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बदायूं के 113 दानियों ने किया महादान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Fri, 15 Jun 2018 12:33 AM IST
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विश्व रक्तदान दिवस पर गुरुवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बदायूं में दो शिविर लगाए गए, जिनमें कुल 113 लोगों ने स्वेच्छा से महादान किया। एक शिविर जिला अस्पताल ब्लड बैंक में लगा, जिसमें 22 लोगों ने महादान किया। दूसरा शिविर उझानी स्थित भगवानदास पैलेस में लगा, जिसमें गूंज सामाजिक संस्था और श्री ब्राह्मण सभा का सहयोग रहा। यहां की 91 दानियों ने महादान किया।
उझानी के भगवान दास पैलेस में स्वेच्छिक रक्तदान शिविर सुबह नौ बजे शुरू हुआ। इसका उद्घाटन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने किया। उन्होंने इस महान कार्य की मुहिम को परवान चढ़ाने में अमर उजाला फाउंडेशन और सामाजिक संस्था गूंज के पदाधिकारियों की तारीफ की। रक्तदाताओं से मिलकर जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने में सहयोग करने को प्रेरित किया। डीएम ने महादानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र भी दिए। यहां शिविर अपराह्न तीन बजे तक चला। इस दौरान 91 महादानियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इनमें लड़कियां, महिलाएं, सरकारी कर्मचारी, कई संस्थाओं के सदस्य, शिक्षक, श्री ब्राह्मण सभा और गूंज संस्था के पदाधिकारी शामिल रहे। रक्तदान शिविर को सफल बनाने में बरेली के मिशन अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों का विशेष रहा। शिविर में अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोगी बने गूंज संस्था के प्रबंधक राजन मेहंदीरत्ता और श्री ब्राह्मण सभा अध्यक्ष किशनचंद्र शर्मा ने बताया कि अब तक लगे रक्तदान शिविरों में इस बार महादानियों की संख्या सर्वाधिक रही है।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर सुबह दस बजे शुरू हुआ। उद्घाटन सीएमओ डॉ. आसाराम और डॉ. आरएस यादव ने किया। यहां शिविर अपराह्न साढ़े तीन बजे तक चला। इस दौरान 22 लोगों ने महादान किया। इनमें पति-पत्नी, व्यापारी और सामाजिक संगठन के लोग शामिल रहे। इन सभी दानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र दिए गए। शिविर को सफल बनाने में वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन डीके शुक्ला, स्टाफ नर्स मीना सिंह, फार्मासिस्ट शिवम रस्तोगी, लैब अटेंडेंट सुगरपाल और गंगा सिंह का सहयोग रहा।
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पिता-पुत्र ने किया रक्तदान
उझानी। भगवान दास पैलेस में गूंज के अध्यक्ष राजन मेहंदीरत्ता और उनके बेटे बुलंद मेहंदीरत्ता ने रक्तदान किया। बुलंद ने पहली बार रक्तदान किया। इसी तरह पंजाबी कॉलोनी के ओमप्रकाश अदलक्खा और उनके बेटे समय अदलक्खा ने भी महादान किया। व्यापारी उदित गोयल और उनकी बेटी ने रक्तदान किया। सर्वाधिक 40 बार रक्तदान करने वाले समाजसेवी अनुराग धींगड़ा और उनकी पत्नी मोना भी महादान में शामिल हुए। समाजसेवी स्वप्निल वर्मा ने 31 वीं बार रक्तदान किया। जबकि रोहन शर्मा पांचवी बार महादान के सहभागी बने।
क्या बोले रक्तदाता
अनुराग धींगड़ा ने कहा कि रक्तदान करने से जिस चैन की अनुभूति होती है, वह दौलत से हासिल नहीं हो सकती। जब भी उन्हें किसी शिविर का पता लगता है, सहूलियत के अनुसार महादान में हिस्सा लेते रहे हैं। इससे जरूरतमंद को जीवन मिल जाता है।
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अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान के तारीफ करते हुए रोहन शर्मा ने बताया कि वह पहले रक्तदान कर चुके हैं। उन्हें इसकी प्रेरणा पिता किशनचंद्र शर्मा से मिली। बोले- आगे भी रक्तदान करता रहूंगा।
सोशल वर्कर स्वप्निल वर्मा का कहना है कि रक्तदान करने का महत्व उन्हें तब पता लगा जब एक बेसहारा को खून की जरूरत पड़ी। उसी दिन ठान लिया कि रक्तदान से पीछे नहीं हटेंगे। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। उन्होंने दोस्तों को इसके लिए प्रेरित किया है।
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महादान करने के लिए पहली बार शिविर में पहुंची समाजसेवी प्रवेश शर्मा की बेटी कविता ने बताया कि वह भी इंसानियत के नाते कुछ ऐसा करना चाहती हैं जो लोगों के काम आए। रक्तदान इसमें सबसे ऊपर है। इसके लिए लड़कियों और महिलाओं को भी आगे आना चाहिए।
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ध्रुव ने 20 वीं बार किया महादान
बदायूं। युवा मंच संगठन के ध्रुव देव गुप्ता ने गुरुवार को अमर उजाला फाउंडेशन के शिविर में 20वीं बार स्वेच्छा से रक्तदान किया। वह कहते हैं कि रक्तदान करने से खुद के शरीर पर कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी दूसरे की जिंदगी बच जाती है।
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दंपति ने किया रक्तदान
बदायूं। साहूकारा निवासी ज्वैलर्स सचिन गुप्ता और उनकी पत्नी जूली गुप्ता पिछले 15 सालों से रक्तदान करते रहे हैं। वे अब तक 30 या 35 बार रक्तदान कर चुके हैं। जूली कहती हैं कि ज्यादातर महिलाएं रक्तदान करने से बचती हैं यह गलत है।
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हर बार बनते हैं पहले महादानी
बदायूं। रजिस्ट्री कार्यालय कर्मचारी उमेश चंद्र कश्यप अमर उजाला फाउंडेशन के हर शिविर में स्वेच्छा से रक्तदान करते है। वह हर बार सबसे पहले रक्तदाता बनने का गौरव हासिल करते हैं। इस बार भी उन्होंने सबसे पहले जिला अस्पताल ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान किया।
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उझानी के भगवान दास पैलेस में स्वेच्छिक रक्तदान शिविर सुबह नौ बजे शुरू हुआ। इसका उद्घाटन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने किया। उन्होंने इस महान कार्य की मुहिम को परवान चढ़ाने में अमर उजाला फाउंडेशन और सामाजिक संस्था गूंज के पदाधिकारियों की तारीफ की। रक्तदाताओं से मिलकर जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने में सहयोग करने को प्रेरित किया। डीएम ने महादानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र भी दिए। यहां शिविर अपराह्न तीन बजे तक चला। इस दौरान 91 महादानियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इनमें लड़कियां, महिलाएं, सरकारी कर्मचारी, कई संस्थाओं के सदस्य, शिक्षक, श्री ब्राह्मण सभा और गूंज संस्था के पदाधिकारी शामिल रहे। रक्तदान शिविर को सफल बनाने में बरेली के मिशन अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों का विशेष रहा। शिविर में अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोगी बने गूंज संस्था के प्रबंधक राजन मेहंदीरत्ता और श्री ब्राह्मण सभा अध्यक्ष किशनचंद्र शर्मा ने बताया कि अब तक लगे रक्तदान शिविरों में इस बार महादानियों की संख्या सर्वाधिक रही है।
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जिला अस्पताल ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर सुबह दस बजे शुरू हुआ। उद्घाटन सीएमओ डॉ. आसाराम और डॉ. आरएस यादव ने किया। यहां शिविर अपराह्न साढ़े तीन बजे तक चला। इस दौरान 22 लोगों ने महादान किया। इनमें पति-पत्नी, व्यापारी और सामाजिक संगठन के लोग शामिल रहे। इन सभी दानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र दिए गए। शिविर को सफल बनाने में वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन डीके शुक्ला, स्टाफ नर्स मीना सिंह, फार्मासिस्ट शिवम रस्तोगी, लैब अटेंडेंट सुगरपाल और गंगा सिंह का सहयोग रहा।
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पिता-पुत्र ने किया रक्तदान
उझानी। भगवान दास पैलेस में गूंज के अध्यक्ष राजन मेहंदीरत्ता और उनके बेटे बुलंद मेहंदीरत्ता ने रक्तदान किया। बुलंद ने पहली बार रक्तदान किया। इसी तरह पंजाबी कॉलोनी के ओमप्रकाश अदलक्खा और उनके बेटे समय अदलक्खा ने भी महादान किया। व्यापारी उदित गोयल और उनकी बेटी ने रक्तदान किया। सर्वाधिक 40 बार रक्तदान करने वाले समाजसेवी अनुराग धींगड़ा और उनकी पत्नी मोना भी महादान में शामिल हुए। समाजसेवी स्वप्निल वर्मा ने 31 वीं बार रक्तदान किया। जबकि रोहन शर्मा पांचवी बार महादान के सहभागी बने।
क्या बोले रक्तदाता
अनुराग धींगड़ा ने कहा कि रक्तदान करने से जिस चैन की अनुभूति होती है, वह दौलत से हासिल नहीं हो सकती। जब भी उन्हें किसी शिविर का पता लगता है, सहूलियत के अनुसार महादान में हिस्सा लेते रहे हैं। इससे जरूरतमंद को जीवन मिल जाता है।
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अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान के तारीफ करते हुए रोहन शर्मा ने बताया कि वह पहले रक्तदान कर चुके हैं। उन्हें इसकी प्रेरणा पिता किशनचंद्र शर्मा से मिली। बोले- आगे भी रक्तदान करता रहूंगा।
सोशल वर्कर स्वप्निल वर्मा का कहना है कि रक्तदान करने का महत्व उन्हें तब पता लगा जब एक बेसहारा को खून की जरूरत पड़ी। उसी दिन ठान लिया कि रक्तदान से पीछे नहीं हटेंगे। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। उन्होंने दोस्तों को इसके लिए प्रेरित किया है।
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महादान करने के लिए पहली बार शिविर में पहुंची समाजसेवी प्रवेश शर्मा की बेटी कविता ने बताया कि वह भी इंसानियत के नाते कुछ ऐसा करना चाहती हैं जो लोगों के काम आए। रक्तदान इसमें सबसे ऊपर है। इसके लिए लड़कियों और महिलाओं को भी आगे आना चाहिए।
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ध्रुव ने 20 वीं बार किया महादान
बदायूं। युवा मंच संगठन के ध्रुव देव गुप्ता ने गुरुवार को अमर उजाला फाउंडेशन के शिविर में 20वीं बार स्वेच्छा से रक्तदान किया। वह कहते हैं कि रक्तदान करने से खुद के शरीर पर कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी दूसरे की जिंदगी बच जाती है।
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दंपति ने किया रक्तदान
बदायूं। साहूकारा निवासी ज्वैलर्स सचिन गुप्ता और उनकी पत्नी जूली गुप्ता पिछले 15 सालों से रक्तदान करते रहे हैं। वे अब तक 30 या 35 बार रक्तदान कर चुके हैं। जूली कहती हैं कि ज्यादातर महिलाएं रक्तदान करने से बचती हैं यह गलत है।
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हर बार बनते हैं पहले महादानी
बदायूं। रजिस्ट्री कार्यालय कर्मचारी उमेश चंद्र कश्यप अमर उजाला फाउंडेशन के हर शिविर में स्वेच्छा से रक्तदान करते है। वह हर बार सबसे पहले रक्तदाता बनने का गौरव हासिल करते हैं। इस बार भी उन्होंने सबसे पहले जिला अस्पताल ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान किया।