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स्थानीय पुलिस ने बंद की आंख तो डीआईजी ने टीम भेज की कार्रवाई
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स्योहारा (बिजनौर)। स्योहारा में पुलिस प्रशासन और कुछ नेताओं की मिलीभगत से चल रहे खनन सिंडिकेट को डीआईजी ने तोड़ दिया। डीआईजी के निर्देश पर सीओ ठाकुरद्वारा (मुरादाबाद) के नेतृत्व में तीन थानों की फोर्स ने मिट्टी से भरे छह डंपर और दो जेसीबी को पकड़ लिया। इसके बाद इन्हें थाने में सीज कर दिया गया। इस कार्रवाई से जनपद के पुलिस प्रशासन के साथ ही खनन माफिया में हड़कंप मच गया।
शनिवार की मध्यरात्री को डीआईजी के निर्देशन में ठाकुरद्वारा सीओ सागर जैन के नेतृत्व में स्योहारा थाने को बगैर सूचना दिए क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो जेसीबी तथा छह दर्जन डंपर जब्त थाने पहुंचाए। छापामारी के दौरान तीन थानों की फोर्स में लगभग 25 से अधिक पुलिसकर्मियों ने किसी को भागने का मौका तक नहीं दिया। कार्रवाई के दौरान नौ व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया। रात के अंधेरे में चल रहे खनन पर जिले के किसी भी अधिकारी ने अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया था।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र के एक वरिष्ठ भाजपा नेता की शिकायत पर डीआईजी स्तर से बड़ी कार्रवाई की गई है। डीआईजी ने इसकी जिम्मेदारी आईपीएस सागर जैन को दी, जो पुलिस क्षेत्राधिकारी ठाकुरद्वारा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जब उनसे इस संबंध मे जानकारी की गई तो, उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों द्वारा निर्देशित किया गया था कि स्योहारा थाना क्षेत्र मे बड़े पैमाने पर खनन चल रहा है, जिसके बाद टीम गठित कर रात के अंधेरे में छापामारी की गई तो खनन करते हुए दो जेसीबी और छह डंपर जब्त कर थाने भेजे गए। संबंधित अधिकारी को इसकी सुचना दी गई और कार्रवाई के लिए कहा गया। खनन की इस बड़ी कार्रवाई के बाद खनन निरीक्षक बृजेश कुमार भी स्योहारा पहुंचे और आगे की कार्रवाई में जुटे।
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सफेदपोश के संरक्षण में चल रहा खेल
सूत्रों की माने तो मिट्टी का अवैध खनन पिछले काफी समय से चल रहा था। एक प्रभावशाली सत्ता पक्ष के नेता के संरक्षण में अवैध खनन का यह पूरा खेल चल रहा है। इसी कारण कोई अधिकारी रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। लेकिन बंटवारे हिस्सेदारी को लेकर हुई तनातनी में एक भाजपा नेता के द्वारा ही शिकायत करने पर डीआईजी स्तर से इस पर कार्रवाई हो सकी।
बिजनौर पुलिस प्रशासन पर उठ रहे सवाल
आखिर डीआईजी तक मामला क्यों पहुंचा? इसे लेकर बिजनौर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठ रहा है। क्या इस अवैध खनन की शिकायत क्षेत्रीय पुलिस, सीओ, एसडीएम, एसएसपी या जिलाधिकारी के साथ खनन अधिकारी से नहीं की गई? चर्चा है कि सभी के संज्ञान में मामला था, लेकिन कद्दावर नेता के प्रभाव और अपने हितों के साधने के फेर में पुलिस प्रशासन ने इस तरफ से आंखें फेर ली। नतीजा ये निकला कि शिकायत डीआईजी तक पहुंची और वहां से बिजनौर पुलिस प्रशासन को सूचना दिए बगैर सीधे कार्रवाई कर दी गई।
वर्जन::
अवैैध खनन रोकने के लिए तहसील स्तर की टास्क फोर्स बनी है। इस टास्क फोर्स में एसडीएम, सीओ, एआरटीओ और थाना प्रभारी शामिल हैं। खनन होते मिला है तो यह इनकी असफलता है। तहसील स्तर पर बनी टॉस्क फोर्स को देखना चाहिए था कि खनन कैसे हो रहा है। हालांकि मामले जांच की जा रही है। जांच कर मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। ....डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी बिजनौर।
मिट्टी के खनन पर रायल्टी नहीं है। फिर भी प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। जहां शिकायत मिलती है, कार्रवाई की जाती है। - वीके गौतम, खनन निरीक्षक बिजनौर
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शनिवार की मध्यरात्री को डीआईजी के निर्देशन में ठाकुरद्वारा सीओ सागर जैन के नेतृत्व में स्योहारा थाने को बगैर सूचना दिए क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो जेसीबी तथा छह दर्जन डंपर जब्त थाने पहुंचाए। छापामारी के दौरान तीन थानों की फोर्स में लगभग 25 से अधिक पुलिसकर्मियों ने किसी को भागने का मौका तक नहीं दिया। कार्रवाई के दौरान नौ व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया। रात के अंधेरे में चल रहे खनन पर जिले के किसी भी अधिकारी ने अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया था।
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सूत्रों के अनुसार क्षेत्र के एक वरिष्ठ भाजपा नेता की शिकायत पर डीआईजी स्तर से बड़ी कार्रवाई की गई है। डीआईजी ने इसकी जिम्मेदारी आईपीएस सागर जैन को दी, जो पुलिस क्षेत्राधिकारी ठाकुरद्वारा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जब उनसे इस संबंध मे जानकारी की गई तो, उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों द्वारा निर्देशित किया गया था कि स्योहारा थाना क्षेत्र मे बड़े पैमाने पर खनन चल रहा है, जिसके बाद टीम गठित कर रात के अंधेरे में छापामारी की गई तो खनन करते हुए दो जेसीबी और छह डंपर जब्त कर थाने भेजे गए। संबंधित अधिकारी को इसकी सुचना दी गई और कार्रवाई के लिए कहा गया। खनन की इस बड़ी कार्रवाई के बाद खनन निरीक्षक बृजेश कुमार भी स्योहारा पहुंचे और आगे की कार्रवाई में जुटे।
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सफेदपोश के संरक्षण में चल रहा खेल
सूत्रों की माने तो मिट्टी का अवैध खनन पिछले काफी समय से चल रहा था। एक प्रभावशाली सत्ता पक्ष के नेता के संरक्षण में अवैध खनन का यह पूरा खेल चल रहा है। इसी कारण कोई अधिकारी रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। लेकिन बंटवारे हिस्सेदारी को लेकर हुई तनातनी में एक भाजपा नेता के द्वारा ही शिकायत करने पर डीआईजी स्तर से इस पर कार्रवाई हो सकी।
बिजनौर पुलिस प्रशासन पर उठ रहे सवाल
आखिर डीआईजी तक मामला क्यों पहुंचा? इसे लेकर बिजनौर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठ रहा है। क्या इस अवैध खनन की शिकायत क्षेत्रीय पुलिस, सीओ, एसडीएम, एसएसपी या जिलाधिकारी के साथ खनन अधिकारी से नहीं की गई? चर्चा है कि सभी के संज्ञान में मामला था, लेकिन कद्दावर नेता के प्रभाव और अपने हितों के साधने के फेर में पुलिस प्रशासन ने इस तरफ से आंखें फेर ली। नतीजा ये निकला कि शिकायत डीआईजी तक पहुंची और वहां से बिजनौर पुलिस प्रशासन को सूचना दिए बगैर सीधे कार्रवाई कर दी गई।
वर्जन::
अवैैध खनन रोकने के लिए तहसील स्तर की टास्क फोर्स बनी है। इस टास्क फोर्स में एसडीएम, सीओ, एआरटीओ और थाना प्रभारी शामिल हैं। खनन होते मिला है तो यह इनकी असफलता है। तहसील स्तर पर बनी टॉस्क फोर्स को देखना चाहिए था कि खनन कैसे हो रहा है। हालांकि मामले जांच की जा रही है। जांच कर मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। ....डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी बिजनौर।
मिट्टी के खनन पर रायल्टी नहीं है। फिर भी प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। जहां शिकायत मिलती है, कार्रवाई की जाती है। - वीके गौतम, खनन निरीक्षक बिजनौर