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टस्कर हाथी के साथ संघर्ष में गई बाघिन की जान
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टस्कर हाथी के साथ संघर्ष में गई बाघिन की जान
रेहड़। अमानगढ़ में बाघिन को टस्कर हाथी ने मारा। बाघिन के शव के पोस्टमार्टम को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा रहा है। बाघिन का शव बुरी तरह कुचला हुआ मिला है। उसकी कई हड्डियां टूटी हुईं थीं। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन के शव को जला दिया गया।
बृहस्पतिवार शाम अमानगढ़ वन रेंज के कंपार्ट नंबर छह में एक बाघिन का शव मिला था। बाघिन की आयु देखने में करीब तीन साल लगा रही थी। उसके दांत व नाखून सुरक्षित मिले थे। शरीर के ऊपर कोई गहरा जख्म भी नहीं था। इसे देखकर लग रहा था कि वर्चस्व की जंग में बाघिन की जान नहीं गई थी। शुक्रवार को आईवीआरआई से आई चिकित्सकों की टीम ने बाघिन का पोस्टमार्टम किया। बाघिन के शरीर का पिछला हिस्सा, छाती व आगे का एक पैर अंदर से बुरी तरह कुचले हुए मिले। उसकी कई हड्डी भी टूटी हुईं थी। पोस्टमार्टम करने वाली टीम का मानना है कि बाघिन की मौत किसी टस्कर हाथी से संघर्ष होने पर हुई है। बाघिन को इतनी बुरी तरह से हाथी ही कुचल सकता है। बाघिन को पटककर भी मारा गया है। जिस हाथी के लंबे दांत निकल आते हैं उसे टस्कर कहते हैं। वह ही बाघिन को उठाकर पटक सकता है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक जंगल में टस्कर हाथी एवं बाघिन का आमना सामना हुआ होगा। संघर्ष में ही हाथी के उठाकर पटकने एवं कुचलने से बाघिन की मौत हुई होगी। जंगल में वन्यजीवों के बीच इस तरह के संघर्ष हो जाते हैं। पोस्टमार्टम के दौरान डीएफओ के अलावा रेंजर सतीश शर्मा व अन्य वन्यकर्मी मौजूद रहे।
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रेहड़। अमानगढ़ में बाघिन को टस्कर हाथी ने मारा। बाघिन के शव के पोस्टमार्टम को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा रहा है। बाघिन का शव बुरी तरह कुचला हुआ मिला है। उसकी कई हड्डियां टूटी हुईं थीं। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन के शव को जला दिया गया।
बृहस्पतिवार शाम अमानगढ़ वन रेंज के कंपार्ट नंबर छह में एक बाघिन का शव मिला था। बाघिन की आयु देखने में करीब तीन साल लगा रही थी। उसके दांत व नाखून सुरक्षित मिले थे। शरीर के ऊपर कोई गहरा जख्म भी नहीं था। इसे देखकर लग रहा था कि वर्चस्व की जंग में बाघिन की जान नहीं गई थी। शुक्रवार को आईवीआरआई से आई चिकित्सकों की टीम ने बाघिन का पोस्टमार्टम किया। बाघिन के शरीर का पिछला हिस्सा, छाती व आगे का एक पैर अंदर से बुरी तरह कुचले हुए मिले। उसकी कई हड्डी भी टूटी हुईं थी। पोस्टमार्टम करने वाली टीम का मानना है कि बाघिन की मौत किसी टस्कर हाथी से संघर्ष होने पर हुई है। बाघिन को इतनी बुरी तरह से हाथी ही कुचल सकता है। बाघिन को पटककर भी मारा गया है। जिस हाथी के लंबे दांत निकल आते हैं उसे टस्कर कहते हैं। वह ही बाघिन को उठाकर पटक सकता है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक जंगल में टस्कर हाथी एवं बाघिन का आमना सामना हुआ होगा। संघर्ष में ही हाथी के उठाकर पटकने एवं कुचलने से बाघिन की मौत हुई होगी। जंगल में वन्यजीवों के बीच इस तरह के संघर्ष हो जाते हैं। पोस्टमार्टम के दौरान डीएफओ के अलावा रेंजर सतीश शर्मा व अन्य वन्यकर्मी मौजूद रहे।
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