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स्कूल में बच्चियां भी खुले में शौच को मजबूर
Updated Fri, 01 Sep 2017 05:27 PM IST
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उझानी (बदायूं)।
ब्लॉक क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां शौचालय नहीं हैं। जिन स्कूलों में शौचालय बने हैं वे खस्ताहाल हैं। इस वजह से स्कूल की शिक्षिकाओं के साथ ही छात्राओं को भी शर्मसार होना पड़ता है। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालयों के शौचालयों की दशा को लेकर अफसरों को भी हकीकत का पता है। शौचालय सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हैं लेकिन उनकी मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो सब खस्ताहाल हैं। कुछ एक विद्यालयों में शौचालय की हालत ठीक है तो उनके अंदर पानी की व्यवस्था नहीं है। कुडानरसिंहपुर के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय तो ठीक दिखा लेकिन सीट की स्थिति बहुत खराब थी। छतुइया, फुलासी और जजपुरा के प्राथमिक विद्यालय में भी हालात ठीक नहीं है। ग्रामीणों की मानें तो बच्चे यूं ही खुले में शौच को नहीं जाते बल्कि उन्हें मजबूरी में खुले में जाना पड़ता है। किलाखेड़ा मोहल्ले के मालवीय प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर आर्येंद्र कुमार कहते हैं कि शौचालय ठीक कराने को उन्होंने तीन साल पहले अफसरों को पत्र लिखा, लेकिन अब तक शौचालय की मरम्मत के लिए बजट नहीं आया।
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फोटो- 01बीडीएनयूजेएचपीएच-03
पड़ोस के घर का शौचालय इस्तेमाल करतीं हैं शिक्षिकाएं
गंगोरा प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या 127 है। शुक्रवार को 83 बच्चे ही स्कूल पहुंचे, लेकिन विद्यालय पहुंचने पर बच्चे शौचालय के बाहर टायलेट करते नजर आए। स्कूल के छात्र को इधर उधर जाकर काम चला लेते हैं, लेकिन दिक्कत तो छात्राओं के सामने है। शिक्षिका निशा श्रीवास्तव ने बताया कि क्या करें, शौच और टॉयलेट दिनचर्या का हिस्सा है। मजबूरी में स्कूल तीनों शिक्षिकाओं को पड़ोसी के घर शरण लेनी पड़ती है।
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फोटो- 01 बीडीएनयूजेएचपीएच-04
चार स्कूलों पर एक शौचालय
देहात की छोड़िए, किलाखेड़ा मोहल्ले में एक कैंपस में संचालित चार प्राथमिक विद्यालयों के इकलौते शौचालय की दशा देखकर तो यही लगा कि इनके बच्चों को तो अजीब परेशानी का सामना करना पड़ता होगा। कैंपस में महापुरुष पंडित मदनमोहन मालवीय, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, रवींद्रनाथ टैगोर और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर प्राथमिक विद्यालय हैं। चारों में तीन सौ 90 बच्चे पंजीकृत हैं। नेहरू प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर सुमित कुमार ने बताया कि दिक्कत बहुत बड़ी है। समाधान न जाने कब हो पाएगा।
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ब्लॉक क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां शौचालय नहीं हैं। जिन स्कूलों में शौचालय बने हैं वे खस्ताहाल हैं। इस वजह से स्कूल की शिक्षिकाओं के साथ ही छात्राओं को भी शर्मसार होना पड़ता है। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालयों के शौचालयों की दशा को लेकर अफसरों को भी हकीकत का पता है। शौचालय सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हैं लेकिन उनकी मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो सब खस्ताहाल हैं। कुछ एक विद्यालयों में शौचालय की हालत ठीक है तो उनके अंदर पानी की व्यवस्था नहीं है। कुडानरसिंहपुर के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय तो ठीक दिखा लेकिन सीट की स्थिति बहुत खराब थी। छतुइया, फुलासी और जजपुरा के प्राथमिक विद्यालय में भी हालात ठीक नहीं है। ग्रामीणों की मानें तो बच्चे यूं ही खुले में शौच को नहीं जाते बल्कि उन्हें मजबूरी में खुले में जाना पड़ता है। किलाखेड़ा मोहल्ले के मालवीय प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर आर्येंद्र कुमार कहते हैं कि शौचालय ठीक कराने को उन्होंने तीन साल पहले अफसरों को पत्र लिखा, लेकिन अब तक शौचालय की मरम्मत के लिए बजट नहीं आया।
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फोटो- 01बीडीएनयूजेएचपीएच-03
पड़ोस के घर का शौचालय इस्तेमाल करतीं हैं शिक्षिकाएं
गंगोरा प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या 127 है। शुक्रवार को 83 बच्चे ही स्कूल पहुंचे, लेकिन विद्यालय पहुंचने पर बच्चे शौचालय के बाहर टायलेट करते नजर आए। स्कूल के छात्र को इधर उधर जाकर काम चला लेते हैं, लेकिन दिक्कत तो छात्राओं के सामने है। शिक्षिका निशा श्रीवास्तव ने बताया कि क्या करें, शौच और टॉयलेट दिनचर्या का हिस्सा है। मजबूरी में स्कूल तीनों शिक्षिकाओं को पड़ोसी के घर शरण लेनी पड़ती है।
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फोटो- 01 बीडीएनयूजेएचपीएच-04
चार स्कूलों पर एक शौचालय
देहात की छोड़िए, किलाखेड़ा मोहल्ले में एक कैंपस में संचालित चार प्राथमिक विद्यालयों के इकलौते शौचालय की दशा देखकर तो यही लगा कि इनके बच्चों को तो अजीब परेशानी का सामना करना पड़ता होगा। कैंपस में महापुरुष पंडित मदनमोहन मालवीय, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, रवींद्रनाथ टैगोर और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर प्राथमिक विद्यालय हैं। चारों में तीन सौ 90 बच्चे पंजीकृत हैं। नेहरू प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर सुमित कुमार ने बताया कि दिक्कत बहुत बड़ी है। समाधान न जाने कब हो पाएगा।