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इस प्रतिभा को न जुबां चाहिए न कान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Apr 2017 12:45 AM IST
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धावक विवेक राणा।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के चंदनपुरा गांव का 18 साल का मूकबधिर विवेक राणा दौड़ में नए-नए मुकाम हासिल कर रहा है। अभी तक विवेक 25 मेडल हासिल कर चुका है। विवेक का सपना देश के लिए दौड़कर नए मुकाम हासिल करने का है।
गांव चंदनपुरा निवासी किसान चौधरी यशपाल सिंह का 18 साल को मूकबधिर बेटा विवेक राणा पिछले तीन साल से दौड़ लगा रहा है। चेन्नई में हुई नेशनल प्रतियोगिता में विवेक ने कांस्य पदक हासिल किया। अब तक वह जूनियर प्रतियोगिता में हिस्सा लेता आया है।
न्नई में पहली बार सीनियर प्रतियोगिता में उसने हिस्सा लिया। मेरठ में हुई मंडल प्रतियोगिता में वह टांप पर रहा। बरेली , शाहजहांपुर में हुई आल यूपी प्रतियोगिता में भी वह पहले नंबर पर रहा। परिजनों से लेकर हर किसी को अब उस पर नाज है।
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गजब की बात तो ये है कि विवेक के परिजनों को भी नहीं मालूम था कि विवेक क्या कर रहा है। जब घर पर मेडल आने शुरू हुए तो उन्हें विवेक की प्रतिभा का पता चला। विवेक के बड़े भाई पंकज राणा के मुताबिक विवेक मेरठ में 24 किलोमीटर की मैराथन दौड़ भी लगा चुका है। विवेक को सरकारी स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिल रही। परिजनों और अपनी मेहनत के बल पर विवेक इस मुकाम पर पहुंचा है।
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गांव चंदनपुरा निवासी किसान चौधरी यशपाल सिंह का 18 साल को मूकबधिर बेटा विवेक राणा पिछले तीन साल से दौड़ लगा रहा है। चेन्नई में हुई नेशनल प्रतियोगिता में विवेक ने कांस्य पदक हासिल किया। अब तक वह जूनियर प्रतियोगिता में हिस्सा लेता आया है।
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न्नई में पहली बार सीनियर प्रतियोगिता में उसने हिस्सा लिया। मेरठ में हुई मंडल प्रतियोगिता में वह टांप पर रहा। बरेली , शाहजहांपुर में हुई आल यूपी प्रतियोगिता में भी वह पहले नंबर पर रहा। परिजनों से लेकर हर किसी को अब उस पर नाज है।
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गजब की बात तो ये है कि विवेक के परिजनों को भी नहीं मालूम था कि विवेक क्या कर रहा है। जब घर पर मेडल आने शुरू हुए तो उन्हें विवेक की प्रतिभा का पता चला। विवेक के बड़े भाई पंकज राणा के मुताबिक विवेक मेरठ में 24 किलोमीटर की मैराथन दौड़ भी लगा चुका है। विवेक को सरकारी स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिल रही। परिजनों और अपनी मेहनत के बल पर विवेक इस मुकाम पर पहुंचा है।