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Bijnor News: खस्ताहाल भवन में चल रहा पशु चिकित्सालय
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भवन संबंधी समस्याओं से जूझ रहा पशु चिकित्सालय
नजीबाबाद। पशु चिकित्सालय भवन संबंधी चुनौती के बीच संचालित किया जा रहा है। करीब एक दशक पूर्व निर्मित तीन कमरों में ही चिकित्सालय संचालित है।
नगर के मोहल्ला रम्पुरा स्थित पशु चिकित्सालय का भवन बदहाल है। पशुओं के उपचार के लिए भवन संबंधी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। बरसात के मौसम में खस्ताहाल भवन परिसर में खुले आसमान में पशुओं का इलाज करना कर्मचारियों की मजबूरी बन रहा है। दशकों पुराने पशु चिकित्सालय भवन को नए सिरे से बनाने की प्रक्रिया कई बार शुरू हुई, लेकिन परिसर में शत्रु संपत्ति होने और पुराना भवन तोड़ने की नीलामी प्रक्रिया पूरी न होने से भवन निर्माण कार्य अधर में लटक जाता है। पुराना भवन तोड़ने के लिए लोनिवि द्वारा आंकलित धनराशि अधिक होने से ठेकेदार नीलामी नहीं ले पाते हैं।
भवन निर्माण संबंधी चुनौतियों के बीच तीन दशक पूर्व चिकित्सालय परिसर में तीन कमरे निर्मित कराए गए थे। इन कमरों में चिकित्सक और ओपीडी कर्मचारी बैठते हैं। वर्तमान में पशु चिकित्सालय बरसात में होने वाली गलघोंटू बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चला रहा है। गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है।
उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसएम सिंह की देखरेख में संचालित पशु चिकित्सालय में भवन संबंधी चुनौतियों के बावजूद प्रतिदिन औसतन 15 से 20 ओपीडी की जा रहीं हैं। चिकित्सालय से कई उपकेंद्र जुड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े उपकेंद्र क्षेत्रीय पशुओं को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
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चार पशु चिकित्सा उपकेंद्र कार्यरत
नजीबाबाद। पशुओं की चिकित्सा के लिए किरतपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में चार भागूवाला, नांगलसोती, मंडावली उपकेंद्र हैं। इनके अतिरिक्त पशुधन प्रसार अधिकारी की देखरेख में बड़िया, पूंडरी, गुनियापुर और अमाननगर में एल्यू केंद्रों के माध्यम से पशुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
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नजीबाबाद। पशु चिकित्सालय भवन संबंधी चुनौती के बीच संचालित किया जा रहा है। करीब एक दशक पूर्व निर्मित तीन कमरों में ही चिकित्सालय संचालित है।
नगर के मोहल्ला रम्पुरा स्थित पशु चिकित्सालय का भवन बदहाल है। पशुओं के उपचार के लिए भवन संबंधी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। बरसात के मौसम में खस्ताहाल भवन परिसर में खुले आसमान में पशुओं का इलाज करना कर्मचारियों की मजबूरी बन रहा है। दशकों पुराने पशु चिकित्सालय भवन को नए सिरे से बनाने की प्रक्रिया कई बार शुरू हुई, लेकिन परिसर में शत्रु संपत्ति होने और पुराना भवन तोड़ने की नीलामी प्रक्रिया पूरी न होने से भवन निर्माण कार्य अधर में लटक जाता है। पुराना भवन तोड़ने के लिए लोनिवि द्वारा आंकलित धनराशि अधिक होने से ठेकेदार नीलामी नहीं ले पाते हैं।
भवन निर्माण संबंधी चुनौतियों के बीच तीन दशक पूर्व चिकित्सालय परिसर में तीन कमरे निर्मित कराए गए थे। इन कमरों में चिकित्सक और ओपीडी कर्मचारी बैठते हैं। वर्तमान में पशु चिकित्सालय बरसात में होने वाली गलघोंटू बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चला रहा है। गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है।
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उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसएम सिंह की देखरेख में संचालित पशु चिकित्सालय में भवन संबंधी चुनौतियों के बावजूद प्रतिदिन औसतन 15 से 20 ओपीडी की जा रहीं हैं। चिकित्सालय से कई उपकेंद्र जुड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े उपकेंद्र क्षेत्रीय पशुओं को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
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चार पशु चिकित्सा उपकेंद्र कार्यरत
नजीबाबाद। पशुओं की चिकित्सा के लिए किरतपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में चार भागूवाला, नांगलसोती, मंडावली उपकेंद्र हैं। इनके अतिरिक्त पशुधन प्रसार अधिकारी की देखरेख में बड़िया, पूंडरी, गुनियापुर और अमाननगर में एल्यू केंद्रों के माध्यम से पशुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।