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हरियाणा-पंजाब की प्रजातियों का गेहूं करेगा किसानों को मालामाल

Sun, 10 Dec 2017 07:08 PM IST
Updated Sun, 10 Dec 2017 07:08 PM IST
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हरियाणा-पंजाब की प्रजातियों का गेहूं करेगा किसानों को मालामाल
wheat - फोटो : amar ujala
मौसम भी गेहूं की फसल के अनुकूल, प्रति हेक्टेयर 50 क्विंटल उपज का अनुमान
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पिछेती गेहूं की बुआई के लिए कानपुर की उन्नत हलना प्रजाति रहेगी बेहतर

उझानी (बदायूं)।
पिछले दो-तीन साल से खेती के जरिए मंदी की मार झेल रहे किसानों के लिए गेहूं की फसल इस बार खुशियों की सौगात लेकर आनी वाली है। गेहूं उत्पादकों ने देसी वैरायटी के मुकाबले जिस तरह से दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की प्रमाणित प्रजातियों के बीज को बोया है, वह बंपर पैदावार दे चुका है। बदायूं ही नहीं बल्कि पूरे रुहेलखंड की कृषि योग्य भूमि इन प्रजातियों के लिए मुफीद मानी गई है। मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा तो पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की गेहूं की प्रजातियां किसानों को मालामाल कर देंगी।
हरियाणा और पंजाब के गेहूं की नई प्रजातियों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने भी पूरे रुहेलखंड की जमीन को बेहतर माना था। कुछेक प्रजातियों को पिछले सालों में ट्रॉयल भी शानदार रहा। हरियाणा की अगेती (अरली) गेहूं की प्रजाति में एचडी डब्ल्यू- 386 और डब्ल्यू एच- 711 और 1105, पंजाब की प्रजातियों में पीवी डब्ल्यू- 550 तो दिल्ली से पहुंची गेहूं की प्रजाति डीवी डब्ल्यू- 17 की पैदावार पर गौर करें तो इन सभी प्रजातियों के गेहूं से उपज 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुई है। पिछेती (देर में) बोये जाने वाले गेहूं की प्रजातियों में दिल्ली की डब्ल्यू एच-1124 और पंजाब की प्रजाति पीवी डब्ल्यू- 373 और 226 अच्छी पैदावार के लिए मुफीद रहेगी। पीवी डब्ल्यू-226 प्रजाति के गेहूं की रोटी भी जायकेदार होती है। इसी को देखते हुए अब तक 60 फीसदी किसान गेहूं की फसल बो चुके हैं।
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इस बार पिछेती प्रजाति में कानपुर की उन्नत हलना प्रजाति की ओर जिले के किसानों ने रुख किया है। पूसा गोल्ड प्रजाति पहले से ही इलाके में पैर जमा चुकी है। पिछेती प्रजातियों की फसल हालांकि कम दिनों में पककर तैयार हो जाती है, लेकिन पैदावार 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से ज्यादा नहीं आती। इसके विपरीत अगेती प्रजातियों के गेहूं को पकने में करीब 140 दिन मिल जाते हैं, सो पैदावार अधिक रहती है। वैसे भी, इन प्रजातियों की अच्छी पैदावार के लिए मौसम भी अच्छे संकेत दे रहा है। अगेती प्रजातियों के गेहूं की बुुआई के दिनों में जिस तरह से तापमान सामान्य रहा, अब तापमान में गिरावट पौधों की बढ़वार में सहायक रहेगी।
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जनवरी के पहले सप्ताह बोए पूसा गोल्ड और हलना उन्नत
उझानी। गेहूं की पिछेती प्रजातियों की बुआई के लिए ज्यादातर किसानों आलू की अगेती फसल लेने के बाद तवज्जो देते हैं। दिसंबर के अंतिम और जनवरी के पहले सप्ताह में भी पूसा गोल्ड और कानपुर की प्रजाति हलना उन्नत की बुआई की जा सकती है। इन दोनों प्रजातियों के लिए मौसम में नमी होनी चाहिए, जो इस वक्त बनी हुई है।


किसानों ने इस बार नई प्रजातियों के गेहूं की ओर रुख किया है। इसकी एक वजह यह भी है कि किसानों को वैज्ञानिक स्तर से खेती की जानकारियां भी समय रहते मुहैया कराई जा रही हैं। किसान भी उन्हीं प्रजातियों को ज्यादा पसंद करते हैं जिनसे पैदावार ज्यादा हो। आने वाले दिनों में इसका लाभ भी मिलेगा।
- डॉ. अर्जुन सिंह, गेहूं विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र
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