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बिना अधिकार के कर दिया अल्ट्रासाउंड सेंटर का रिनुअल
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 03 Oct 2015 12:08 AM IST
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बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग का एक और नया कारनामा सामने आया है। पूर्व सीएमओ और पीसीपीएनडीटी (प्री कंसेप्सनल प्री डायग्नोस्टि टैक्निक) के नोडल स्वयं ही डीएम बन बैठे। उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अल्ट्रासाउंड सेंटरों का रिनुअल कर दिया, जबकि अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रिनुअल के लिए डीएम ही समुचित प्राधिकृत अधिकारी होते हैं।
जिले में वर्तमान समय में 94 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। अल्ट्रासाउंड का रिनुअल पांच वर्षों के लिए होता है। रिनुअल के लिए पीसीपीएनडीटी कमेटी की मीटिंग में संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर के रिनुअल अथवा रजिस्ट्रेेशन का प्रस्ताव रखा जाता है।
पीसीपीएनटी कमेटी समुचित प्राधिकृत अधिकारी स्वयं डीएम होते हैं। मीटिंग में प्रस्ताव पास होने के बाद रजिस्ट्रेशन व रिनुअल प्रमाण पत्र पर डीएम के हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन गत वर्षों में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रिनुअल में खेल किया गया।
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अधिकांश रिनुअल प्रमाण पत्रों पर डीएम के हस्ताक्षर ही नहीं है। तत्कालीन सीएमओ ने स्वयं अपने हस्ताक्षर कर रिनुअल प्रमाण पत्र जारी कर दिए। मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने पूरा रिकार्ड तलब किया है। साथ ही सूचना मांगी है कि अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रजिस्टेशन व रिनुअल प्रमाण पत्रों पर किसके हस्ताक्षर हैं और उस समय सीएमओ व पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी कौन-कौन थे।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में पूर्व सीएमओ व नोडल अधिकारी फंस सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक पीसीपीएनडीटी के एक नोडल अधिकारी ने अपने परिचित के अल्ट्रासाउंड रिनुअल प्रमाण पत्र पर स्वयं ही हस्ताक्षर कर दिए।
स्वास्थ्य विभाग नहीं करता कार्रवाई
अल्ट्रासाउंड पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई से बचता है। राष्ट्रीय निरीक्षण एवं अनुश्रवण समिति ने जिले में तीन पूर्व छापा मारा और दो अल्ट्रासाउंड सेंटर सील कर दिया। इससे पूर्व करीब छह माह से अल्ट्रासाउंड सेंटरों के विरुद्घ स्वास्थ्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं।
वजह अधिकांश अल्ट्रासाउंड सेंटर राजनेताओं के संरक्षण में चल रहे हैं और कुछ को स्वास्थ्य विभाग का संरक्षण प्राप्त है।
सीएमओ डा. मनमोहन अग्रवाल का कहना है कि डीएम ने अल्ट्रासाउंड के संबंध में सूचना मांगी है। उन्हें सूचना भिजवाई जा रही है। इसे अधिक उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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जिले में वर्तमान समय में 94 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। अल्ट्रासाउंड का रिनुअल पांच वर्षों के लिए होता है। रिनुअल के लिए पीसीपीएनडीटी कमेटी की मीटिंग में संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर के रिनुअल अथवा रजिस्ट्रेेशन का प्रस्ताव रखा जाता है।
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पीसीपीएनटी कमेटी समुचित प्राधिकृत अधिकारी स्वयं डीएम होते हैं। मीटिंग में प्रस्ताव पास होने के बाद रजिस्ट्रेशन व रिनुअल प्रमाण पत्र पर डीएम के हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन गत वर्षों में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रिनुअल में खेल किया गया।
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अधिकांश रिनुअल प्रमाण पत्रों पर डीएम के हस्ताक्षर ही नहीं है। तत्कालीन सीएमओ ने स्वयं अपने हस्ताक्षर कर रिनुअल प्रमाण पत्र जारी कर दिए। मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने पूरा रिकार्ड तलब किया है। साथ ही सूचना मांगी है कि अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रजिस्टेशन व रिनुअल प्रमाण पत्रों पर किसके हस्ताक्षर हैं और उस समय सीएमओ व पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी कौन-कौन थे।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में पूर्व सीएमओ व नोडल अधिकारी फंस सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक पीसीपीएनडीटी के एक नोडल अधिकारी ने अपने परिचित के अल्ट्रासाउंड रिनुअल प्रमाण पत्र पर स्वयं ही हस्ताक्षर कर दिए।
स्वास्थ्य विभाग नहीं करता कार्रवाई
अल्ट्रासाउंड पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई से बचता है। राष्ट्रीय निरीक्षण एवं अनुश्रवण समिति ने जिले में तीन पूर्व छापा मारा और दो अल्ट्रासाउंड सेंटर सील कर दिया। इससे पूर्व करीब छह माह से अल्ट्रासाउंड सेंटरों के विरुद्घ स्वास्थ्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं।
वजह अधिकांश अल्ट्रासाउंड सेंटर राजनेताओं के संरक्षण में चल रहे हैं और कुछ को स्वास्थ्य विभाग का संरक्षण प्राप्त है।
सीएमओ डा. मनमोहन अग्रवाल का कहना है कि डीएम ने अल्ट्रासाउंड के संबंध में सूचना मांगी है। उन्हें सूचना भिजवाई जा रही है। इसे अधिक उन्हें कोई जानकारी नहीं है।