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जिला जेल में रामलीला का मंचन
Updated Sat, 24 Nov 2018 07:59 PM IST
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बदायूं। जिला कारागार में दो अक्तूबर से शुरू हुआ रामलीला का अगला मंचन ‘सीता हरण’ शुक्रवार को किया गया। इसके दूसरे दिन यानि शनिवार को ‘सीता मैया’ की खोज में वानर सेना निकल पड़ी। पूरे दिन सीता मैया की खोज होती रही। शाम चार बजे हनुमान जी के दिशा निर्देशन में वानर सेना समुद्र तट पर पहुंच गई।
प्रत्येक त्योहार पर जिला कारागार में रामलीला का मंचन हो रहा है। इसकी शुरुआत दो अक्तूबर को हुई थी। उस दिन रामजन्म की लीला का मंचन हुआ था। उसके बाद हिरणाकश्यप वध, श्रवण कुमार मरण, राम वन गमन के मंचन किए गए जा चुके हैं। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सीता हरण का मंचन हुआ था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे से सीता मैया की खोज का मंचन शुरू किया गया। जो शाम करीब चार बजे तक चलता रहा। इस दौरान वानर सेना और हनुमान का स्वरूप धरे बंदियों ने मंचन करके जिला कारागार के बंदियों और जेल अधिकारियों का मन मोह लिया। 11 बजे शुरू हुई सीता मैया की खोज करते हुए हनुमान जी, नल-नल, अंगद और जामवंत के साथ वन में पहुंच गए। वे फल आदि खाते हुए आगे बढ़ रहे थे। बार-बार पुकार रहे थे कि सीता मैया कहां हो, आगे चलते-चलते समुद्र तट पर पहुंच गए, जहां उन्हें घायल अवस्था में गिद्ध मिला। उसी से जानकारी लेते हुए हनुमान और उनकी वानर सेना समुद्र तट पर डटी रही। इससे आगे का मंचन अगले त्योहार या किसी उपलक्ष्य पर किया जाएगा। एक तरफ जेल के बाहर लोग ककोड़ा मेले का आनंद ले रहे थे। वहीं जेल के बंदियों ने रामलीला का आनंद लिया।
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प्रत्येक त्योहार पर जिला कारागार में रामलीला का मंचन हो रहा है। इसकी शुरुआत दो अक्तूबर को हुई थी। उस दिन रामजन्म की लीला का मंचन हुआ था। उसके बाद हिरणाकश्यप वध, श्रवण कुमार मरण, राम वन गमन के मंचन किए गए जा चुके हैं। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सीता हरण का मंचन हुआ था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे से सीता मैया की खोज का मंचन शुरू किया गया। जो शाम करीब चार बजे तक चलता रहा। इस दौरान वानर सेना और हनुमान का स्वरूप धरे बंदियों ने मंचन करके जिला कारागार के बंदियों और जेल अधिकारियों का मन मोह लिया। 11 बजे शुरू हुई सीता मैया की खोज करते हुए हनुमान जी, नल-नल, अंगद और जामवंत के साथ वन में पहुंच गए। वे फल आदि खाते हुए आगे बढ़ रहे थे। बार-बार पुकार रहे थे कि सीता मैया कहां हो, आगे चलते-चलते समुद्र तट पर पहुंच गए, जहां उन्हें घायल अवस्था में गिद्ध मिला। उसी से जानकारी लेते हुए हनुमान और उनकी वानर सेना समुद्र तट पर डटी रही। इससे आगे का मंचन अगले त्योहार या किसी उपलक्ष्य पर किया जाएगा। एक तरफ जेल के बाहर लोग ककोड़ा मेले का आनंद ले रहे थे। वहीं जेल के बंदियों ने रामलीला का आनंद लिया।
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