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कुएं में गिरा मजदूर हार गया जिंदगी की जंग
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:19 AM IST
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विलाप करते परिवार वाले।
- फोटो : अमर उजाला
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उसावां (बदायूं)। मरम्मत के दौरान कएं में गिरे मजदूर ने दम तोड़ दिया। उसे बाहर निकालने की मशक्कत में करीब आधा घंटा लग गया, इस बीच उसकी सांसों की डोर थम गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
सोमवार को थाना क्षेत्र के गांव असधरमई निवासी पातीराम राठौर (50) पुत्र मिश्रीलाल गांव के ही ठाकुर विशनपाल सिंह के निजी नलकूप पर मजदूरी करने गया था। उसे नलकूप में कुएं के ऊपर की कोठरी की पुरानी छत हटाने का काम दिया गया था। साथ में दूसरा मजदूर संतोष भी था। छत पर लगी पत्थर की पटिया हटाते समय असावधानीवश पटिया के साथ पातीराम भी धड़ाम से 40 फुट गहरे कुएं में गिर गया। इसके साथ ही संतोष चिल्लाकर नीचे उतर आया। उसने शोर मचाया तो आसपास खेतों में काम कर रहे किसान इधर भाग पड़े। शोर मचा तो गांव से भी लोग आ गए। हिम्मत करके गयाराम नाम के किसान ने नलकूप की कोठरी के ऊपरी हिस्से में रस्सी बांधी और नीचे उतर गया। वह पातीराम को निकाल लाया। हालांकि बाहर आने से पहले ही उसकी सांसें थम चुकी थीं। बाद में गांव के डॉक्टर ने भी मौत की पुष्टि कर दी। इस बीच पातीराम के परिवारवाले भी आ गए। ग्रामीणों की सूचना पर थानाध्यक्ष हरिभान सिंह राठौर भी मौके पर पहुंच गए। तहसील प्रशासन की ओर से आए लेखपाल ने भी घटना के संबंध में लोगों से जानकारी ली। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया।
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मजदूरी करते गुजर गई जिंदगी
म्याऊ। पातीराम बड़े परिवार के मुखिया था। परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। उनके नाम कुल चार बीघा जमीन है। इसी के सहारे तीन बेटे और चार बेटियों को पाला पोसा। इनमें दो बेटे और दो बेटियों की शादी कर चुके थे। गांव वालों को उनकी मौत का बड़ा अफसोस है।
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लीवर फटने से हुई मौत
बदायूं। पातीराम काफी ऊंचाई से सूखे कुएं में गिरे थे। इससे उनका लीवर फट गया और उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की यही वजह दिखाई गई है। वैसे शरीर की कुछ पसलियां टूटने का भी जिक्र रिपोर्ट में है।
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सोमवार को थाना क्षेत्र के गांव असधरमई निवासी पातीराम राठौर (50) पुत्र मिश्रीलाल गांव के ही ठाकुर विशनपाल सिंह के निजी नलकूप पर मजदूरी करने गया था। उसे नलकूप में कुएं के ऊपर की कोठरी की पुरानी छत हटाने का काम दिया गया था। साथ में दूसरा मजदूर संतोष भी था। छत पर लगी पत्थर की पटिया हटाते समय असावधानीवश पटिया के साथ पातीराम भी धड़ाम से 40 फुट गहरे कुएं में गिर गया। इसके साथ ही संतोष चिल्लाकर नीचे उतर आया। उसने शोर मचाया तो आसपास खेतों में काम कर रहे किसान इधर भाग पड़े। शोर मचा तो गांव से भी लोग आ गए। हिम्मत करके गयाराम नाम के किसान ने नलकूप की कोठरी के ऊपरी हिस्से में रस्सी बांधी और नीचे उतर गया। वह पातीराम को निकाल लाया। हालांकि बाहर आने से पहले ही उसकी सांसें थम चुकी थीं। बाद में गांव के डॉक्टर ने भी मौत की पुष्टि कर दी। इस बीच पातीराम के परिवारवाले भी आ गए। ग्रामीणों की सूचना पर थानाध्यक्ष हरिभान सिंह राठौर भी मौके पर पहुंच गए। तहसील प्रशासन की ओर से आए लेखपाल ने भी घटना के संबंध में लोगों से जानकारी ली। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया।
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मजदूरी करते गुजर गई जिंदगी
म्याऊ। पातीराम बड़े परिवार के मुखिया था। परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। उनके नाम कुल चार बीघा जमीन है। इसी के सहारे तीन बेटे और चार बेटियों को पाला पोसा। इनमें दो बेटे और दो बेटियों की शादी कर चुके थे। गांव वालों को उनकी मौत का बड़ा अफसोस है।
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लीवर फटने से हुई मौत
बदायूं। पातीराम काफी ऊंचाई से सूखे कुएं में गिरे थे। इससे उनका लीवर फट गया और उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की यही वजह दिखाई गई है। वैसे शरीर की कुछ पसलियां टूटने का भी जिक्र रिपोर्ट में है।