समय से मरीज को नहीं देखते हैं। इस पर एडी ने मरीजों की शिकायत को दूर करने के सीएमएस को निर्देश दिए।
इंसेट-
जरूरत पड़ने पर नवजात को भेजें बरेली-आगरा
एडी डॉ.प्रमिला गौड़ ने महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी को निर्देश दिए कि जरूरत पड़ने पर नवजात को बेहतर इलाज या सुविधा के लिए बरेली अथवा आगरा भेजें। किसी भी हाल में लापरवाही नहीं बरती जाए।
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एडी ने महिला अस्पताल पहुंचकर सीधे लेबर रूम का रूख किया। उसके शौचालय में बेहद गंदगी मिली। बिजली की व्यवस्था भी नहीं थी। सीएफएल भी नहीं लगवाई गईं। बिजली के तार अस्त-व्यस्त थे। इस पर उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने बेहद नाराजगी जताई। सघन नवजात चिकित्सा उपचार इकाई (एसएनसीयू) में दो नवजात ही थे। इस पर उन्होंने निर्देश दिए कि जो भी नवजात हो उन्हें इसी में भर्ती किया जाए ताकि किसी तरह की दिक्कत न हो। ओपीडी शुरू होने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ नवजात शिशु को देखें। एनआरसी में तैनात कर्मचारियों को सीयूजी देने के निर्देश दिए। एडी ने डिजिटल थर्मामीटर लगवाने के भी निर्देश दिए, ताकि एसएनसीयू का तापमान हमेशा दिखाई देता रहे। बोलीं कि कोई भी डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है।
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एडी ने पुरुष अस्पताल मेें ओपीडी के अलावा बाल पोषण वार्ड का जायजा लिया। देखा कि मात्र चार कुपोषित बच्चे ही वार्ड में भर्ती हैं। इस पर उन्होंने कहा कि जो भी कुपोषित बच्चे अस्पताल तक आते हैं उन्हें भर्ती कराया जाए। या फिर जो चिह्नित किए गए हैं उन्हें भर्ती कराया जाए। उन्होंने सेफ हाउस भी देखा। दोनों अस्पताल के सीएमएस को निर्देश दिए कि जो भी खामियां हैं, उन्हें हर हाल में 15 दिनों के अंदर दूर करा लिया जाए। इसके बाद जो भी कमी मिलेगी और दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
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एडी को मरीजों ने बताई समस्याएं
जिला पुरुष और महिला अस्पताल मेें निरीक्षण के समय कुछ मरीजों और उनके तीमारदारों ने समस्याएं भी बताईं। ज्यादातर का कहना था कि डॉक्टर और कर्मचारी समय से मरीज को नहीं देखते हैं। इस पर एडी ने मरीजों की शिकायत को दूर करने के सीएमएस को निर्देश दिए।
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जरूरत पड़ने पर नवजात को भेजें बरेली-आगरा
एडी डॉ.प्रमिला गौड़ ने महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी को निर्देश दिए कि जरूरत पड़ने पर नवजात को बेहतर इलाज या सुविधा के लिए बरेली अथवा आगरा भेजें। किसी भी हाल में लापरवाही नहीं बरती जाए।