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साहित्यिक संस्था ने पत्रकारिता दिवस पर किया काव्य गोष्ठी का आयोजन
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उखड़ रही सांसें, अरमान अभी बाकी है...
नजीबाबाद। साहित्यिक संस्था मेरी कलम की ओर से पत्रकारिता दिवस पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
सोमवार को गूगल मीट पर आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता डा. सारंगा देस असीम ने की और मुख्य अतिथि यूएसए से मंजु श्रीवास्तव रही। संस्था की अध्यक्षा डा. मंजु जौहरी ने गोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो देश दुनियां की खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य करता है।
गोष्ठी में डॉ मंजु जौहरी ने उखड़ रहीं हैं सांसें, अरमान अभी बाकी है, डर रहा क्यों तू ए वंदे, वरदान अभी बाकी है.., डा. सारंगा देस असीम ने दिल्ली की खातिर गांवों की कुटिया तक वीरान हुई है.., डॉ सतेंद्र गुप्ता ने कद से बड़ा ख्वाब देख लिया.., डॉ बेगराज यादव ने बातें महफिल में वो कुछ ऐसी कर गया, न जाने कितनों के दिल से उतर गया.., कुमुद कुमार ने जब राष्ट्र हो मुसीबत में, मसखरी अच्छी नहीं लगती.. सुनाई। कविता नामदेव ने जहरीली हवाओं में पल-पल जीना हुआ भारी.., सुमन वर्मा ने राष्ट्र को आइना पत्रकार दिखाता है.. रचना पेश की। इसके अलावा ऊषा श्रीवास्तव, डा. वर्षा सिंह, मंजू श्रीवास्तव, देव पुत्र गुलफाम, फूल माला, शशि देवली, दीपा शर्मा, तपस अग्रवाल, शिवेंद्र कौशिक आदि ने अपनी-अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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नजीबाबाद। साहित्यिक संस्था मेरी कलम की ओर से पत्रकारिता दिवस पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
सोमवार को गूगल मीट पर आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता डा. सारंगा देस असीम ने की और मुख्य अतिथि यूएसए से मंजु श्रीवास्तव रही। संस्था की अध्यक्षा डा. मंजु जौहरी ने गोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो देश दुनियां की खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य करता है।
गोष्ठी में डॉ मंजु जौहरी ने उखड़ रहीं हैं सांसें, अरमान अभी बाकी है, डर रहा क्यों तू ए वंदे, वरदान अभी बाकी है.., डा. सारंगा देस असीम ने दिल्ली की खातिर गांवों की कुटिया तक वीरान हुई है.., डॉ सतेंद्र गुप्ता ने कद से बड़ा ख्वाब देख लिया.., डॉ बेगराज यादव ने बातें महफिल में वो कुछ ऐसी कर गया, न जाने कितनों के दिल से उतर गया.., कुमुद कुमार ने जब राष्ट्र हो मुसीबत में, मसखरी अच्छी नहीं लगती.. सुनाई। कविता नामदेव ने जहरीली हवाओं में पल-पल जीना हुआ भारी.., सुमन वर्मा ने राष्ट्र को आइना पत्रकार दिखाता है.. रचना पेश की। इसके अलावा ऊषा श्रीवास्तव, डा. वर्षा सिंह, मंजू श्रीवास्तव, देव पुत्र गुलफाम, फूल माला, शशि देवली, दीपा शर्मा, तपस अग्रवाल, शिवेंद्र कौशिक आदि ने अपनी-अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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