{"_id":"69596490ec968e4f0e05e8ff","slug":"two-separate-teams-will-investigate-the-fake-doctor-case-bijnor-news-c-27-1-bij1027-169057-2026-01-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: फर्जी डॉक्टर प्रकरण की दो अलग-अलग टीम करेंगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: फर्जी डॉक्टर प्रकरण की दो अलग-अलग टीम करेंगी जांच
विज्ञापन
बिजनौर। मेडिकल अस्पताल में फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रथम दृष्टया जांच में सामने में आया कि अंदर की मिलीभगत से ही बाहर से फर्जी डॉक्टर आया। इतना ही नहीं उसने मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर की भी दवाई लिखी। बाहर से मिलने वाली दवाई को पर्चे पर रेखांकित किया। इस प्रकरण की जांच के लिए डीएम और प्राचार्या ने दो अलग-अलग कमेटी गठित कर दी हैं।
मेडिकल अस्पताल के कक्ष नंबर 25 में टीबी एवं छाती विभाग की ओपीडी संचालित होती हैं। इसके प्रभारी डॉ. तुषार हैं। शुक्रवार को हुए हंगामे में डॉ. तुषार ओपीडी में नहीं थे। उनके स्थान पर फर्जी चिकित्सक दिनेश मरीजों का इलाज करता मिला। इस मामले की जांच के लिए डीएम जसजीत कौर ने सीएमओ और एडीएम प्रशासन की दो सदस्य कमेटी गठित की। जबकि, प्राचार्या डॉ. उर्मिला ने जांच के लिए सीएमएस डॉ. बीआर त्यागी, डॉ. रजनीश शर्मा, डॉ. विजयंत की तीन सदस्य कमेटी का गठन किया।
बता दें कि फर्जी चिकित्सक दिनेश ने प्रत्येक मरीज के पर्चे पर 10 से 15 दवाई तक लिखी। इनमें दो से चार दवाई बाहर मेडिकल स्टोर की लिखी जा रही थी। एक फार्मासिस्ट ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पर्चे में रेखांकित दवाई अस्पताल में नहीं मिलती हैं। पिछले दो महीने से फर्जी डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को दवाई लिख रहा था लेकिन मेडिकल अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
-- --
ओपीडी समय में कहां थे डॉ. तुषार?
मेडिकल अस्पताल में ओपीडी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। शुक्रवार को ओपीडी में जब फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ पहुंचा तो उस समय 10 बजे थे। यहां फर्जी डॉक्टर मरीजों को दवाई लिखता मिला। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर डॉ. तुषार ओपीडी समय में कहां गए थे? हालांकि हंगामे के कुछ समय बाद डॉ. तुषार अस्पताल पहुंच गए।
-- --
किसकी शह पर ओपीडी कर रहा था फर्जी डॉक्टर
सूत्रों का कहना है कि डॉ. तुषार किरतपुर रोड पर अपना निजी नर्सिंग होम भी चला रहे हैं। मेडिकल अस्पताल में फर्जी चिकित्सक उन्हीं के निजी नर्सिंग होम का स्टाफ है। ऐसे में सवाल उठता है कि फर्जी चिकित्सक किसकी शह पर अस्पताल में ओपीडी कर रहा था? इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल यह भी है। फर्जी डॉक्टर को डॉ. तुषार की मुहर कैसे मिली? फर्जी डाॅक्टर के पास से असिस्टेंट प्रोफेसर की मुहर मिलना मिलीभगत की ओर से इशारा कर रही है।
-- --
वर्जन::
फर्जी डॉक्टर के मामले में तीन सदस्य कमेटी गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई करेंगे। सभी चिकित्सकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, कोई भी बाहरी व्यक्ति ओपीडी में नहीं बैठे। वरिष्ठ चिकित्सक से ओपीडी का निरीक्षण भी कराया गया है।
....डॉ. उर्मिला कार्या, प्राचार्या, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
-- --
वर्जन::
मेडिकल अस्पताल में फर्जी डॉक्टर प्रकरण में सीएमओ, एडीएम प्रशासन की टीम गठित हो गई है। उसे ओपीडी में बैठने के लिए किसने अधिकृत किया और कब से मरीजों को दवाई लिख रहा था। इन सब बिंदुओं की जांच होगी। जांच में दोषी पाए जाने पर मेडिकल कॉलेज, सीएमएस, डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
....जसजीत कौर, डीएम, बिजनौर
विज्ञापन
मेडिकल अस्पताल के कक्ष नंबर 25 में टीबी एवं छाती विभाग की ओपीडी संचालित होती हैं। इसके प्रभारी डॉ. तुषार हैं। शुक्रवार को हुए हंगामे में डॉ. तुषार ओपीडी में नहीं थे। उनके स्थान पर फर्जी चिकित्सक दिनेश मरीजों का इलाज करता मिला। इस मामले की जांच के लिए डीएम जसजीत कौर ने सीएमओ और एडीएम प्रशासन की दो सदस्य कमेटी गठित की। जबकि, प्राचार्या डॉ. उर्मिला ने जांच के लिए सीएमएस डॉ. बीआर त्यागी, डॉ. रजनीश शर्मा, डॉ. विजयंत की तीन सदस्य कमेटी का गठन किया।
विज्ञापन
बता दें कि फर्जी चिकित्सक दिनेश ने प्रत्येक मरीज के पर्चे पर 10 से 15 दवाई तक लिखी। इनमें दो से चार दवाई बाहर मेडिकल स्टोर की लिखी जा रही थी। एक फार्मासिस्ट ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पर्चे में रेखांकित दवाई अस्पताल में नहीं मिलती हैं। पिछले दो महीने से फर्जी डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को दवाई लिख रहा था लेकिन मेडिकल अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
ओपीडी समय में कहां थे डॉ. तुषार?
मेडिकल अस्पताल में ओपीडी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। शुक्रवार को ओपीडी में जब फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ पहुंचा तो उस समय 10 बजे थे। यहां फर्जी डॉक्टर मरीजों को दवाई लिखता मिला। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर डॉ. तुषार ओपीडी समय में कहां गए थे? हालांकि हंगामे के कुछ समय बाद डॉ. तुषार अस्पताल पहुंच गए।
किसकी शह पर ओपीडी कर रहा था फर्जी डॉक्टर
सूत्रों का कहना है कि डॉ. तुषार किरतपुर रोड पर अपना निजी नर्सिंग होम भी चला रहे हैं। मेडिकल अस्पताल में फर्जी चिकित्सक उन्हीं के निजी नर्सिंग होम का स्टाफ है। ऐसे में सवाल उठता है कि फर्जी चिकित्सक किसकी शह पर अस्पताल में ओपीडी कर रहा था? इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल यह भी है। फर्जी डॉक्टर को डॉ. तुषार की मुहर कैसे मिली? फर्जी डाॅक्टर के पास से असिस्टेंट प्रोफेसर की मुहर मिलना मिलीभगत की ओर से इशारा कर रही है।
वर्जन::
फर्जी डॉक्टर के मामले में तीन सदस्य कमेटी गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई करेंगे। सभी चिकित्सकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, कोई भी बाहरी व्यक्ति ओपीडी में नहीं बैठे। वरिष्ठ चिकित्सक से ओपीडी का निरीक्षण भी कराया गया है।
....डॉ. उर्मिला कार्या, प्राचार्या, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
वर्जन::
मेडिकल अस्पताल में फर्जी डॉक्टर प्रकरण में सीएमओ, एडीएम प्रशासन की टीम गठित हो गई है। उसे ओपीडी में बैठने के लिए किसने अधिकृत किया और कब से मरीजों को दवाई लिख रहा था। इन सब बिंदुओं की जांच होगी। जांच में दोषी पाए जाने पर मेडिकल कॉलेज, सीएमएस, डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
....जसजीत कौर, डीएम, बिजनौर