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राष्ट्र का गौरव बढ़ता है हिंदी में लेखन
Updated Tue, 26 Sep 2017 10:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। साहित्यक कला संस्कृति की संवाहक संस्था गजलिका के तत्वावधान में सोमवार को जवाहरपुरी में हिंदी सम्मान और मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें मौजूदा समय में प्रासंगिकता और आवश्यकता विषय पर विचार रखे गए। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कमला माहेश्वरी ने की।
हिंदी में विशेष और उल्लेखनीय योगदान करने के लिए डॉ. मनीराम मिश्र, डॉ.एमएस मित्तल, डॉ. रोशन परवीन और देवकी नंदन को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। मनीराम मिश्र ने कहा कि हिंदी में लेखन से राष्ट्र का गौरव बढ़ता है। मित्तल ने कहा कि भाषा समय समय के साथ संस्कृत प्राकृत, पाली और अपभ्रंश से परिवर्तित होते-होते हिंदी के स्वरूप तक पहुंचती है। कमला माहेश्वरी ने कहा कि हिंदी की देवनागरी लिपि ही संसार की वह लिपि है, इसमें जैसा लिखा जाता है वैसा ही बोला जाता है। रोशन परवीन ने कहा कि कवि सम्मेलन, मुशायरों में रात्रि भर जागना इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में असहज होता है। इसलिए कवि सम्मेलन और मुशायरे का यह पी फाइव प्रारूप निश्चित रूप से मंचों को रुचिकर बनाए रखेगा। देवकी नंदन ने कहा कि हिंदी काव्य प्रेमियां के लिए कवि सम्मेलन और मुशायरे का यह प्रारूप विशेष रुचिकर होगा। इस अवसर पर संस्था की सचिव शिखा सिंह और संयोजक निशांत असीम ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर राजीव भारद्वाज, डॉ. कंचन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
बदायूं। साहित्यक कला संस्कृति की संवाहक संस्था गजलिका के तत्वावधान में सोमवार को जवाहरपुरी में हिंदी सम्मान और मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें मौजूदा समय में प्रासंगिकता और आवश्यकता विषय पर विचार रखे गए। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कमला माहेश्वरी ने की।
हिंदी में विशेष और उल्लेखनीय योगदान करने के लिए डॉ. मनीराम मिश्र, डॉ.एमएस मित्तल, डॉ. रोशन परवीन और देवकी नंदन को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। मनीराम मिश्र ने कहा कि हिंदी में लेखन से राष्ट्र का गौरव बढ़ता है। मित्तल ने कहा कि भाषा समय समय के साथ संस्कृत प्राकृत, पाली और अपभ्रंश से परिवर्तित होते-होते हिंदी के स्वरूप तक पहुंचती है। कमला माहेश्वरी ने कहा कि हिंदी की देवनागरी लिपि ही संसार की वह लिपि है, इसमें जैसा लिखा जाता है वैसा ही बोला जाता है। रोशन परवीन ने कहा कि कवि सम्मेलन, मुशायरों में रात्रि भर जागना इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में असहज होता है। इसलिए कवि सम्मेलन और मुशायरे का यह पी फाइव प्रारूप निश्चित रूप से मंचों को रुचिकर बनाए रखेगा। देवकी नंदन ने कहा कि हिंदी काव्य प्रेमियां के लिए कवि सम्मेलन और मुशायरे का यह प्रारूप विशेष रुचिकर होगा। इस अवसर पर संस्था की सचिव शिखा सिंह और संयोजक निशांत असीम ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर राजीव भारद्वाज, डॉ. कंचन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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