Tanzil Murder case: जज साहब भी वही, सजा भी वही, बस जगह अलग
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तंजील हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाने वाले अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ.विजय कुमार की कलम अपराधियों के खिलाफ सख्त निर्णय लेने के लिए चर्चित रही है। 20 मई को जज साहब भी यही थे और सजा भी फांसी की सुनाई गई थी। दो साल पहले वर्ष 2020 में 20 मई को न्यायाधीश डॉ.विजय कुमार ने इटावा में चर्चित पिलखर हत्याकांड में रामप्रसाद उर्फ टिल्लू को फांसी की सजा सुनाई थी। बिजनौर में भी उन्होंने 20 मई को तंजील हत्याकांड में मुनीर और रैय्यान को दोषी करार दिया और सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया। दोनों दोषियों को 21 मई को फांसी की सजा सुनाई गई।
तंजील हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाने के फैसले के बाद न्यायाधीश डॉ.विजय कुमार भी चर्चाओं में हैं। इनके पुराने फैसलों की खूब चर्चा हो रही, जिसमें इनके द्वारा दिए गए सख्त फैसलों का जिक्र हो रहा है। खासतौर से दो साल पहले इटावा में दिए गए फैसले को लोग याद कर रहे हैं।
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इटावा जिले में पिलखर हत्याकांड खूब चर्चाओं में था। इसके मुख्य आरोपी रामप्रताप उर्फ टिल्लू ने करीब दस साल पहले जमीन हड़पने की मंशा से पिलखर गांव में अपने बड़े भाई समेत छह परिजनों की हत्या की थी। वर्ष 2020 में इटावा में न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश के पद पर थे और इन्हीं की कोर्ट में यह केस चल रहा था। वर्ष 2020 में 20 मई को ही न्यायाधीश डॉ.विजय कुमार ने इस हत्याकांड में टिल्लू को फांसी की सजा सुनाई थी।
अब बिजनौर में भी शनिवार को मुनीर और रैय्यान को फांसी की सजा सुनाई गई। इन्हीं जज की कलम से फांसी की सजा सुनाए जाने के फैसले की भी चर्चा हो रही।