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खतरा: संवदेनशील घोषित करने पड़े यूपी के 22 गांव, कई लोगों की जान ले चुके बाघ, बेहद खतरनाक है ये क्षेत्र

Fri, 02 Dec 2022 12:28 PM IST
मेरठ ब्यूरो रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 02 Dec 2022 12:28 PM IST
सार

यूपी के ये 22 गांव संवदेनशील घोषित करने पड़ गए। यहां पहले भी बाघ कई लोगों की जान ले चुके हैं। यूपी का यह क्षेत्र बेहद खतरनाक है।

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Tiger threat in 22 villages, declared sensitive
बिजनौर : अमानगढ़ में लगाए गए कैमरे में कैद हुआ गुलदार का फोटो। - फोटो : BIJNOR

विस्तार

वन विभाग की बिजनौर डिवजीन में अमानगढ़ और नगीना रेंज के 22 गांवों को बाघों की मौजूदगी के कारण संवेदनशील घोषित किया गया है। इन गांवों में बाघों के आने का खतरा है, ऐसे में इन गांवों में मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा वन विभाग ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए रेस्क्यू एंड रेस्पांस टीम का गठन भी किया है। पूरे दिसंबर को वन विभाग ने बाघ संरक्षण माह घोषित कर दिया है।

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जिले में अमानगढ़ वन रेंज के अलावा नगीना और बढ़ापुर के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी मिलती रही है। सर्दी शुरू होते ही गन्ने के खेत खाली होने लगे हैं, ऐसे में जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में बाघों की मौजूदगी दिखने लगती है। अमानगढ़ और नगीना रेंज से सटे गांवों को इसके लिए संवेदनशील घोषित कर दिया है। इन दोनों रेंज में 42 गांव जंगल सीमा के पास हैं, लेकिन वन विभाग ने 22 गांवों को संवेदनशील माना है। इन गांवों में बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष होने की आशंका के चलते अब यहां पर ग्रामीणों को बाघों के व्यवहार से परिचित कराया जाएगा। ताकि ऐसी स्थिति आने पर कोई अनहोनी न हो। रिजर्व जंगल से भटककर आबादी में पहुंचे बाघ व अन्य वन्य जीवों को रेस्क्यू करने के लिए हर रेंज पर रेस्क्यू एंड रेस्पांस टीम का गठन भी कर दिया गया है।
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अमानगढ़ में 27 से ज्यादा बाघ
जिले की अमानगढ़ वन रेंज 80 वर्ग किलोमीटर में फैली गई है। पुरानी गणना के मुताबिक, यहां 27 बाघ देखे गए थे। वर्तमान में इनकी संख्या इससे ज्यादा भी होने की संभावना है। ऐसे में अमानगढ़ के पास गांवों में बाघों के देखे जाने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। करीब दस साल पहले अमानगढ़ से सटे गांवों में एक बाघ ने कई लोगों की जान ली थी। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग इस बार आबादी वाले क्षेत्रों में तैयारी कर रहा है।
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गांवों के लिए एडवाइजरी जारी
क्या करें
- खेतों में दा या उससे अधिक के समूह में जाएं
- गन्ना काटने से पहले वहां हाका करें, ताकि वन्य जीव दूसरी जगह पर चला जाए
- खेत पर काम करते समय मोबाइल या रेडियो पर तेज ध्वनि वाले गाने चलाएं
- काम करते समय एक व्यक्ति को निगरानी के लिए लगाएं
- खेतों में काम करते समय सिर पर हेलमेट या नकपैड पहनें
- अधिक रात में खेतों पर न जाएं, खेतों की निगरानी मचान से ही करें
- वन्य जीव दिखने पर वन अधिकारियों को तुरंत सूचना दें

यह न करने की दी गई सलाह
- खेतों पर अकेले न जाएं
- जंगल में छोटे बच्चों को अकेले न भेजें
- गन्ने की कटाई बैठकर या झुककर न करें
- रात में खेतों की रखवाली करते समय भूमि पर या चारपाई पर न सोएं
- वन्य जीव दिखने पर उसे न छेड़े और उसके रास्ते में न आएं

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ये गांव संवेदनशील सूची में शामिल
अमानगढ़ से सटे गांव : देवानंदपुर गढ़ी, रेहड़, नवाबाद जंगल, केहरीपुर जंगल, किरतपुर, रानीनांगल, फतेहपुर धारा, कल्लूवाला, लालबाग, मलौनी, मीरापुर उत्तरी।
नगीना रेंज से सटे गांव : भिक्कावाला, बनियोंवाला, इस्लामनगर, मुरलीवाला, जामुनवाला, लड्डूवाला, खैरीखत्ता, जमनपुर, रसूलपुर, रसूलाबाद, प्रेमपुरी।

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दिसंबर बाघ सुरक्षा माह के रूप में मनाया जा रहा है। 22 संवेदनशील गांवों की सूची तैयार की गई है। यहां पर संबंधित रेंज के अधिकारियों व कर्मचारियों के नंबर जारी किए गए हैं, जो ग्रामीणों को बताए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीणों को वन्य जीवों के व्यवहार आदि की जानकारी भी दी जा रही है। ताकि मानव-वन्य जीवों के बीच संघर्ष रोका जा सके। - ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग

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