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आलू की फसल को पछेती झुलसा से खतरा, आया अलर्ट
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उझानी (बदायूं)। पिछले कुछ सप्ताह से मौसम में बार-बार बदलाव से सब्जियों के राजा आलू पर संकट बरकरार है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम की यूनिट के वैज्ञानिकों ने इंडो ब्लाइट कास्ट (पैन इंडिया मॉडल) से इसके पूर्वानुमान पर जो अलर्ट जारी किया है, उसके मुताबिक आलू की फसल में पछेती झुलसा फैल सकता है। इसका प्रकोप पश्चिमी उत्तरप्रदेश में ज्यादा रहेगा।
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने अलर्ट के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आलू की फसल के पछेती झुलसा की चपेट में आने की आशंका जताई गई है। कभी बूंदाबांदी से नमी का माहौल तो कभी तापमान में वृद्धि से आलू की फसल को पछेती झुलसा नुकसान पहुंचाएगा। पछेती झुलसा आलू की फसल को उस समय प्रभावित करता है जब फसल में दाना बढ़वार की ओर होता है। पत्तियों को झुलसाकर यह बीमारी पौधे की तने को भी चपेट में ले लेती है। सभी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारियों को जारी दिशा-निर्देश में स्पष्ट कर दिया गया है कि फसल को बचाने के लिए सबसे पहले किसानों को जरूरी उपाय बताए जाएं।
बता दें कि बारिश की वजह से सब्जियों के राजा पर पहले से ही संकट रहा है। आलू की अगेती फसल तो ठीकठाक रही थी। हालांकि अगेती फसल का रकबा करीब 30 फीसदी था लेकिन बाकी बचे 70 फीसदी रकबा की फसल पछेती झुलसा की चपेट में आई तो किसानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। इसी के चलते आलू की फसल को पछेती झुलसा से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम भी शुरू करने होंगे।
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बचाव में फफूंदीनाशक का ऐसे करें इस्तेमाल
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक, जिस खेत में आलू की फसल में अभी पछेती झुलसा का प्रकोप नजर नहीं आ रहा है, उसके लिए आवश्यक है कि फफूंदीनाशक मैनकोजेब/ प्रोपीनेब/ क्लोरोथेलोनील युक्त दवा को 0.2-0.25 प्रतिशत की दर से या दो-ढाई किलोग्राम को एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव किया जाए। आलू की फसल में जहां पछेती झुलसा फैल चुका है, उसमें साईमोक्रोनिल और मैन्कोजेब तीन किलोग्राम की दर से प्रति हेक्टेयर या फेनोमिडोन और मैन्कोजेब तीन किलोग्राम की दर से प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करने से फसल को बीमारी से बचाया जा सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चार मंडलों में खतरा ज्यादा
इंडो ब्लाइट कास्ट से पूर्वानुमान के अनुसार-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद और मेरठ मंडल के सभी जिलों में आलू की फसल को पछेती झुलसा नुकसान पहुंचा सकता है। इन चारों मंडल में 18 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा) को विशेष रूप से सजग रहने को कहा गया है। आलू उत्पादक चाहें तो प्रभावित पौधों को दिखाकर भी कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श कर सकते हैं।
स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र को भी केंद्रीय अनुसंधान संस्थान का अलर्ट मिल चुका है। आलू उत्पादकों को समय रहते सजग रहना होगा। अलर्ट के बाद हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा)
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केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने अलर्ट के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आलू की फसल के पछेती झुलसा की चपेट में आने की आशंका जताई गई है। कभी बूंदाबांदी से नमी का माहौल तो कभी तापमान में वृद्धि से आलू की फसल को पछेती झुलसा नुकसान पहुंचाएगा। पछेती झुलसा आलू की फसल को उस समय प्रभावित करता है जब फसल में दाना बढ़वार की ओर होता है। पत्तियों को झुलसाकर यह बीमारी पौधे की तने को भी चपेट में ले लेती है। सभी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारियों को जारी दिशा-निर्देश में स्पष्ट कर दिया गया है कि फसल को बचाने के लिए सबसे पहले किसानों को जरूरी उपाय बताए जाएं।
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बता दें कि बारिश की वजह से सब्जियों के राजा पर पहले से ही संकट रहा है। आलू की अगेती फसल तो ठीकठाक रही थी। हालांकि अगेती फसल का रकबा करीब 30 फीसदी था लेकिन बाकी बचे 70 फीसदी रकबा की फसल पछेती झुलसा की चपेट में आई तो किसानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। इसी के चलते आलू की फसल को पछेती झुलसा से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम भी शुरू करने होंगे।
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बचाव में फफूंदीनाशक का ऐसे करें इस्तेमाल
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक, जिस खेत में आलू की फसल में अभी पछेती झुलसा का प्रकोप नजर नहीं आ रहा है, उसके लिए आवश्यक है कि फफूंदीनाशक मैनकोजेब/ प्रोपीनेब/ क्लोरोथेलोनील युक्त दवा को 0.2-0.25 प्रतिशत की दर से या दो-ढाई किलोग्राम को एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव किया जाए। आलू की फसल में जहां पछेती झुलसा फैल चुका है, उसमें साईमोक्रोनिल और मैन्कोजेब तीन किलोग्राम की दर से प्रति हेक्टेयर या फेनोमिडोन और मैन्कोजेब तीन किलोग्राम की दर से प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करने से फसल को बीमारी से बचाया जा सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चार मंडलों में खतरा ज्यादा
इंडो ब्लाइट कास्ट से पूर्वानुमान के अनुसार-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद और मेरठ मंडल के सभी जिलों में आलू की फसल को पछेती झुलसा नुकसान पहुंचा सकता है। इन चारों मंडल में 18 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा) को विशेष रूप से सजग रहने को कहा गया है। आलू उत्पादक चाहें तो प्रभावित पौधों को दिखाकर भी कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श कर सकते हैं।
स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र को भी केंद्रीय अनुसंधान संस्थान का अलर्ट मिल चुका है। आलू उत्पादकों को समय रहते सजग रहना होगा। अलर्ट के बाद हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा)