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बुखार से दो और बच्चों की मौत
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:47 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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बदायूं। अलग-अलग स्थानों पर बुखार से दो बच्चों की मौत हो गई। इधर, कई लोग बुखार से पीड़ित हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
कछला/ उझानी। कछला समेत आसपास के गांवों में बुखार का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के नहीं मिलने पर प्राइवेट क्लीनिक पर भर्ती पांच साल के बालक की मंगलवार दोपहर में हालत बिगड़ गई। घरवाले उसे लेकर बदायूं को चले लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
हुसैनपुर निवासी महेंद्र कश्यप के पांच वर्षीय बेटे राजपाल को तीन दिन पहले बुखार आया था। सुबह घरवालों ने राजपाल को कसबे के निजी चिकित्सक को दिखाया। दोपहर तक हालत सामान्य रही लेकिन अपराह्न में हालत बिगड़ जाने पर डॉक्टर ने उसे बदायूं अस्पताल ले जाने की सलाह दी। घरवाले राजपाल को लेकर बदायूं को निकले ही थे कि गांव के बाहर उसकी मौत हो गई। बालक की मौत से घर में कोहराम मच गया। इससे तीन दिन पहले कसबेे राहुल की चार माह की बेटी रिमझिम की बुखार से मौत हो गई थी।
कसबा समेत पड़ोस के गांव नरसेना, पालपुर, चौसिंगा और हुसैनपुर में चार बच्चों समेत आठ लोग बुखार से पीड़ित हैं। उनका भी निजी चिकित्सकों से इलाज कराया गया है। महेंद्र और राहुल का कहना है कि बुखार का प्रकोप होने के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक नहीं पहुंचता। फार्मेसिस्ट ही मरीजों के इलाज की औपचारिकता पूरी करता है। इससे नाराज ग्रामीणों ने पिछले दिनों सीएमओ को शिकायत भी भेजी थी लेकिन अब तक गौर नहीं किया गया है।
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कुंवरगांव। क्षेत्र के गांव इमलिया में तेज बुखार से धर्मेंद्र की एक वर्षीय बेटी शिवानी की मंगलवार सुबह मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि कुछ दिन से शिवानी को बुखार आ रहा था। इलाज कराने के बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ ।
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डेंगू से एक और सराफ की मौत
म्याऊं। डेंगू से म्याऊं के एक और सराफा व्यापारी की मंगलवार को मौत हो गई। दो सप्ताह में चचेरे-तहेरे दो भाइयों की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
म्याऊं निवासी 28 वर्षीय अंकुर वर्मा को कई दिन पहले बुखार आया था। जांच कराने पर उसे डेंगू होने का पता चला। परिवार वाले उसे दिल्ली ले गए। वहां कई दिन एक निजी अस्पताल में इलाज चलने के बाद मंगलवार को उसने दम तोड़ दिया। दो सप्ताह पहले अंकुर के तहेरे भाई विष्णु वर्मा की मौत भी डेंगू से हो चुकी है।
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कछला/ उझानी। कछला समेत आसपास के गांवों में बुखार का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के नहीं मिलने पर प्राइवेट क्लीनिक पर भर्ती पांच साल के बालक की मंगलवार दोपहर में हालत बिगड़ गई। घरवाले उसे लेकर बदायूं को चले लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
हुसैनपुर निवासी महेंद्र कश्यप के पांच वर्षीय बेटे राजपाल को तीन दिन पहले बुखार आया था। सुबह घरवालों ने राजपाल को कसबे के निजी चिकित्सक को दिखाया। दोपहर तक हालत सामान्य रही लेकिन अपराह्न में हालत बिगड़ जाने पर डॉक्टर ने उसे बदायूं अस्पताल ले जाने की सलाह दी। घरवाले राजपाल को लेकर बदायूं को निकले ही थे कि गांव के बाहर उसकी मौत हो गई। बालक की मौत से घर में कोहराम मच गया। इससे तीन दिन पहले कसबेे राहुल की चार माह की बेटी रिमझिम की बुखार से मौत हो गई थी।
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कसबा समेत पड़ोस के गांव नरसेना, पालपुर, चौसिंगा और हुसैनपुर में चार बच्चों समेत आठ लोग बुखार से पीड़ित हैं। उनका भी निजी चिकित्सकों से इलाज कराया गया है। महेंद्र और राहुल का कहना है कि बुखार का प्रकोप होने के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक नहीं पहुंचता। फार्मेसिस्ट ही मरीजों के इलाज की औपचारिकता पूरी करता है। इससे नाराज ग्रामीणों ने पिछले दिनों सीएमओ को शिकायत भी भेजी थी लेकिन अब तक गौर नहीं किया गया है।
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कुंवरगांव। क्षेत्र के गांव इमलिया में तेज बुखार से धर्मेंद्र की एक वर्षीय बेटी शिवानी की मंगलवार सुबह मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि कुछ दिन से शिवानी को बुखार आ रहा था। इलाज कराने के बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ ।
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डेंगू से एक और सराफ की मौत
म्याऊं। डेंगू से म्याऊं के एक और सराफा व्यापारी की मंगलवार को मौत हो गई। दो सप्ताह में चचेरे-तहेरे दो भाइयों की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
म्याऊं निवासी 28 वर्षीय अंकुर वर्मा को कई दिन पहले बुखार आया था। जांच कराने पर उसे डेंगू होने का पता चला। परिवार वाले उसे दिल्ली ले गए। वहां कई दिन एक निजी अस्पताल में इलाज चलने के बाद मंगलवार को उसने दम तोड़ दिया। दो सप्ताह पहले अंकुर के तहेरे भाई विष्णु वर्मा की मौत भी डेंगू से हो चुकी है।