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भीषण गर्मी डाल रही पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
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गर्मी से पशुओं की सेहत भी हो रही प्रभावित
नूरपुर। इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी का असर इंसानों पर ही नही, पशुओं पर भी पड़ रहा है। गर्मी के कारण पशुओं में जहां बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ा है, वहीं दुधारू पशुओं खासकर गाय और भैंस की दूध उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों ने पशुओं को गर्मी से बचाकर रखने की सलाह दी है।
इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान 40 डिग्री के आसपास जा रहा है। भीषण गर्मी इंसानों पर ही नहीं, पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी में पशुओं की सही देखभाल न की जाए तो उनके बीमार होने का खतरा हो जाता है और दुग्ध उत्पादन में भी कमी आती है। डेयरी संचालक अर्जुन सिंह, अनिल विश्नोई, पशुपालक शेर सिंह, विनोद चौधरी आदि ने बताया कि गर्मी में गाय व भैंस के दूध में कमी हुई है। पहले जो भैंस 10 किलो दूध दे रही थी वह घटकर छह किलों पर आ गई है।
पशुओं में होने वाले प्रमुख रोग।
इस मौसम में पशुओं को होने वाले प्रमुख रोगों में लू लगना व हांफने की बीमारी हैं। इसके अलावा पशु चेचक, कंठा, लंगड़ी आदि रोगों की चपेट में भी आ सकते हैं। साथ ही बरसात में पशुओं में मुंहपका और खुरपका की बीमारी भी आम है।
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बीमारी के लक्षण।
हीट स्ट्रोक से पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देता है। पशु के सांस लेने की व नाड़ी की गति तेज हो जाती है। ध्यान न देने पर पशु की सांस लेने में परेशानी होने लगती है और वह बेहोश हो जाता है तथा उपचार न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है। इसके अलावा पशु के अधिक हांफने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
क्या कहते हैं चिकित्सक।
प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी मोहम्मद अहमद का कहना है कि गर्मी में होने वाली बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए उन्हें दिन में दो से तीन बार नहलाना चाहिए। पशुओं को छायादार पेड़ों के नीचे बांधना चाहिए । पशुशाला अगर पक्की है तो उसकी छत पर कबाड़ अथवा सूखी घास रखें जिससे छत ठंडी रहे। टीनशेड व कम ऊंचाई की पक्की छत के नीचे पशुओं को बांधने से बचें। सूखे चारे की अपेक्षा हरे चारे का अधिक प्रयोग करें। बीमारी होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि इस समय गलघोंटू बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। जुलाई से खुरपका और मुंहपका बीमारी का टीकाकरण होगा।
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नूरपुर। इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी का असर इंसानों पर ही नही, पशुओं पर भी पड़ रहा है। गर्मी के कारण पशुओं में जहां बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ा है, वहीं दुधारू पशुओं खासकर गाय और भैंस की दूध उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों ने पशुओं को गर्मी से बचाकर रखने की सलाह दी है।
इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान 40 डिग्री के आसपास जा रहा है। भीषण गर्मी इंसानों पर ही नहीं, पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी में पशुओं की सही देखभाल न की जाए तो उनके बीमार होने का खतरा हो जाता है और दुग्ध उत्पादन में भी कमी आती है। डेयरी संचालक अर्जुन सिंह, अनिल विश्नोई, पशुपालक शेर सिंह, विनोद चौधरी आदि ने बताया कि गर्मी में गाय व भैंस के दूध में कमी हुई है। पहले जो भैंस 10 किलो दूध दे रही थी वह घटकर छह किलों पर आ गई है।
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पशुओं में होने वाले प्रमुख रोग।
इस मौसम में पशुओं को होने वाले प्रमुख रोगों में लू लगना व हांफने की बीमारी हैं। इसके अलावा पशु चेचक, कंठा, लंगड़ी आदि रोगों की चपेट में भी आ सकते हैं। साथ ही बरसात में पशुओं में मुंहपका और खुरपका की बीमारी भी आम है।
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बीमारी के लक्षण।
हीट स्ट्रोक से पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देता है। पशु के सांस लेने की व नाड़ी की गति तेज हो जाती है। ध्यान न देने पर पशु की सांस लेने में परेशानी होने लगती है और वह बेहोश हो जाता है तथा उपचार न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है। इसके अलावा पशु के अधिक हांफने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
क्या कहते हैं चिकित्सक।
प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी मोहम्मद अहमद का कहना है कि गर्मी में होने वाली बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए उन्हें दिन में दो से तीन बार नहलाना चाहिए। पशुओं को छायादार पेड़ों के नीचे बांधना चाहिए । पशुशाला अगर पक्की है तो उसकी छत पर कबाड़ अथवा सूखी घास रखें जिससे छत ठंडी रहे। टीनशेड व कम ऊंचाई की पक्की छत के नीचे पशुओं को बांधने से बचें। सूखे चारे की अपेक्षा हरे चारे का अधिक प्रयोग करें। बीमारी होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि इस समय गलघोंटू बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। जुलाई से खुरपका और मुंहपका बीमारी का टीकाकरण होगा।