{"_id":"5d812c988ebc3e93c52ef616","slug":"vultures-have-started-growing-in-the-bijnor-news-mrt4438783147","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमानगढ़ रेंज में बढ़ने लगा है गिद्धों का कुनबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमानगढ़ रेंज में बढ़ने लगा है गिद्धों का कुनबा
विज्ञापन
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व एरिया में गिद्धों का कुनबा।
- फोटो : DHAMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमानगढ़ रेंज में बढ़ने लगा है गिद्धों का कुनबा
रेहड़ (बिजनौर)। विलुप्त हो रहे गिद्धों का कुनबा जिले की अमानगढ़ रेंज में बढ़ने लगा है। पेड़ों से लेकर मैदानों में गिद्घों के झुंड दिखाई देने लगे हैं। गिद्धों की संख्या बढ़ने से वन विभाग में खुशी की खबर आई है। गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है। गिद्ध पिछले एक दशक से लगातार कम हो रहे हैं। लेकिन अमानगढ़ का वातावरण वन्यजीवों व पक्षियों के अनुकूल सिद्ध हो रहा है। जिससे न सिर्फ गिद्ध बल्कि दूसरे वन्यजीवों की तादात में भी इजाफा हो रहा है। रेंजर अमानगढ़ राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि अमानगढ़ की आबोहवा वन्य जीवों को रास आ रही है। इससे उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। 2016 की गणना में लगभग 46 गिद्ध पाए गए थे लेकिन आज इनकी संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। अमानगढ़ कक्ष संख्या 20, 21 तथा कोठीरो बीट में सैकड़ों की तादात में गिद्ध देखने को मिल रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ शाह मौहम्मद बिलाल बताते हैं कि गिद्धों का संरक्षण प्रकृति के लिये बेहद जरूरी है।
देश में बचे केवल एक लाख गिद्ध
एक सर्वे के अनुसार वर्तमान में देश में गिद्धों की संख्या केवल एक लाख ही बची है। जबकि 1980 के दशक में देश में चार करोड़ से ज्यादा गिद्ध थे। अब गिद्धों की संख्या में फिर से वृद्घि देखी जा रही है।
जहरीली दवाई ने मार दिया गिद्धों को
पशुओं के दर्द निवारक के रूप में प्रयोग लाई जाने वाली दवा डायक्लोफिनाक गिद्धों के विलुप्त होने का सबसे बड़ा कारण बन गई। गिद्ध केवल मरे हुए जंतुओं को ही खाते हैं। मृत्यु के बाद जब गिद्ध पशुओं को खाते थे तो इस दवा के अंश उनके शरीर में चले जाते थे। इससे उनकी किडनी खराब हुई व गिद्धों की मौत होने लगी। उनकी संख्या तेजी से घटती चली गई।
विज्ञापन
क्या कहते हैं पूर्व डीएफओ
सेवानिवृत्त डीएफओ नरेंद्र सिंह के अनुसार मांसखोर होने के बाद भी गिद्ध हिंसक नहीं होते हैं। यह कभी किसी पर हमला नहीं करते हैं। गिद्ध जीव, जंतुओं के शव खाकर पर्यावरण की सफाई करते हैं। सब कुछ अनुकूल होने पर यह 35 से 40 साल तक भी जिंदा रह जाते हैं। सामान्यत: ये एक बार में चार अंडे तक देते हैं।
विज्ञापन
रेहड़ (बिजनौर)। विलुप्त हो रहे गिद्धों का कुनबा जिले की अमानगढ़ रेंज में बढ़ने लगा है। पेड़ों से लेकर मैदानों में गिद्घों के झुंड दिखाई देने लगे हैं। गिद्धों की संख्या बढ़ने से वन विभाग में खुशी की खबर आई है। गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है। गिद्ध पिछले एक दशक से लगातार कम हो रहे हैं। लेकिन अमानगढ़ का वातावरण वन्यजीवों व पक्षियों के अनुकूल सिद्ध हो रहा है। जिससे न सिर्फ गिद्ध बल्कि दूसरे वन्यजीवों की तादात में भी इजाफा हो रहा है। रेंजर अमानगढ़ राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि अमानगढ़ की आबोहवा वन्य जीवों को रास आ रही है। इससे उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। 2016 की गणना में लगभग 46 गिद्ध पाए गए थे लेकिन आज इनकी संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। अमानगढ़ कक्ष संख्या 20, 21 तथा कोठीरो बीट में सैकड़ों की तादात में गिद्ध देखने को मिल रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ शाह मौहम्मद बिलाल बताते हैं कि गिद्धों का संरक्षण प्रकृति के लिये बेहद जरूरी है।
देश में बचे केवल एक लाख गिद्ध
एक सर्वे के अनुसार वर्तमान में देश में गिद्धों की संख्या केवल एक लाख ही बची है। जबकि 1980 के दशक में देश में चार करोड़ से ज्यादा गिद्ध थे। अब गिद्धों की संख्या में फिर से वृद्घि देखी जा रही है।
विज्ञापन
जहरीली दवाई ने मार दिया गिद्धों को
पशुओं के दर्द निवारक के रूप में प्रयोग लाई जाने वाली दवा डायक्लोफिनाक गिद्धों के विलुप्त होने का सबसे बड़ा कारण बन गई। गिद्ध केवल मरे हुए जंतुओं को ही खाते हैं। मृत्यु के बाद जब गिद्ध पशुओं को खाते थे तो इस दवा के अंश उनके शरीर में चले जाते थे। इससे उनकी किडनी खराब हुई व गिद्धों की मौत होने लगी। उनकी संख्या तेजी से घटती चली गई।
विज्ञापन
क्या कहते हैं पूर्व डीएफओ
सेवानिवृत्त डीएफओ नरेंद्र सिंह के अनुसार मांसखोर होने के बाद भी गिद्ध हिंसक नहीं होते हैं। यह कभी किसी पर हमला नहीं करते हैं। गिद्ध जीव, जंतुओं के शव खाकर पर्यावरण की सफाई करते हैं। सब कुछ अनुकूल होने पर यह 35 से 40 साल तक भी जिंदा रह जाते हैं। सामान्यत: ये एक बार में चार अंडे तक देते हैं।