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धड़ल्ले से जारी है ‘सफेद रेत’ का ‘काला धंधा’
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उझानी (बदायूं)। सफेद रेत का काला धंधा देखना है तो सुबह हाईवे पर चले आइये। बालू से लोडेड शायद ही ऐसी कोई ट्रैक्टर ट्रॉली नजर आए जो डाले से ऊपर तक भरी नहीं मिले। रास्ते में ऐसे वाहनों का पहिया पंक्चर होने से हाईवे पर जाम लग जाए या फिर ट्रॉलियां पलटें, लेकिन अफसरों को कुछ भी गलत नजर नहीं आता।
बालू खनन का प्वाइंट कादरचौक क्षेत्र में है। प्वाइंट पर खनन के तौर-तरीके ठेकेदार की नजर में भले ही वैध हों लेकिन एक बात तो साफ है कि ट्रैक्टर ट्रॉलियों और डंपरों में जिन मशीनों से बालू लोड किया जाता है, वह भारी-भरकम होती हैं। उनके जरिए डंपरों और ट्रॉलियों को डाले से ऊपर तक चाहे जहां तक लोड करवा लो लेकिन वाहन दमदार होना चाहिए। बताते हैं कि डंपर में करीब ढाई सौ और ट्रॉलियों में 180 क्विंटल तक ही बालू लोड होनी चाहिए। मार्केट में 180 क्विंटल बालू लोड ट्रॉली तीन से साढ़े तीन हजार रुपये और ओवरलोड ट्रॉली सात हजार रुपये तक मिलती है। ट्रैक्टरों में डीजल की खपत तो बराबर ही होती है लेकिन ओवरलोड माल बेचने में मुनाफा ज्यादा होता है। ट्रैक्टर मालिकों की मानें तो ओवरलोडिंग से फायदा है। ओवरलोडिंग नहीं होगी तो जमा खर्चे पर धंधा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके विपरीत बालू से ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रॉलियों से दिक्कत इसलिए ज्यादा है कि रास्ते में सड़क पर पहिया पंक्चर हो तो धंधेबाजों के लिए वाहन सड़क पर ही अनलोड करना पड़ता है। पहिया पंक्चर होने की स्थिति में ट्रॉली पलट जाए तो बराबर से गुजरने वाले वाहन का बच पाना मुश्किल है।
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दिसंबर में पकड़े गए थे ओवरलोड वाहन
करीब दो महीना पहले डीएम के आदेश पर पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने बालू लदे ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया था। उस समय एक ही रात में पुलिस और परिवहन अफसरों ने दो दर्जन से अधिक वाहनों को पकड़ा था। प्रत्येक पर करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना भी पड़ा। इसके बाद कुछ दिन तक इस धंधे पर अंकुश भी लगा लेकिन अब फिर से ओवरलोडिंग का खेल शुरू हो गया।
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बालू समेत अन्य चीजों से ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ पिछले दिनों भी कार्रवाई की गई। अब फिर से ट्रॉलियों में बालू की ओवरलोडिंग शुरू हो गई है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- सुहेल अहमद, एआरटीओ
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बालू खनन का प्वाइंट कादरचौक क्षेत्र में है। प्वाइंट पर खनन के तौर-तरीके ठेकेदार की नजर में भले ही वैध हों लेकिन एक बात तो साफ है कि ट्रैक्टर ट्रॉलियों और डंपरों में जिन मशीनों से बालू लोड किया जाता है, वह भारी-भरकम होती हैं। उनके जरिए डंपरों और ट्रॉलियों को डाले से ऊपर तक चाहे जहां तक लोड करवा लो लेकिन वाहन दमदार होना चाहिए। बताते हैं कि डंपर में करीब ढाई सौ और ट्रॉलियों में 180 क्विंटल तक ही बालू लोड होनी चाहिए। मार्केट में 180 क्विंटल बालू लोड ट्रॉली तीन से साढ़े तीन हजार रुपये और ओवरलोड ट्रॉली सात हजार रुपये तक मिलती है। ट्रैक्टरों में डीजल की खपत तो बराबर ही होती है लेकिन ओवरलोड माल बेचने में मुनाफा ज्यादा होता है। ट्रैक्टर मालिकों की मानें तो ओवरलोडिंग से फायदा है। ओवरलोडिंग नहीं होगी तो जमा खर्चे पर धंधा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके विपरीत बालू से ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रॉलियों से दिक्कत इसलिए ज्यादा है कि रास्ते में सड़क पर पहिया पंक्चर हो तो धंधेबाजों के लिए वाहन सड़क पर ही अनलोड करना पड़ता है। पहिया पंक्चर होने की स्थिति में ट्रॉली पलट जाए तो बराबर से गुजरने वाले वाहन का बच पाना मुश्किल है।
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दिसंबर में पकड़े गए थे ओवरलोड वाहन
करीब दो महीना पहले डीएम के आदेश पर पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने बालू लदे ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया था। उस समय एक ही रात में पुलिस और परिवहन अफसरों ने दो दर्जन से अधिक वाहनों को पकड़ा था। प्रत्येक पर करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना भी पड़ा। इसके बाद कुछ दिन तक इस धंधे पर अंकुश भी लगा लेकिन अब फिर से ओवरलोडिंग का खेल शुरू हो गया।
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बालू समेत अन्य चीजों से ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ पिछले दिनों भी कार्रवाई की गई। अब फिर से ट्रॉलियों में बालू की ओवरलोडिंग शुरू हो गई है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- सुहेल अहमद, एआरटीओ