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कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर श्रमिक

Mon, 04 May 2020 11:13 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2020 11:13 PM IST
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Workers forced to work on low wages
नजीबाबाद में गेहूं की कटाई करते किसान - मजदूर। - फोटो : NAZIBABAD
कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर श्रमिक
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नजीबाबाद। कोरोना महामारी के दौरान मजदूरों को उनके श्रम का वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा।
कोरोना महामारी के दौर में डेढ़ माह से श्रमिक बेरोजगार हैं। गेहूं की कटाई और मढ़ाई में कम दामों पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कारखाने बंद होने से बेरोजगार मजदूरों की संख्या बढ़ी है। गेहूं की कटाई के लिए गत वर्षों में कटाई मजदूर सात से आठ धड़ी प्रति बीघा गेहूं की मजदूरी लिया करते थे। किसानों को श्रमिक मुश्किल से मिलते थे, लेकिन अब घर पर बैठे मजदूरों को गेहूं की कटाई के लिए स्वयं किसानों के पास पहुंचना पड़ रहा है।

कटाई मजदूर 5 से 6 धड़ी प्रति बीघा गेहूं लेकर कटाई करने पर विवश हैं। इतना ही नहीं पहले मजदूर किसानों का भूसा ढुलान में आना कानी करते थे। और भूसा ढुलान के लिए 120 रुपए 150 रुपए प्रति क्विंटल मजदूरी लेते थे। कोरोना महामारी के दौर में अब मजदूर 70 से 80 रुपए प्रति क्विंटल भूसा ढोने को विवश हैं। कारखानों में काम करने वाले और भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों को भी आर्थिक संकटों के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
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