फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   The health of animals is also affected due to heat

भीषण गर्मी डाल रही पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

Tue, 23 Jun 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 11:21 PM IST
विज्ञापन
The health of animals is also affected due to heat
गर्मी से पशुओं की सेहत भी हो रही प्रभावित
विज्ञापन

नूरपुर। इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी का असर इंसानों पर ही नही, पशुओं पर भी पड़ रहा है। गर्मी के कारण पशुओं में जहां बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ा है, वहीं दुधारू पशुओं खासकर गाय और भैंस की दूध उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों ने पशुओं को गर्मी से बचाकर रखने की सलाह दी है।
इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान 40 डिग्री के आसपास जा रहा है। भीषण गर्मी इंसानों पर ही नहीं, पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी में पशुओं की सही देखभाल न की जाए तो उनके बीमार होने का खतरा हो जाता है और दुग्ध उत्पादन में भी कमी आती है। डेयरी संचालक अर्जुन सिंह, अनिल विश्नोई, पशुपालक शेर सिंह, विनोद चौधरी आदि ने बताया कि गर्मी में गाय व भैंस के दूध में कमी हुई है। पहले जो भैंस 10 किलो दूध दे रही थी वह घटकर छह किलों पर आ गई है।
विज्ञापन

पशुओं में होने वाले प्रमुख रोग।
इस मौसम में पशुओं को होने वाले प्रमुख रोगों में लू लगना व हांफने की बीमारी हैं। इसके अलावा पशु चेचक, कंठा, लंगड़ी आदि रोगों की चपेट में भी आ सकते हैं। साथ ही बरसात में पशुओं में मुंहपका और खुरपका की बीमारी भी आम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीमारी के लक्षण।
हीट स्ट्रोक से पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देता है। पशु के सांस लेने की व नाड़ी की गति तेज हो जाती है। ध्यान न देने पर पशु की सांस लेने में परेशानी होने लगती है और वह बेहोश हो जाता है तथा उपचार न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है। इसके अलावा पशु के अधिक हांफने पर भी ध्यान देना जरूरी है।

क्या कहते हैं चिकित्सक।
प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी मोहम्मद अहमद का कहना है कि गर्मी में होने वाली बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए उन्हें दिन में दो से तीन बार नहलाना चाहिए। पशुओं को छायादार पेड़ों के नीचे बांधना चाहिए । पशुशाला अगर पक्की है तो उसकी छत पर कबाड़ अथवा सूखी घास रखें जिससे छत ठंडी रहे। टीनशेड व कम ऊंचाई की पक्की छत के नीचे पशुओं को बांधने से बचें। सूखे चारे की अपेक्षा हरे चारे का अधिक प्रयोग करें। बीमारी होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि इस समय गलघोंटू बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। जुलाई से खुरपका और मुंहपका बीमारी का टीकाकरण होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed