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बिजली वालों ने तो चकरघिन्नी बना दिया
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:13 AM IST
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बिजली
- फोटो : FILE PHOTO
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बदायूं। बिजली बिलिंग और वसूली जैसा महत्वपूर्ण काम निजी एजेंसी के हाथों में होने का साइड इफेक्ट उपभोक्ताओं को झेलना पड़ रहा है। गड़बड़ बिलों को सुधरवाने के लिए वे विभागीय कार्यालय के चक्कर लगा लगाकर एड़ी घिस चुके हैं पर समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। उन्हें लगातार आश्वासन मिलता है पर हकीकत में कुछ भला नहीं होता। कई लोग तो तीन साल से एक ही बिल लिए घूम रहे हैं पर उसे न तो दुरुस्त किया जा रहा है और न ही उपभोक्ता को संतुष्ट करने के लिए कोई कवायद की जा रही है। उपभोक्ता के कोई शिकायत करने पर अधिकारी उन्हें कर्मचारी के पास भेज देते हैं तो कर्मचारी इसे अपने से उच्चस्तर का काम बताकर दोबारा अधिकारी के ही पास जाने को कहता है। गुरुवार को अमर उजाला टीम ने उसावां रोड स्थित विभागीय कार्यालय पर परेशान बैठे उपभोक्ताओं से बात की तो उनके दिल का दर्द जुबां पर आ गया।
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बंद मकान में एक लाख से ज्यादा का बिल
शहर की ढाक वाली ज्यारत निवासी कुसुम परिवार के साथ नोएडा में रहती हैं। उनका मकान बंद रहता है। साल में एकाध बार परिवार त्योहार पर ही यहां आता है। बताया कि करीब साल भर पहले उनका मीटर जल गया। जून में छुट्टी बिताने वह लोग घर आए तो इसका पता लगा। बिजली बिल भी करीब पचास हजार बकाया था। उन्होंने एप्लीकेशन देकर नया मीटर लगवा लिया। इसके बाद फिर नोएडा चले गए। अब एक लाख रुपये के करीब का बिल उन पर बकाया दिखाया जा रहा है।
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बिल हमने जमा किया, रसीद काटी किसी और की
उसावां के गांव नगरिया भूरीपुर निवासी सर्वेंद्र सिंह तीन साल से कई बार विभाग के चक्कर काट चुके हैं। उन्होंने बताया कि तीन अक्तूबर 2011 को सखानू कस्बे में बैठे जेई ने 8940 रुपये लेकर उनके नलकूप के बकाया बिल की रसीद काटी थी। बिल में से यह धनराशि नहीं घटी तो पता लगा कि रसीद किसी मीरा नाम की महिला के नाम काट दी गई है। विभाग को अपनी गलती पता है पर सुधारने की कोई पहल नहीं हो रही।
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एक साल पहले जो जमा किया वो आज भी बकाया
डहरपुर निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि उनका चार किलोवाट का कामर्शियल कनेक्शन है। एक साल पहले उन्होंने बारह हजार रुपये जमा किए थे। आज तक यह राशि बकाया में ही दिखाई जा रही है। जिससे कहो वह दूसरे काउंटर पर भेज देता है।
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हमने बिल चुकता किया पर नहीं दे रहे एनओसी
समरेर के बौरा गांव निवासी राजेंद्र ने बताया कि उनके पिता नत्थू के नाम से कनेक्शन है। बकाया के आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर हो गई थी। अब उन्होंने पूरा बिल चुकता कर दिया है। विभाग ने भी बकाया बैलेंस न होने की रसीद दी है। बावजूद यह कहकर एनओसी नहीं दी जा रही कि नत्थू नाम से ही एक और बिल बकाया शो कर रहा है। वह लोग परेशान हैं, बिना विभागीय लिखापढ़ी के उनके नाम हुई रिपोर्ट खारिज नहीं होगी।
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एक दिसंबर से नई एजेंसी करेगी बिलिंग
बिलिंग और भुगतान को लेकर शासन स्तर पर बहुत शिकायतें पहुंच रही थीं। इस वजह से विभाग ने मौजूदा एजेंसी से काम हटाने का निर्णय लिया है। एक दिसंबर से शाही कम्प्यूटर्स नाम की एजेंसी बिलिंग की जिम्मेदारी उठाएगी। इस क्षेत्र में यह एजेंसी अच्छा काम कर रही थी जिसकी वजह से लखनऊ से ही उसे कांट्रेक्ट दिया गया है। एक सही बिल बनाने पर संस्था को आठ रुपये मिलेंगे तो गलत बिल पर पांच सौ रुपये काट लिए जाएंगे। इससे भी गड़बड़ी की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी, वर्ना मुनाफे की जगह संस्था का बड़ा नुकसान हो जाएगा। - मधुप श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता बदायूं
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बंद मकान में एक लाख से ज्यादा का बिल
शहर की ढाक वाली ज्यारत निवासी कुसुम परिवार के साथ नोएडा में रहती हैं। उनका मकान बंद रहता है। साल में एकाध बार परिवार त्योहार पर ही यहां आता है। बताया कि करीब साल भर पहले उनका मीटर जल गया। जून में छुट्टी बिताने वह लोग घर आए तो इसका पता लगा। बिजली बिल भी करीब पचास हजार बकाया था। उन्होंने एप्लीकेशन देकर नया मीटर लगवा लिया। इसके बाद फिर नोएडा चले गए। अब एक लाख रुपये के करीब का बिल उन पर बकाया दिखाया जा रहा है।
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बिल हमने जमा किया, रसीद काटी किसी और की
उसावां के गांव नगरिया भूरीपुर निवासी सर्वेंद्र सिंह तीन साल से कई बार विभाग के चक्कर काट चुके हैं। उन्होंने बताया कि तीन अक्तूबर 2011 को सखानू कस्बे में बैठे जेई ने 8940 रुपये लेकर उनके नलकूप के बकाया बिल की रसीद काटी थी। बिल में से यह धनराशि नहीं घटी तो पता लगा कि रसीद किसी मीरा नाम की महिला के नाम काट दी गई है। विभाग को अपनी गलती पता है पर सुधारने की कोई पहल नहीं हो रही।
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एक साल पहले जो जमा किया वो आज भी बकाया
डहरपुर निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि उनका चार किलोवाट का कामर्शियल कनेक्शन है। एक साल पहले उन्होंने बारह हजार रुपये जमा किए थे। आज तक यह राशि बकाया में ही दिखाई जा रही है। जिससे कहो वह दूसरे काउंटर पर भेज देता है।
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हमने बिल चुकता किया पर नहीं दे रहे एनओसी
समरेर के बौरा गांव निवासी राजेंद्र ने बताया कि उनके पिता नत्थू के नाम से कनेक्शन है। बकाया के आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर हो गई थी। अब उन्होंने पूरा बिल चुकता कर दिया है। विभाग ने भी बकाया बैलेंस न होने की रसीद दी है। बावजूद यह कहकर एनओसी नहीं दी जा रही कि नत्थू नाम से ही एक और बिल बकाया शो कर रहा है। वह लोग परेशान हैं, बिना विभागीय लिखापढ़ी के उनके नाम हुई रिपोर्ट खारिज नहीं होगी।
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एक दिसंबर से नई एजेंसी करेगी बिलिंग
बिलिंग और भुगतान को लेकर शासन स्तर पर बहुत शिकायतें पहुंच रही थीं। इस वजह से विभाग ने मौजूदा एजेंसी से काम हटाने का निर्णय लिया है। एक दिसंबर से शाही कम्प्यूटर्स नाम की एजेंसी बिलिंग की जिम्मेदारी उठाएगी। इस क्षेत्र में यह एजेंसी अच्छा काम कर रही थी जिसकी वजह से लखनऊ से ही उसे कांट्रेक्ट दिया गया है। एक सही बिल बनाने पर संस्था को आठ रुपये मिलेंगे तो गलत बिल पर पांच सौ रुपये काट लिए जाएंगे। इससे भी गड़बड़ी की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी, वर्ना मुनाफे की जगह संस्था का बड़ा नुकसान हो जाएगा। - मधुप श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता बदायूं